इस्लाम में परमाणु हथियार “हराम”, ईरान ने दिया सुप्रीम लीडर के 'फतवा' का हवाला, फिर कहां से आया 60% एनरीच यूरेनियम?

ईरान न्यूक्लियर को इस्लाम के खिलाफ बता रहा है। भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा है कि ईरान परमाणु हथियार रखने के खिलाफ है और इस्लाम में इसे “हराम” यानी प्रतिबंधित माना जाता है। वाराणसी में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान ने 30 साल पहले ही साफ कर दिया था कि वह परमाणु हथियार नहीं चाहता और आज भी उसका वही रुख है

अपडेटेड May 24, 2026 पर 3:41 PM
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Iran Nuclear: इस्लाम में परमाणु हथियार रखना “हराम”, एक बार फिर ईरान ने दिया सुप्रीम लीडर के 'फतवा' का हवाला

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अपने पास मौजूद ज्यादा शुद्ध (Highly Enriched) यूरेनियम के भंडार को छोड़ने पर सहमति दे दी है। इसे अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने एक ऐसे बयान पर सहमति जताई है, जिसमें वह अपने समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक को छोड़ने की बात मान रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस यूरेनियम का इस्तेमाल कई परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता था।

बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान ईरान के यूरेनियम भंडार का मुद्दा सबसे बड़ी अड़चनों में से एक था। रिपोर्ट में कहा गया है कि दो अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ईरान ने सिद्धांत रूप में इस भंडार को सौंपने की हामी भर दी है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि इस यूरेनियम को कैसे हटाया जाएगा या किस देश को सौंपा जाएगा। इस पर आगे की बातचीत में फैसला लिया जाएगा।

हालांकि, अब ईरान न्यूक्लियर को इस्लाम के खिलाफ बता रहा है। भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा है कि ईरान परमाणु हथियार रखने के खिलाफ है और इस्लाम में इसे “हराम” यानी प्रतिबंधित माना जाता है।


वाराणसी में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान ने 30 साल पहले ही साफ कर दिया था कि वह परमाणु हथियार नहीं चाहता और आज भी उसका वही रुख है।

उन्होंने कहा, “करीब 30 साल पहले हमने साफ और खुलकर कहा था कि हम परमाणु हथियार नहीं रखना चाहते। हमारे सुप्रीम लीडर ने इस पर फतवा जारी किया है, जिसे हम धार्मिक आदेश मानते हैं। उसके मुताबिक परमाणु हथियार रखना इस्लाम में हराम है। इसलिए हम इन्हें नहीं रख सकते। न पहले चाहते थे और न अब चाहते हैं।”

क्या ईरान ने कबूली परमाणु हथियार बनाने की बात?

ईरान ने कभी सीधे तौर पर ये नहीं कबूला कि उसके पास परमाणु हथियार या उसे बनाने की सामग्री मौजूद है।  आधिकारिक तौर पर वह हमेशा अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और बिजली बनाने (Civilian Energy) के लिए बताता आया है। हालांकि, ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने खुले तौर पर माना है कि उनके पास बम बनाने की तकनीकी क्षमता है, बस वे उसे असेंबल नहीं कर रहे हैं।

ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ रणनीतिक सलाहकार कमाल खराजी ने अल जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में साफ कहा था, "हमारे पास परमाणु बम बनाने की तकनीकी क्षमता है। हमारे पास यूरेनियम को 20% से 60% तक संवर्धित करने की क्षमता है और इसे 90% (वेपन्स ग्रेड) तक ले जाना हमारे लिए कोई बड़ी बात नहीं है... लेकिन हमने बम बनाने का फैसला नहीं किया है।"

ईरान परमाणु ऊर्जा संगठन प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने भी सार्वजनिक रूप से दोहराया था कि ईरान के पास परमाणु बम बनाने की तकनीकी क्षमता है, लेकिन उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है।

ईरान के सुप्रीम लीडर का फतवा

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई ने एक धार्मिक आदेश (फतवा) जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि इस्लाम में परमाणु हथियार बनाना और उसका इस्तेमाल करना 'हराम' (प्रतिबंधित) है। ईरान हमेशा इस फतवे को अपनी बेगुनाही के सबूत के तौर पर पेश करता रहा है।

हालांकि, ईरान के ही पूर्व खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब ने एक बार बेहद चर्चित बयान देते हुए कहा था, "हमारा परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और सर्वोच्च नेता का फतवा इसे प्रतिबंधित करता है... लेकिन अगर आप एक बिल्ली को कोने में धकेल देंगे, तो वह ऐसा व्यवहार कर सकती है, जो आजाद होने पर नहीं करती। अगर ईरान को मजबूर किया गया, तो यह हमारी गलती नहीं होगी।"

ईरान ने कभी यह नहीं कहा कि "हमारे पास परमाणु बम है", लेकिन उसने बार-बार पूरी दुनिया के सामने यह डंके की चोट पर माना है कि "हमारे पास परमाणु बम बनाने की चाबी, सामग्री और क्षमता (Nuclear Latency) पूरी तरह मौजूद है।"

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