Donald Trump Secret Plane Swap: क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर एक बड़ा मिसाइल हमला होने वाला था? क्या ईरान के सीक्रेट एजेंटों को ट्रंप के होटल के कमरे से लेकर उनके हर एक कदम की सटीक जानकारी थी? जी हां, तुर्की में आयोजित नाटो सम्मेलन के दौरान एक ऐसा खौफनाक सनसनीखेज वाकया सामने आया है, जिसने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और सीक्रेट सर्विस के होश उड़ा दिए थे।
न्यू यॉर्क टाइम्स की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ओर से 'सरफेस-टू-एयर मिसाइल' हमले के इनपुट मिलने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप को तुर्की से बेहद नाटकीय और सीक्रेट तरीके से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
ईरानी जासूसों के पास थी कमरे के फ्लोर तक की खबर!
अंकारा में नाटो सम्मेलन के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को बेहद खौफनाक इनपुट्स मिले। इंटेल रिपोर्ट में दावा किया गया था कि, ईरानी गुर्गों को इस बात की सटीक जानकारी थी कि ट्रंप अंकारा के किस होटल में रुके हैं और किस फ्लोर पर ठहरे हुए हैं।
नाटो समिट वेन्यू के पास एक संदिग्ध व्यक्ति को कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइल के साथ देखा गया था। रिपोर्ट यह भी थी कि ट्रंप जिस भी प्लेन से उड़ान भरेंगे, उसे सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से निशाना बनाया जा सकता है।
कैटरिंग ट्रक में छिपकर निकले ट्रंप
ईरान के इस सीधे और जानलेवा खतरे को देखते हुए सीक्रेट सर्विस और अमेरिकी सेना ने ट्रंप को बचाने के लिए एक हॉलीवुड फिल्म जैसा 'मास्टरप्लान' बनाया। दुनिया और मीडिया को चकमा देने के लिए ट्रंप सबसे पहले कैमरों के सामने अपने आधिकारिक विमान 'एयर फोर्स वन' में सवार हुए। उन्होंने कहा भी कि वे 'पुरानी यादों के लिए' इस प्लेन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसके बाद एयरपोर्ट पर एक कैटरिंग कंटेनर को प्लेन के पास लाया गया। ट्रंप को बेहद चुपके से इस कैटरिंग ट्रक के अंदर ले जाया गया। ट्रंप को इस ट्रक के जरिए गुप्त रूप से एक सैन्य विमान (Air Force C-32A) में ट्रांसफर किया गया और वहां से वे ब्रिटेन के लिए रवाना हो गए। जब दुनिया सोच रही थी कि ट्रंप एयर फोर्स वन में हैं, तब वे एक मिलिट्री प्लेन से तुर्की की सीमा पार कर चुके थे।
ट्रंप का सनसनीखेज कबूलनामा- 'मैंने ज्यादा सवाल नहीं पूछे...'
तुर्की में हुए इस सीक्रेट प्लेन स्वैप पर ट्रंप का बयान भी सामने आया है। उन्होंने खुद पुष्टि की है कि उन्हें सुरक्षा एजेंसियों के कहने पर अपना विमान बदलना पड़ा था।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'मैं सीक्रेट सर्विस और सेना के निर्देशों पर चलता हूं। वे चाहते थे कि मैं दूसरी फ्लाइट और दूसरे प्लेन से जाऊं... मैंने वही किया जो उन्होंने कहा। मुझे लगता है कि वहां कोई बड़ा खतरा था। मैंने इसके बारे में ज्यादा सवाल नहीं पूछे, क्योंकि मुझे अक्सर ऐसी धमकियां मिलती रहती हैं। शायद मैं सबसे ज्यादा असरदार राष्ट्रपति हूं, इसलिए ऐसा होता है।'
जब दो देशों के बीच मंडराया जंग का खतरा
विभाजन और वैश्विक कूटनीति के बीच इस घटना ने अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव में घी डालने का काम किया है। अगर तुर्की में अमेरिकी राष्ट्रपति के विमान पर हमला हो जाता या ट्रंप को नुकसान पहुंचता, तो यह सीधे तौर पर तीसरे विश्व युद्ध का कारण बन सकता था। फिलहाल, अमेरिका की इस सतर्कता और सीक्रेट ऑपरेशन ने ट्रंप की जान बचा ली।