नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें इनसॉल्वेंसी यानी दिवालिया प्रक्रिया के दौरान कंपनियों के डीमैट अकाउंट को “अनफ्रीज” करने के नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के अधिकार को चुनौती दी थी। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक एनसीएलएटी की दो-सदस्यीय बेंच ने कहा कि IBC (इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) के सेक्शन 60(5) के तहत एनसीएलटी को यह अधिकार है कि वह दिवालिया प्रक्रिया के दौरान डीमैट खातों को अनफ्रीज करने से जुड़े मामलों की सुनवाई करे और फैसला सुनाए। बीएसई का कहना था कि एनसीएलटी के पास आईबीसी कोड के धारा 60 (5) के तहत उन मुद्दों पर फैसला लेने का कोई अधिकार नहीं है, जो सेबी सर्कुलर्स के अंतर्गत आते हैं।
यह पूरा विवाद दो कंपनियों- फ्यूचर कॉरपोरेट रिसोर्सेज (Future Corporate Resources) और लिज ट्रेडर्स एंड एजेंट्स (Liz Traders and Agents) से जुड़ा है। बीएसई ने सालाना लिस्टिंग फीस के पेमेंट नहीं होने, LODR (लिस्टिंग ऑब्लिजेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस के उल्लंघन, और इन उल्लंघनों को लेकर लगाए गए जुर्माने के बकाए के चलते इन कंपनियों के डिमैट अकाउंट फ्रीज कर दिए थे।
बीएसई ने जब दोनों कंपनियों के डीमैट खाते से फ्रीज हटाने से इनकार किया तो दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही इन कंपनियों के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल्स/लिक्विडेटर्स इसे लेकर एनसीएलटी पास पहुंचे क्योंकि इनका इरादा इन खातों में रखे शेयरों की बिक्री कर पैसे रिकवर करना था। एनसीएलटी की मुंबई बेंच ने इसे लेकर दोनों कंपनियों के लिए 31 अक्टूबर 2025 और 31 जुलाई 2024 को अलग-अलग आदेश में बीएसई से फ्रीज हटाने को कहा था। बीएसई इस मामले को लेकर एनसीएलएटी चला गया और दो याचिकाएं दाखिल की लेकिन अब एनसीएलएटी ने इसे खारिज कर दिया।
NCLAT ने क्यों खारिज की BSE की याचिका?
दोनों याचिकाओं पर एनसीएलएटी ने एक समान आदेश पारित करते हुए कहा कि इन डीमैट खातों को डीफ्रीज करने के लिए रिजॉल्यूशनल प्रोफेशनल और लिक्विडेटर ने कंपनियों के हित में आवेदन किया था, जिसकी आईबीसी की धारा 14 के तहत मनाही नहीं है। इस मामले में एनसीएलएटी ने सिर्फ इस बात पर ही सुनवाई की कि क्या एनसीएलटी को इस मामले में फैसला देने का अधिकार था या नहीं। अपीलेट ट्रिब्यूनल ने आगे कहा कि डीमैट खातों में रखे शेयरों के संबंध में कंपनियों के स्वामित्व पर कोई विवाद नहीं है।
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