यूक्रेन के लोगों को सुसाइड बॉम्बर बना रहा रूस? Telegram के जरिए ऐसे बिछाया जा रहा जाल
Russia Ukraine War: रिपोर्ट के अनुसार, रूस के सपोर्ट वाले हैंडलर्स टेलीग्राम पर फर्जी नौकरियों का लालच देकर युवाओं और बेरोजगारों को फंसाते हैं। पहले तो छोटे काम दिए जाते हैं, जैसे सरकारी इमारतों की फोटो खींचना, फिर धीरे-धीरे उन्हें जिंदा बम ले जाने जैसे घातक कामों में धकेला जाता है
Russia Ukraine War: यूक्रेन के लोगों को सुसाइड बॉम्बर बना रहा रूस? Telegram के जरिए ऐसे बिछाया जा रहा जाल
यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी SBU ने दावा किया है कि रूस की खुफिया एजेंसियां अब यूक्रेनी नागरिकों को ही, खासकर बच्चों और युवाओं को, अंदरूनी हमलों के लिए भड़का रही हैं। इन युवाओं को टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए पैसों का लालच देकर बम ले जाने और प्लांट करने जैसे काम सौंपे जा रहे हैं। यह रणनीति रूस की "आंतरिक अस्थिरता फैलाने" की योजना का हिस्सा है, जिससे वह सीधे हमला किए बिना यूक्रेन को अंदर से कमजोर करना चाहता है।
रिपोर्ट के अनुसार, रूस के सपोर्ट वाले हैंडलर्स टेलीग्राम पर फर्जी नौकरियों का लालच देकर युवाओं और बेरोजगारों को फंसाते हैं। पहले तो छोटे काम दिए जाते हैं, जैसे सरकारी इमारतों की फोटो खींचना, फिर धीरे-धीरे उन्हें जिंदा बम ले जाने जैसे घातक कामों में धकेला जाता है।
कई मामलों में ये युवक यह तक नहीं जानते कि वे क्या ले जा रहे हैं, और अनजाने में सुसाइड बॉम्बर बन जाते हैं।
Rivne केस: एक आम लड़के से बॉम्बर बनने तक की कहानी
19 साल का ओलेह, जो बेरोजगार था और उसे पैसों की जरूरत थी, टेलीग्राम पर 'तेजी से पैसे कमाने' वाली एक नौकरी के जाल में फंस गया। उसे कहा गया कि उसे बस एक स्प्रे पेंट का डिब्बा पुलिस स्टेशन के बाहर छिड़कना है और इसके बदले उसे $1,000 दिए जाएंगे।
पर जब उसने बैग खोला, तो अंदर एक मोबाइल से जुड़ा हुआ बम मिला। यह देखकर वह घबरा गया और पुलिस को सूचना दे दी।
SBU पहले से ही इन गतिविधियों पर नजर रख रही थी और तुरंत मौके पर पहुंचकर ओलेह और उसके दोस्त सर्गेई को हिरासत में ले लिया।
मनोवैज्ञानिक और डिजिटल शोषण का खेल
SBU के अनुसार, रूसी क्यूरेटर्स खुद को यूक्रेनी नागरिक बताकर भावनात्मक सहानुभूति जताते हैं। कभी वे मददगार बनते हैं, कभी धमकी देते हैं।
एक केस में एक नाबालिग लड़की के फोन से निजी तस्वीरें हैक कर ली गईं और फिर उन्हें लीक करने की धमकी देकर उसे काम करने को मजबूर किया गया।
कई बार पुराने क्यूरेटर को ब्लॉक करने के बाद भी नए नाम से नया एजेंट जुड़ जाता है, जो फिर से काम शुरू करा देता है।
700 से ज्यादा गिरफ्तार, हर चौथा नाबालिग
जनवरी 2024 से अब तक, SBU ने 700 से ज्यादा लोगों को आतंक और साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया है, जिनमें से लगभग 25% नाबालिग हैं। सबसे कम उम्र की गिरफ्तार लड़की की उम्र सिर्फ 11 साल बताई गई है।
SBU का कहना है कि बम बनाने वाले और ले जाने वाले लोगों से रूसी एजेंट सीधे संपर्क नहीं करते। सबकुछ डिजिटल माध्यम से होता है — टेलीग्राम, क्रिप्टोकरेंसी, वीडियो गाइड।
एक केस में एक लड़की को टेलीग्राम पर बम बनाने की वीडियो ट्रेनिंग भेजी गई थी।
क्या यूरोप भी है अगला निशाना?
यूक्रेन के अधिकारियों का कहना है कि रूस यह सब यूक्रेन में ट्रायल कर रहा है, ताकि पश्चिमी देशों में भी यह मॉडल इस्तेमाल किया जा सके।
साइबर अटैक, रेलवे को निशाना बनाना, आगजनी जैसी घटनाएं पहले ही यूरोप में देखी गई हैं — ये सब इसी हाइब्रिड वॉरफेयर का हिस्सा हैं।
स्कूलों में जागरूकता अभियान
SBU ने स्कूलों में स्पेशल एजुकेशन प्रोग्राम शुरू किया है, जहां बच्चों को सिखाया जा रहा है कि ऑनलाइन जॉब ऑफर से कैसे सावधान रहें। एक अधिकारी ने कहा, "जैसे कहा जाता है, फ्री चीज सिर्फ चूहेदानी में होती है।”
ओलेह और उसका दोस्त सर्गेई अभी आतंकवाद और साजिश रचने के आरोपों में जेल में हैं। दोषी साबित होने पर उन्हें 12 साल तक की सजा हो सकती है।
ओलेह कहता है कि उसे अंदाजा नहीं था कि वह किसके लिए काम कर रहा है, लेकिन इस चूक ने उसका सब कुछ छीन लिया — उसका परिवार, उसका सम्मान और अब उसकी आजादी भी।
वो कहता है, “मेरी गर्लफ्रेंड ने फोन पर कहा– अब मुझसे कभी कॉन्टैक्ट मत करना। माता-पिता ने कहा– तू मूर्ख है।”