Europe Heatwave Explainer: पिघलती सड़कें, 1300 से अधिक मौतें! यूरोप में 40°C पार टेंप्रेचर ने कैसे मचा दिया हाहाकार?

Europe Heatwave Explainer: यूरोप के कई देशों में टेंप्रेचर 40°C के पार पहुंच गया है। कई देशों ने अपने ऑल टाइम हॉटेस्ट डे के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। इस भीषण गर्मी की वजह से यूरोप के रसूखदार देशों का इंफ्रास्ट्रक्चर चरमरा गया है। अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है। ट्रैफिक सिस्टम भी जबर्दस्त प्रभावित हुआ है। सबसे गंभीर खबर मौतों के दावों को लेकर है

अपडेटेड Jun 29, 2026 पर 2:17 PM
Europe Heatwave: यूरोप इस वक्त इतिहास की सबसे भीषण और तीव्र हीटवेव यानी लू का सामना कर रहा है

Europe Heatwave Explainer: यूरोप इस समय अपने हालिया इतिहास की सबसे भीषण और तीव्र हीटवेव यानी लू का सामना कर रहा है। यूरोप के कई देशों में टेंप्रेचर 40°C के पार पहुंच गया है। कई देशों ने अपने ऑल टाइम हॉटेस्ट डे के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। इस भीषण गर्मी की वजह से यूरोप के रसूखदार देशों का इंफ्रास्ट्रक्चर चरमरा गया है। अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है। ट्रैफिक सिस्टम भी जबर्दस्त प्रभावित हुआ है। सबसे गंभीर खबर मौतों के दावों को लेकर है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में बताया है कि 21 जून से अब तक यूरोप में हाई टेंप्रेचर की वजह से 1300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की जा चुकी हैं।

यूरोप में टूटा गर्मी का रिकॉर्ड, बेहाल हुए लोग


यूरोप में हीटवेव की लहर सबसे पहले पश्चिमी यूरोप में शुरू हुई थी। अब यह यूरोप के मध्य और पूर्वी हिस्सों में फैल चुकी है। जर्मनी में तापमान 41°C के पार दर्ज कर गया है। जबकि स्विट्जरलैंड के बेसेल में रिकॉर्ड 38.8°C टेंप्रेचर दर्ज किया गया है। चेक रिपब्लिक में पारा 40°C को पार कर गया। वहीं डेनमार्क में साल 1874 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। ब्रिटेन में रिकॉर्ड इतिहास का सबसे गर्म जून का दिन दर्ज किया गया है।

यूरोप के घरों में AC की कमी

जर्मनी के हालात ऐसे हैं कि बर्लिन की पुलिस सड़कों पर पानी की बौछार करने वाले दो वाटर कैनन का इस्तेमाल कर रही है। इनका इस्तेमाल आमतौर पर विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए किया जाता है। फ्रांस इस समय इतिहास की सबसे भीषण हीटवेव से गुजर रहा है। देश के अधिकांश घरों में AC नहीं है।

इस वजह से लोग राहत पाने के लिए एसी वाले होटलों और स्विमिंग पूलों का रुख कर रहे हैं। पेरिस में पिछले बुधवार को जून का रिकॉर्ड 40.9°C तापमान दर्ज किया गया। पेरिस की करीब तीन-चौथाई छतों पर गर्मी सोखने वाली जिंक शीट्स लगी हैं। इससे वहां के अपार्टमेंट्स बेहद गर्म हो गए और लोगों को होटलों में बुकिंग करानी पड़ी। टूर्स शहर में एसी वाले होटल पूरी तरह बुक हो गए।

पिघलती सड़कें और मुड़ती ट्रेन की पटरियां

अत्यधिक गर्मी के कारण यूरोप का पुराना पड़ रहा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रभावित हुआ है। परिवहन नेटवर्क ठप हो गया है। जर्मनी में भीषण गर्मी की वजह से कंक्रीट के स्लैब फैल गए और उनमें दरारें आ गईं। इससे ऑटोबान के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। रेल ऑपरेटर ड्यूश बान ने पटरियों, सिग्नलिंग सिस्टम और ओवरहेड बिजली लाइनों पर गर्मी के असर को देखते हुए गैर-जरूरी यात्रा न करने की सलाह दी है। ऑनलाइन वायरल वीडियो में सड़कें रैप होते और ट्रॉम की पटरियों को गर्मी की वजह से नुकसान पहुंचते देखा जा रहा है।

फ्रांस में भी सड़कें पिघलने, ट्रेनों में देरी और बिजली कटौती की खबरें आ रही हैं। सरकारी ऊर्जा कंपनी EDF ने कुछ परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में उत्पादन कम कर दिया है क्योंकि नदियों का तापमान बढ़ने से कूलिंग ऑपरेशन प्रभावित हो रहे थे। वैसे कंपनी ने बिजली की आपूर्ति को पर्याप्त बताया है।

स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों पर बड़ा संकट

स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर मॉनिटरिंग के प्रमुख के मुताबिक, इस हीटवेव के कारण स्विस ग्लेशियर भारी मात्रा में बर्फ खोने वाले हैं। अनुमान है कि पिछली सर्दियों में ग्लेशियरों पर जमा हुई सारी बर्फ और बर्फबारी सोमवार तक पूरी तरह पिघल जाएगी। यह इतिहास में दूसरी सबसे तीव्र और जल्दी आने वाली स्थिति है जिसे ग्लेशियर लॉस डे या टिपिंग पॉइंट के रूप में जाना जाता है।

अस्पतालों में उमड़ी मरीजों की भीड़

फ्रांस में पेरिस की पब्लिक हॉस्पिटल अथॉरिटी ने अपने सभी 38 अस्पतालों में आपातकालीन उपाय सक्रिय कर दिए हैं। यहां के इमरजेंसी विभागों में 24 घंटे के भीतर करीब 3000 मरीज पहुंचे हैं। यह आंकड़ा सामान्य से एक-तिहाई अधिक है। अस्पतालों में विशेष रूप से बुजुर्गों में हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और दिल से जुड़ी आपातकालीन समस्याएं देखी जा रही हैं। मेडिकल डिस्पैच सेंटरों पर आपातकालीन कॉलों की बाढ़ आ गई है। सुरक्षा चिंताओं के कारण पेरिस प्राइड मार्च और एक बड़े म्यूजिक फेस्टिवल सहित कई सार्वजनिक कार्यक्रमों को स्थगित या रद्द कर दिया गया है।

जर्मनी के डोरमागेन में एक नर्सिंग होम के अंदर का तापमान 35°C पहुंचने के बाद निवासियों को वहां से सुरक्षित निकाला गया। वहां रात में एक निवासी की मौत भी हो गई, हालांकि अधिकारी अभी इसकी जांच कर रहे हैं कि इस मौत की वजह गर्मी ही थी या कुछ और।

इटली और ब्रिटेन हाई अलर्ट पर

इटली ने रोम, मिलान, फ्लोरेंस, वेनिस और बोलोग्ना सहित कई बड़े शहरों में रेड हीट अलर्ट जारी कर रखा है। यूके में मौसम के ठंडा होने के पूर्वानुमान के बावजूद एम्बर हीट वार्निंग लागू है। सप्ताह के दौरान बिना निगरानी वाली झीलों और नदियों में तैरने के कारण डूबने की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद प्रशासन ने लोगों को सचेत किया है।

ओमेगा ब्लॉक: यूरोप में क्यों पड़ रही है इतनी भीषण गर्मी?

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस लंबे हीटवेव के पीछे ओमेगा ब्लॉक नाम का वेदर पैटर्न जिम्मेदार है। इस पैटर्न में एक मजबूत हाई-प्रेशर सिस्टम दो लो-प्रेशर सिस्टम के बीच फंस जाता है, जिससे ठंडी हवा इस क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर पाती।

इस ठहरे हुए वेदर सिस्टम के कारण गर्म हवा कई दिनों तक यूरोप के बड़े हिस्से के ऊपर जमी रही, जिसने तापमान को मौसमी औसत से 18°C ऊपर तक पहुंचा दिया। वैज्ञानिकों ने बार-बार चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की आवृत्ति, तीव्रता और अवधि बढ़ रही है।

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आगे क्या होगा?

मौसम का पूर्वानु्मान बता रहा है कि पश्चिमी यूरोप के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी धीरे-धीरे कम होगी। जर्मनी, पोलैंड और चेक रिपब्लिक में गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान है।

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