पाकिस्तान को चौथी बार करारा झटका लग सकता है। इसकी वजह ये है कि मनीकंट्रोल को सूत्रों ने बताया है कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) टेरर फाइनेंसिंग पर रोक लगाने में फेल होने के चलते आने वाले हफ्तों में चौथी बार पाकिस्तान को अपनी ग्रे लिस्ट में रख सकता है। अपराधों पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था एफएटीएफ इस महीने के आखिरी या अगले महीने जुलाई के शुरुआती दिनों में पाकिस्तान से जुड़ी एक मूल्यांकन रिपोर्ट जारी कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट में आतंकियों के फाइनेंस को रोकने में पाकिस्तान के फेल होने और इसे फिर से ग्रे लिस्ट में रख जाने का जिक्र होगा।
पिछले हफ्ते फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में हुए एफएटीएफ के सामने भारत ने पाकिस्तान के आंतकी नेटवर्क और पाकिस्तान की सरकार से आतंकियों को मिलने वाले सपोर्ट का चिठ्ठा खोला था। इस बैठक के बारे में कुछ जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन इस बात की संभावना है कि पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में फिर से रखा जा सकता है
ग्रे लिस्ट में शामिल होने का क्या है मतलब?
एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल होने का मतलब है कि पाकिस्तान पर निगरानी बढ़ जाएगी। इसमें ऐसे देशों को रखा जाता है जहां की सरकार मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकियों की फाइनेंसिंग का मुकाबला करने में सफल नहीं हो पा रही हैं। इस लिस्ट में आने के बाद एफएटीएफ अपनी निगरानी बढ़ा देती हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे अपने काम को अच्छे से कर रहे हैं। इससे पहले भी पाकिस्तान को वर्ष 2008-2009, वर्ष 2012-2015 और वर्ष 2018-2022 के बीच रखा गया था।
पाकिस्तान को वर्ष 2022 में ग्रे लिस्ट से हटा दिया गया था, जब एफएटीएफ ने माना कि पाकिस्तान ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकियों की फाइनेंसिंग पर अंकुश लगाने से जुड़ा दो एक्शन प्लान पूरा किया है। पाकिस्तान ने एफएटीएप की 40 में से 38 सिफारिशों का "अनुपालन" या "काफी हद तक अनुपालन" किया था। हालांकि अब एक बार फिर पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल होने की तलवार लटक रही है। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक एफएटीएफ ने पाकिस्तान की निगरानी पहले ही शुरू कर दी है लेकिन ग्रे लिस्ट पर फैसला अभी लेना बाकी है जिस पर आने वाले हफ्तों में खुलासा हो जाएगा।
16 जून को एफएटीएफ ने पहलगाम में हुए क्रूर आतंकी हमले की निंदा की थी और कहा था कि यह और हालिया हमले बिना पैसे और आंतकी समर्थकों के बीच पैसों के ट्रांसफर के संभव ही नहीं थे। ग्रे लिस्ट में शामिल देशों पर आमतौर पर प्रतिबंध और बढ़ी हुई निगरानी के तहत नहीं रखा जाता है लेकिन इसमें शामिल होने के बाद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में गिरावट और कारोबारियों कड़ी निगरानी के चलते कंप्लॉयंस पर अधिक खर्च जैसी दिक्कतों से जूझना पड़ता है। बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले और इसके जबाव में भारत की जवाबी कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने कई देशों को सात प्रतिनिधिमंडल भेजे थे ताकि भारत का आतंकवाद पर रुख स्पष्ट किया जा सके और आतंकवाद को पाकिस्तान के समर्थन को उजागर किया जा सके।
अभी तीन देश हैं FATF की ब्लैक लिस्ट में
एफएटीएफ पिछले 10 वर्षों से सोशल मीडिया, क्राउड फंडिंग और वर्चुअल एसेट्स के गलत इस्तेमाल जैसे टेररिस्ट फाइनेंसिंग रिस्क से बचने में मदद कर रही है। यह एक साल में तीन बार बैठक कर देशों का जायजा लेती है और मूल्यांकन रिपोर्ट जारी करती है, जिसे आधिकारिक तौर पर "म्यूचुअल इवैल्यूएशन रिपोर्ट्स" (MER) कहते हैं। अगर इसे लगता है कि किसी देश में आतंकी फंडिंग या मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए कोई सिस्टम नहीं है, तो वह उसे ग्रे लिस्ट में डालने की सिफारिश कर सकता है, जो कि उसे सही रास्ता अपनाने या "ब्लैक लिस्ट" में डालने की चेतावनी है। अभी तीन देश- म्यांमार, ईरान और उत्तर कोरिया इसकी काली सूची में हैं। किसी भी देश के ग्रे या काली सूची में डालने का फैसला सर्वसम्मति से लिया जाता है। अगर इसके 39 सदस्यों में चार सदस्य किसी प्रस्ताव के पक्ष में नहीं हैं तो प्रस्ताव को खारिज कर दिया जाता है।