Ola Electric को उपभोक्ता आयोग का आदेश, खराब स्कूटर बदले या 6% सालाना ब्याज के साथ लौटाए पूरा पैसा, ये है मामला

ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) को तगड़ा शॉक लगा है। एक शख्स ने ओला इलेक्ट्रिक की बाइक में पहली ही राइड को लेकर उपभोक्ता आयोग में शिकायत की। अब आयोग ने कंपनी को नई बाइक देने या जितने में गाड़ी खरीदी गई थी, वह पूरा पैसा सालाना 6% के ब्याज के साथ देने को कहा है। इसके अलावा कुछ और पैसे भी देने को कहा है। जानिए पूरा मामला और ओला ने अपनी तरफ से सफाई में क्या कहा आयोग के सामने

अपडेटेड Mar 29, 2026 पर 1:44 PM
उपभोक्ता आयोग ने Ola Electric को एक मामले में झटका दिया लेकिन खास बात ये है कि फैसला एकतरफा आया क्योंकि कंपनी मामले में न तो अदालत में पेश हुई थी और न ही उसने कोई लिखित बयान दाखिल किया।

ठाणे के कंज्यूमर कमीशन यानी उपभोक्ता आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) को झटका दिया है। कमीशन ने कंपनी को खराब इलेक्ट्रिक स्कूटर बदलने या पूरा पैसा ग्राहक को लौटाने का आदेश दिया है। आयोग का कहना है कि यह कंपनी की तरफ से ‘गंभीर खामी’ का मामला है। ऐसे में आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक को आदेश दिया है कि या तो उसी स्पेसिफिकेशन का नया स्कूटर दिया जाए या ₹96,997 की पूरी राशि 6% सालाना ब्याज के साथ वापस करें। इतने पैसे में ही शिकायत करने वाले शख्स ने ओला का स्कूटर खरीदा था। इसके अलावा आयोग ने ₹20,000 मानसिक पीड़ा के लिए और ₹15,000 मुकदमे के खर्च के लिए देने को कहा है।

क्या है पूरा मामला?

नवी मुंबई के एक वकील ने जुलाई 2024 में ₹96,997 में ओला इलेक्ट्रिक का स्कूटर खरीदा था। डिलीवरी के सिर्फ 2 दिन बाद पहली लंबी राइड में ही स्कूटर में दिक्कतें आने लगीं जैसे कि एक्सेलरेशन में दिक्कत और ट्रैफिक में कई बार बंद होना। 29 अगस्त 2024 को बैटरी 21% से 3% तक सिर्फ 500 मीटर में गिर गई, जिससे स्कूटर अचानक रुक गया। शिकायत करने वाले शख्स का कहना है कि इसके चलते गंभीर दुर्घटना भी हो सकती थी। कंपनी से जब कई बार संपर्क करने की कोशिशों के बावजूद किसी तरह रिस्पांस आया लेकिन मामला नहीं सुलझा तो वकील ने आयोग में याचिका दायर की थी।


बिना एक पक्ष के पेश हुए आया फैसला

ठाणे के डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने पाया कि बार-बार ईमेल और वॉट्सऐप मैसेज भेजने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद जब शिकायककर्ता ने सोशल मीडिया (X) पर शिकायत की तो ही कंपनी की तरफ से रिस्पांस आया। हालांकि यहां भी दिक्कतें खत्म नहीं हुई। सर्विस के लिए कंपनी ने गाड़ी ले तो ली लेकिन बीमा कंपनी ने शिकायतकर्ता को बताया कि स्कूटर की जानकारी तय गैराज में दी ही नहीं गई। जब महीनों बाद ग्राहक को मौजूदा शिकायत दर्ज होने पर गाड़ी वापस मिली तो आयोग के मुताबिक यह गंदी हालत में था और उस पर खरोंच के निशान थे।

आयोग के मुताबिक बैटरी की चार्जिंग के लेवल का लगातार कम होना और पहली बार ड्राइविंग से ही होने वाली अन्य दिक्कतें गाड़ी की खराबी को दिखाती है। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि गाड़ी की स्थिति को अपडेट न करना और उसे अपने कब्जे में न रखना निश्चित रूप से लापरवाही और अनुचित कारोबारी तरीका है। आयोग ने कहा कि अहम बात ये रही कि गाड़ी की डिलीवरी ऐसे समय की गई, जब शिकायत पर सुनवाई चल रही, यह कंपनी की लापरवाही और अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस को छिपाने का प्रयास है।

ऐसे में आयोग ने कंपनी को समान स्पेसिफिकेशन की नई गाड़ी या 6% के सालाना ब्याज के साथ ₹96,997 की पूरी लागत वापस करनी होगी। इसके अलावा आयोग ने ₹20,000 मानसिक पीड़ा के लिए और ₹15,000 मुकदमे के खर्च के लिए देने को कहा है। चूंकि ओला इलेक्ट्रिक इस मामले में न तो अदालत में पेश हुई थी और न ही उसने कोई लिखित बयान दाखिल किया, इसलिए मामले का फैसला एकतरफा किया गया।

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