El Nino effect: भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में जलवायु परिवर्तन और मौसमी बदलावों के बीच पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मजबूत होते अल नीनो, रिकॉर्ड हाई टेंप्रेचर और बारिश की भारी कमी की वजह से श्रीलंका के कई हिस्सों में सूखा और ड्राई मौसम बेहद भीषण रूप ले चुका है। अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस मौसमी आपदा की वजह से देश भर में 1 लाख 15 से अधिक लोग पीने के पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।
अल नीनो का श्रीलंका पर असर
श्रीलंका के मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक अजीत विजेमन्ना ने जानकारी दी है कि क्षेत्र में अल नीनो का असर रंग दिखा रहा है। ये गर्म मौसम के पैटर्न के लिए जिम्मेदार हो सकता है। आपको बता दें कि अल नीनो एक ऐसी मौसमी गतिविधि है जो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के पानी का के गर्म होने से पैदा होती है। ये पूरे क्षेत्र के तापमान पैटर्न को पूरी तरह से बदल देता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि चारों तरफ से हिंद महासागर से घिरा होने की वजह से श्रीलंका पर इस अल नीनो का असर अधिक तेज देखने को मिल सकता है। लगातार जारी सूखे के बीच अधिकारी इसके संभावित प्रभावों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
7 जिलों के 115000 से अधिक लोग प्रभावित, जलाशय सूखे
आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक अल नीनो मौसम पैटर्न की वजह से श्रीलंका के 25 प्रशासनिक जिलों में से 7 जिलों में 115586 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। भीषण गर्मी और बारिश न होने से कई इलाकों में पानी की उपलब्धता को लेकर गंभीर चुनौतियां पैदा हो गई हैं। डीएमसी अधिकारी प्रगीत दनांसुरिया के मुताबिक मौजूदा समय में देश के 1 लाख 15 हजार से ज्यादा लोग पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं।
उत्तर-मध्य अनुराधापुरा जिले में सिंचाई अधिकारियों ने बताया कि लगभग 3500 एकड़-फिट की क्षमता वाले एरुवेवा जलाशय का जलस्तर घटकर अब मात्र 1000 एकड़-फिट रह गया है। मध्य क्षेत्र के माटले और उत्तर-पूर्व के नंदीकडाल सहित कई क्षेत्रों में वॉटर बॉडी के स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
वन्यजीवों, समुद्री जीवन और खेती पर पड़ा बुरा असर
इस लंबे शुष्क मौसम और जल संकट ने श्रीलंका के पारितंत्र और कृषि को भारी नुकसान पहुंचाया है। उत्तर-पूर्व के मुल्लैथिवु लैगून में हजारों की संख्या में छोटी मछलियां मृत पाई गई हैं। अधिकारियों ने इन मौतों का कारण समुद्री पानी और मीठे पानी के आपस में मिलने को बताया है। कई क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोत पूरी तरह सूख रहे हैं। इसकी वजह से जंगली जानवर पानी के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में भटकने के लिए मजबूर हो गए हैं। पानी की कमी की वजह से कृषि क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। धान, नारियल, केला और अमरूद जैसी प्रमुख फसलें पानी न मिलने से नष्ट होने के कगार पर हैं।
सितंबर के अंत से राहत की उम्मीद
मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक अजीत विजेमन्ना ने उम्मीद जताई है कि सितंबर के अंत से देश में कुछ बारिश होने की संभावना है। ऐसे में अगर बारिश होती ह तो श्रीलंका को इस भीषण गर्म मौसम, जल संकट और अल नीनो के प्रभाव से राहत मिल सकती है।