नेपाल में बाढ़ की महात्रासदी के बाद संसद में आए PM बालेन शाह और भारत के लिए सीधे कह दी ये बड़ी बात
Nepal Floods: महात्रासदी के बाद बुधवार (2 सितंबर) को संसद पहुंचे नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पहली बार भारत और चीन की ओर से संकट की घड़ी में तेजी से पहुंचाई गई मदद के लिए दोनों देशों का आभार जताया है। शाह ने कहा कि इस भीषण आपदा के दौरान दोनों पड़ोसी देशों ने सहायता पहुंचाने में तेजी दिखाई
Nepal Floods: भारतीय बचावकर्मियों ने नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान को तेज कर दिया है
Nepal Floods: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। इस बीच, महात्रासदी के बाद बुधवार (2 सितंबर) को संसद पहुंचे नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पहली बार भारत और चीन की ओर से संकट की घड़ी में तेजी से पहुंचाई गई मदद के लिए दोनों देशों का आभार जताया है। शाह ने कहा कि इस भीषण आपदा के दौरान दोनों पड़ोसी देशों ने सहायता पहुंचाने में तेजी दिखाई। नेपाल के रासुवा और नुवाकोट समेत कई इलाकों में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। कई सड़कें, पुल और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। हजारों लोगों के लापता होने की खबरों के बीच राहत एवं बचाव अभियान को तेज किया गया है।
बालेन शाह ने अपने संबोधन में कहा, "हम इस मुश्किल समय में देश के साथ हैं। यह घटना 26 अगस्त 2026 को सुबह करीब 8:30 बजे हुई। जैसे ही हमें घटना के बारे में पता चला, हमने अपनी टीमों को अलर्ट कर दिया। सुबह 9:15 बजे एक बैठक बुलाई गई। हेलीकॉप्टरों को स्टैंडबाय पर रखा गया। सुबह 10:30 बजे हमारी इमरजेंसी रेस्क्यू टीमें तैनात होने के लिए तैयार थीं। लोगों को बचाना हमारी प्राथमिकता थी।"
आपदा के बाद भारत ने नेपाल के लिए तत्काल मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से बात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया था। इसके बाद भारतीय वायुसेना के विमान से राहत सामग्री नेपाल भेजी गई, जिसमें दवाइयां, अस्थायी आश्रय सामग्री, कंबल, हाइजीन किट और सोलर लैंप जैसी जरूरी चीजें शामिल थीं। भारत की ओर से राहत सामग्री के साथ बचाव और तकनीकी सहायता के लिए टीमें भी तैयार रखी गईं। बाद में भारतीय विशेषज्ञ और बचाव दल नेपाल के राहत अभियान में सहयोग के लिए पहुंचे।
भारत ने नेपाल को और राहत सामग्री भेजी
भारत ने बुधवार को बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित नेपाल के लिए पांच टन से अधिक आवश्यक दवाओं की पांचवीं खेप भेजी। साथ ही 11 सदस्यीय बचाव दल भी रवाना किया गया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, "भारत का पांचवां विमान नेपाल के लिए रवाना हो गया है। इसमें विशेष उपकरणों से लैस 11 सदस्यीय बचाव दल और 5.5 टन आवश्यक दवाएं भेजी गई हैं।" भारत अब तक नेपाल को कुल 68.5 टन राहत सामग्री पहुंचा चुका है।
नई दिल्ली ने खोज और बचाव अभियानों के लिए उपकरणों के साथ डॉक्टरों की एक टीम तथा तकनीकी दल भी भेजा था। भारत ने राहत सामग्री की पहली खेप 26 अगस्त को भेजी थी, जिस दिन नेपाल में अचानक बाढ़ आई और तबाही मची थी। यह खेप प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अपने नेपाली समकक्ष शाह से बातचीत करने के कुछ घंटे बाद भेजी गई थी। पीएम मोदी ने शाह को स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था।
चीन ने भी बढ़ाया सहयोग का हाथ
नेपाल को चीन की ओर से भी सहायता की पेशकश की गई। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, चीन ने संकट के दौरान संभावित सहायता उपलब्ध कराने की बात कही थी। नेपाल सरकार ने अपनी जरूरतों का आकलन कर राहत और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाया। बाद में भारत और चीन दोनों के विशेषज्ञ एवं बचाव दल नेपाल में मुश्किल इलाकों में राहत और खोज अभियान में सहयोग करते नजर आए। खासकर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना बचाव टीमों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
बाढ़ ने मचाई भारी तबाही, 1100 से अधिक लोगों की मौत
नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बुधवार को बढ़कर 1,127 हो गई। हिमालयी क्षेत्र में आई इस आपदा के एक सप्ताह बाद भी बचावकर्मी हजारों लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहूं से 38 शव बरामद हुए हैं।
पुलिस ने बताया कि 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। जबकि 95 शव परिजनों को सौंपे जा चुके हैं। लापता परिजनों की पहचान में परिवारों की मदद के लिए 911 अज्ञात शवों का डिटेल्स नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। पुलिस के मुताबिक,अब तक सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला है। जबकि 4,858 लापता लोगों की तलाश अभी जारी है।
अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। ये पुलिसकर्मी खोज एवं बचाव अभियान, राहत सामग्री के वितरण और बरामद शवों के प्रबंधन में जुटे हैं। पुलिस की टीम उच्च जोखिम वाले इलाकों से परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, मलबे के कारण बंद सड़कों को साफ करने तथा स्थानीय प्रशासन और लोगों के साथ मिलकर खोज, बचाव और राहत अभियानों के समन्वय का काम भी कर रही हैं।
Nepal PM Balen Shah, in the Parliament, thanks India & China for rushing aid after the massive flooding pic.twitter.com/CyAhjoAUQy
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के ढहने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई थी। इस बीच, नेपाल में लगातार हो रही बारिश के कारण रसुवा और नुवाकोट में खोज एवं बचाव अभियान प्रभावित हो रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 12 घंटों में सबसे अधिक बारिश सिंधुपालचोक के नोस्याम पाटी स्थित मौसम केंद्र में दर्ज की गई, जहां 60.2 मिलीमीटर बारिश हुई।