कुवैत में 15 साल बिताने के बाद सीरिया का एक व्यक्ति दमिश्क में अपने घर लौटने की तैयारी कर रहा है। उसने 2011 में एक दीवार के पीछे अपनी एक निजी लाइब्रेरी को छुपा दिया था, क्योंकि उसे डर था कि पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन में अंदर रखी किताबें उसे खतरे में डाल सकती हैं।
ऑनलाइन वायरल हो रहे वीडियो फुटेज में अबू बिलाल नाम का यह व्यक्ति हथौड़े से दीवार तोड़ते हुए और किताबों व पत्रिकाओं से भरी अलमारियां निकालते हुए दिख रहा है, जो लगभग 15 साल से छिपी हुई थीं। खबरों के मुताबिक, इस कलेक्शन में सैकड़ों किताबें, कुरान से जुड़े सर्टिफिकेट और अन्य निजी सामान शामिल हैं। असद सरकार के तहत संघर्ष और कड़े सुरक्षा उपायों के बीच सीरिया छोड़कर कुवैत जाने से पहले उसने 2011 के आखिर में यह दीवार बनाई थी।
खबरों के अनुसार दीवार हटाने के बाद उसे अपना ज्यादातर सामान सही-सलामत मिला। छिपी हुई जगह में बहुत कम धूल गई थी। यह भावुक कर देने वाली खोज ऐसे समय में हुई है, जब दिसंबर 2024 में असद सरकार के गिरने के बाद सीरिया के पब्लिशिंग और साहित्य जगत में बड़े बदलाव आए हैं।
जो किताबें पहले की सरकार के समय प्रतिबंधित थीं, वे अब दमिश्क की किताबों की दुकानों और साहित्यिक कार्यक्रमों में खुलेआम मिल रही हैं। असद के सत्ता से हटने के बाद हुए पहले 'दमिश्क इंटरनेशनल बुक फेयर 2026' में पहले प्रतिबंधित रहा इस्लामी साहित्य, पूर्व सरकार के आलोचकों की रचनाएं और कुर्दिश प्रकाशन शामिल किए गए थे। खबरों के मुताबिक इसमें 35 देशों के 500 से ज्यादा पब्लिशिंग हाउस ने हिस्सा लिया था।
पब्लिशर्स ने सेंसरशिप में बड़ी ढील की बात भी कही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक 2026 के मेले में सैयद कुतुब और इब्न तैमिया जैसे लेखकों की किताबें और कुर्द साहित्य खुलेआम दिखाए गए। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ पाबंदियां अभी भी हैं, जैसे कि ऐसी सामग्री पर रोक जो नागरिक शांति के लिए खतरा मानी जाती है या जो पूर्व असद शासन का महिमामंडन करती है।
इसलिए छिपी हुई लाइब्रेरी का फिर से मिलना सीरिया के सांस्कृतिक माहौल में आए बड़े बदलाव की एक खास व्यक्तिगत मिसाल बन गया है, जो किताबें कभी दीवारों के पीछे रखी गई थीं, उन्हें अब सबके सामने लाया जा सकता है। अबू बिलाल के लिए यह पल उनकी जिंदगी के उस हिस्से में वापसी जैसा था, जिसे उन्होंने 2011 में दमिश्क में पीछे छोड़ दिया था, जिसे एक दशक से भी ज्यादा समय तक एक दीवार के पीछे एक-एक करके किताबों को सहेजकर रखा गया थाwol