Pakistan News: यमन स्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर अपने शुरुआती सख्त रुख से पीछे हटने के बाद अब पाकिस्तान ने सऊदी अरब को भरोसा दिलाने की कोशिश तेज कर दी है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार (13 सितंबर) को सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान (MBS) से फोन पर बातचीत की। सऊदी अरब पर हुए हूती हमलों की कड़ी निंदा करते हुए रियाद के प्रति पाकिस्तान की पूरी एकजुटता दोहराई।
पाकिस्तान ने सऊदी अरब पर हाल में हुए हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद चेतावनी दी कि ये हमले क्षेत्रीय सुरक्षा तथा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर बातचीत के दौरान यह समर्थन दोहराया।
पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया इराक की तरफ से हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए ड्रोन हमले के बाद सामने आई है। इसके चलते सऊदी अरब ने अपनी 1,200 किलोमीटर लंबी पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
यह पाइपलाइन सऊदी तेल निर्यात के लिए एक प्रमुख वैकल्पिक रूट्स है, क्योंकि यह कच्चे तेल को होर्मुज स्ट्रेट से गुजारे बिना लाल सागर तक पहुंचने की अनुमति देती है। फरवरी से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।
शरीफ ने सऊदी अरब के नागरिक एवं आर्थिक बुनियादी ढांचे पर हूती विद्रोहियों के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि इन हमलों से वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा आपूर्ति और अधिक प्रभावित हो सकती है।
पाकिस्तानी पीएमओ के बयान के अनुसार, "सऊदी नेतृत्व के साथ-साथ सऊदी अरब के भाईचारे वाले लोगों के प्रति पूर्ण एकजुटता व्यक्त करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि हालिया हूती विद्रोहियों की कार्रवाइयों ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को खतरे में डाला है तथा इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं ऊर्जा आपूर्ति में और व्यवधान आ सकता है।"
बयान में आगे कहा गया है कि सऊदी अरब के युवराज ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए इस्लामाबाद के प्रयासों की सराहना की। इसमें कहा गया कि दोनों नेता लगातार संपर्क में रहने पर सहमत हुए और जल्द ही मिलने की उम्मीद जताई।
24 घंटे में बदला पाकिस्तान का रुख
रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की ओर से पहले संकेत दिए गए थे कि अगर यमन का संघर्ष सऊदी क्षेत्र तक पहुंचता है तो रक्षा समझौते को सक्रिय करने की संभावना हो सकती है। हालांकि, इसके कुछ ही समय बाद इस्लामाबाद ने स्पष्ट किया कि फिलहाल कोई सैन्य प्रतिक्रिया विचाराधीन नहीं है।
इसे पाकिस्तान के रुख में महत्वपूर्ण नरमी के तौर पर देखा जा रहा है। इसी बीच सऊदी अरब पर हूतियों के हमले और तेज हो गए हैं। हालिया हमलों में सऊदी ऊर्जा और आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। दर्जनों लोग घायल हुए। ऐसे में पाकिस्तान पर यह स्पष्ट करने का दबाव बढ़ा कि वह अपने रक्षा समझौते के लिए कितना प्रतिबद्ध है।