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सिकुड़ा चेहरा...गोल कान और लंबी मूंछ, 100 साल में पहली बार मिली बिल्ली की ये प्रजाति

बोलिवियन फेलिड्स रिसर्च प्रोग्राम (Programa de Investigación de Félidos Bolivia) की लीड साइंटिस्ट और फाउंडर होने के नाते नोगलेस-अस्कारुन्ज को इसमें दिलचस्पी हुई। उस जानवर का चेहरा छोटा और सिकुड़ा हुआ था, कान छोटे और गोल थे और मूंछें लंबी थीं। वह सच में पालतू बिल्ली के मुकाबले बहुत छोटी थी और सबसे खास बात यह थी।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Sep 18, 2026 पर 11:27 AM
सिकुड़ा चेहरा...गोल कान और लंबी मूंछ, 100 साल में पहली बार मिली बिल्ली की ये प्रजाति
हालांकि उस समय नोगलेस-अस्कारुन्ज को लगा कि यह अनोखी बिल्ली 'लियोपार्डस टिग्रिनस' (Leopardus tigrinus) प्रजाति की सदस्य है।

2016 में बोलिविया में काम करने वाली बायोलॉजिस्ट और नेशनल ज्योग्राफिक एक्सप्लोरर पाओला नोगलेस-अस्कारुन्ज को एक लोकल वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी से फोन आया। उन्हें बताया गया कि वहां एक "अजीब सी बिल्ली" लाई गई है। यह बिल्ली एक लोकल आदमी को मिली थी, जिसे वह जंगल के पास सड़क पर एक छोटे बच्चे (किटन) के तौर पर मिली थी। वह आदमी उसे घर ले आया, यह सोचकर कि वह पालतू नस्ल की बिल्ली है। लेकिन लगभग एक साल तक उस जंगली जानवर के साथ रहने के बाद उसे एहसास हुआ कि उसे सैंक्चुअरी में रखना ही बेहतर होगा।

जब नोगलेस-अस्कारुन्ज की बढ़ी दिलचस्पी

बोलिवियन फेलिड्स रिसर्च प्रोग्राम (Programa de Investigación de Félidos Bolivia) की लीड साइंटिस्ट और फाउंडर होने के नाते नोगलेस-अस्कारुन्ज को इसमें दिलचस्पी हुई। उस जानवर का चेहरा छोटा और सिकुड़ा हुआ था, कान छोटे और गोल थे और मूंछें लंबी थीं। वह सच में पालतू बिल्ली के मुकाबले बहुत छोटी थी और सबसे खास बात यह थी। उसके शरीर पर तेंदुए जैसे धब्बे थे। इसलिए वह बोलिवियन एंडीज़ के सबट्रॉपिकल इलाके में मौजूद सेंडा वर्डे वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में उस जानवर को देखने गईं।

नोगलेस-अस्कारुन्ज याद करती हैं, "मैंने इसकी सौ तस्वीरें लीं। मैं बहुत हैरान और उत्साहित थी।"उस समय उन्हें यह नहीं पता था कि इस अनोखी बिल्ली का एक राज है। 'करंट बायोलॉजी' जर्नल में आज छपी एक स्टडी के मुताबिक यह 100 से ज्यादा सालों में खोजी गई फेलिड (यानी बिल्ली परिवार) की पहली नई प्रजाति बनने वाली थी। दिलचस्प बात यह है कि यह खोज न तो बहुत पहले बताई गई किसी प्रजाति की पुष्टि है और न ही पहले से पहचानी गई किसी सब-स्पीशीज (उप-प्रजाति) को प्रजाति का दर्जा दिया जाना है—ये दोनों ही बातें आम तौर पर सामने आती हैं और महत्वपूर्ण खोजें मानी जाती हैं। नहीं यह बिल्ली विज्ञान के लिए बिल्कुल नई चीज थी।

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