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'यूनुस सरकार के आतंक का शासन...', अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर शेख हसीना का बड़ा बयान

Sheikh Hasina: शेख हसीना ने कहा कि उनकी सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों की सुरक्षा कोई विकल्प नहीं थी, बल्कि यह सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी और नैतिक कर्तव्य थी। उन्होंने अपने शासनकाल की तुलना मौजूदा हालात से करते हुए कहा कि पहले अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान किया जाता था, जबकि अब मुहम्मद यूनुस की सरकार में असहमति को दबाया जा रहा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 12, 2026 पर 10:52 PM
'यूनुस सरकार के आतंक का शासन...', अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर शेख हसीना का बड़ा बयान
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर कड़ा हमला बोला है।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार के “आतंक के शासन” की वजह से देश में डर का माहौल बना है, लोग विस्थापित हो रहे हैं और बांग्लादेश का धर्मनिरपेक्ष ढांचा कमजोर पड़ रहा है। हसीना ने हिंदू कपड़ा मजदूर दीपू चंद्र दास की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक “बेहद डरावना और शर्मनाक अपराध” है। उनके मुताबिक, यह घटना दिखाती है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय कितने बड़े खतरे में हैं।

यूनुस सरकार पर साधा निशाना

न्यूज 18 को दिए एक इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा, “जो कुछ हम देख रहे हैं, वह बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक पहचान को सोच-समझकर खत्म करने की कोशिश है। यूनुस सरकार के दौरान जमात-ए-इस्लामी और उससे जुड़े कट्टरपंथी समूहों को राजनीतिक जगह, सुरक्षा और छूट दी जा रही है।” हसीना के इन बयानों के बाद बांग्लादेश की राजनीति और वहां की आंतरिक स्थिति को लेकर बहस और तेज हो गई है।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर जताई चिंता 

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