ईरान पर ट्रंप ने दे दिया ये बड़ा संकेत, डील लगभग फाइनल! होर्मुज को लेकर भी कर दिया बड़ा दावा

Iran US Peace Deal: ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और कई अन्य देशों के बीच एक समझौते पर बड़े पैमाने पर बातचीत हो चुकी है, जिसे अब अंतिम रूप दिए जाना बाकी है। इस समझौते के कई अन्य तत्वों के अलावा, जल्द ही स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को खोल दिया जाएगा'

अपडेटेड May 24, 2026 पर 7:27 AM
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इस महाडील में पाकिस्तान, सऊदी अरब, UAE, कतर और तुर्की मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं

Iran US Peace Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता लगभग पूरा हो चुका है, बस इस पर अंतिम मुहर लगना बाकी है। इस समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज को दोबारा खोला जाएगा, जो युद्ध के कारण लंबे समय से बंद था।

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और कई अन्य देशों के बीच एक समझौते पर बड़े पैमाने पर बातचीत हो चुकी है, जिसे अब अंतिम रूप दिए जाना बाकी है। इस समझौते के कई अन्य तत्वों के अलावा, स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को भी खोल दिया जाएगा।'

शांति समझौते के ये है मुख्य बिंदु


स्ट्रैट ऑफ होर्मुज खुलेगा: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह रास्ता 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से काफी हद तक बंद है। इसके खुलने से वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई सामान्य हो सकेगी।

क्षेत्रीय देशों की भूमिका: इस महाडील में पाकिस्तान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और तुर्की जैसे मिडिल ईस्ट के प्रमुख देश मध्यस्थ और सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं।

कच्चे तेल में राहत की उम्मीद: इस युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चल रही हैं। समझौते के बाद तेल और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है।

ईरान का क्या है रुख?

ईरान ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका के साथ शांति समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी टेलीविजन पर कहा, 'पिछले एक हफ्ते में दोनों पक्षों के विचार एक बिंदु पर आकर मिल रहे हैं और समझौते के अंतिम मसौदे की समीक्षा की जा रही है।'

हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाने जैसे बड़े और विवादित मुद्दे फिलहाल इस बातचीत की टेबल पर नहीं हैं। इन्हें बाद के चरणों में सुलझाया जाएगा।

इन 3 बड़ी शर्तों पर अड़ा है अमेरिका

भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को कहा कि बातचीत में प्रगति हुई है और अगले कुछ दिनों में कोई बड़ा ऐलान हो सकता है। लेकिन उन्होंने अमेरिका की तीन सख्त शर्तें भी दोहराईं:

  • ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए।
  • ईरान को अपना अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम सौंपना होगा।
  • स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से जहाजों को बिना किसी रोक-टोक के स्वतंत्र रूप से गुजरने की अनुमति देनी होगी।

ईरान की जवाबी मांगें

दूसरी ओर, ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। ईरान ने साफ किया है कि वह अपना यूरेनियम सौंपने या संवर्धन रोकने की मांगों को खारिज करता है। इसके अलावा, ईरान की मांगें इस प्रकार हैं:

फ्री पास पर टैक्स: ईरान का कहना है कि स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से वह टैक्स वसूलेगा।

फ्रीज फंड की रिहाई: ईरान ने मांग की है कि अमेरिका विदेशों में ब्लॉक पड़ी उसकी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा तुरंत रिलीज करे।

ट्रंप पर घरेलू राजनीति और चुनाव का दबाव

डोनाल्ड ट्रंप पर इस युद्ध को तुरंत खत्म करने का भारी घरेलू राजनीतिक दबाव भी है। अमेरिका में नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, जिससे तय होगा कि कांग्रेस पर किसका नियंत्रण रहेगा। युद्ध के कारण अमेरिका में गैसोलीन यानी पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे अमेरिकी जनता बेहद नाराज है। यही वजह है कि ट्रंप इस डील को जल्द से जल्द फाइनल करना चाहते हैं।

कैसे शुरू हुआ था यह युद्ध?

यह भीषण संघर्ष तब शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी और उसके आसपास के देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस युद्ध में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें सबसे ज्यादा संख्या ईरान और लेबनान के नागरिकों की है।

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