PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोगों ने शहबाज शरीफ की सरकार के अत्याचार के खिलाफ अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। PoK में बुधवार (9 सितंबर) को एक बार फिर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के ऐलान पर पूरे क्षेत्र में शटर-डाउन और व्हील-जाम हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। कई इलाकों में दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। जबकि सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित हुआ। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के सड़कों पर उतरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा।
JAAC लंबे समय से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की सरकार और इस्लामाबाद की नीतियों के खिलाफ आंदोलन चला रही है। संगठन में व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल हैं। आंदोलन अब केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा। बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व, स्थानीय शासन और पाकिस्तान के कथित हस्तक्षेप जैसे मुद्दे भी इसके केंद्र में आ गए हैं।
12 आरक्षित सीटों को खत्म करने की मांग
JAAC की प्रमुख मांगों में क्षेत्रीय विधानसभा में पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इन सीटों की वजह से स्थानीय आबादी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित होता है और पाकिस्तान समर्थित राजनीतिक प्रभाव को बढ़ावा मिलता है। यह मुद्दा हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान भी काफी विवादित रहा। चुनाव हिंसा, सुरक्षा प्रतिबंधों और JAAC के बहिष्कार के बीच हुए। कुछ क्षेत्रों में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के कारण मतदान भी टालना पड़ा।
आंदोलन के केंद्र में ये मुद्दे
PoK में विरोध का एक बड़ा कारण आर्थिक समस्याएं भी हैं। प्रदर्शनकारी बिजली की दरों, खाद्य एवं गेहूं सब्सिडी, रोजगार, महंगाई और सरकारी सुविधाओं को लेकर लंबे समय से नाराजगी जाहिर करते रहे हैं। इससे पहले भी क्षेत्र में बिजली और गेहूं की कीमतों को लेकर बड़े आंदोलन हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप रहा है कि आम जनता आर्थिक दबाव झेल रही है, जबकि राजनीतिक और प्रशासनिक वर्ग को विशेष सुविधाएं हासिल हैं।
पाक सरकार ने JAAC पर लगाया बैन
आंदोलन बढ़ने के डर से पाकिस्तान-प्रशासित क्षेत्र की सरकार ने JAAC पर प्रतिबंध लगाने का कदम उठाया है। सरकार ने इसके पीछे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया। हालांकि, संगठन के नेताओं और समर्थकों ने सरकार के इस कदम को विरोध की आवाज दबाने की कोशिश बताया। पिछले कुछ महीनों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आई हैं। इन घटनाओं में मौत और घायल होने की खबरों ने तनाव को और बढ़ाया है। कई इलाकों में आवाजाही और संचार पर भी प्रतिबंध लगाए गए।
इन इलाकों में बंद का व्यापक असर
बुधवार के बंद का असर PoK के कई हिस्सों में दिखाई दिया। खासतौर पर भिंबर, मीरपुर, रावलाकोट, मुजफ्फराबाद और नीलम घाटी समेत प्रमुख क्षेत्रों में बाजार बंद रहे। इस दौरान परिवहन सेवाएं प्रभावित हुईं। कई जगह प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। लोगों ने अपनी मांगों के समर्थन में पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ नारे लगाए। JAAC का कहना है कि जब तक उसकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
नई सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
PoK में यह विरोध ऐसे समय में हो रहा है जब हालिया विधानसभा चुनावों के बाद पाकिस्तान की सत्तारूढ़ तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) ने करीब एक दशक बाद क्षेत्र में सत्ता में वापसी की है। ऐसे में JAAC का आंदोलन नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। एक ओर सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
वहीं, दूसरी ओर प्रदर्शनकारी राजनीतिक अधिकारों, आर्थिक राहत और स्थानीय मामलों में अधिक आजादी की मांग पर पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। आने वाले दिनों में यदि सरकार और JAAC के बीच बातचीत का रास्ता नहीं निकलता है, तो टकराव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है। आपको बता दें कि पीओके में पिछले कई महीनों से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं।