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Potato Farming Tips: बढ़ती ठंड ने बढ़ाया आलू के रोगों का खतरा, जानें किसानों के लिए आसान टिप्स

Potato Farming Tips: आलू की बुवाई क्षेत्र और तापमान पर निर्भर करती है। उत्तर भारत में 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच, 18–25°C तापमान में बुवाई होती है। यूपी के कई जिलों में बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है। बढ़ती ठंड और कोहरे से झुलसा, ब्लाइट जैसे रोगों का खतरा बढ़ गया है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 18, 2025 पर 12:36 PM
Potato Farming Tips: बढ़ती ठंड ने बढ़ाया आलू के रोगों का खतरा, जानें किसानों के लिए आसान टिप्स
Potato Farming Tips: अधिक नमी, लगातार कोहरा, ठंडी रातें और 18–22 डिग्री तापमान में ये तेजी से फैलता है

आलू की बुवाई का सही समय क्षेत्र और तापमान पर निर्भर करता है। उत्तर भारत में आमतौर पर आलू की बुवाई 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच की जाती है, जब दिन का तापमान 18 से 25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। इस अवधि में तापमान और मिट्टी की नमी फसल की अच्छी वृद्धि और कंद के विकास के लिए अनुकूल मानी जाती है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है, इसलिए अब किसान अपनी फसल की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गए हैं। जैसे-जैसे ठंड बढ़ती है और कोहरा पड़ता है, आलू की फसल में रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषकर झुलसा रोग, लेट ब्लाइट, अर्ली ब्लाइट और मोज़ेक जैसी बीमारियों का प्रकोप अधिक नमी और ठंडी रातों में तेजी से फैलता है। इसलिए इस समय किसानों को अपने आलू के खेतों में विशेष ध्यान देने और रोग नियंत्रण के उपाय अपनाने की जरूरत है, ताकि फसल का उत्पादन सुरक्षित और लाभकारी बना रहे।

आलू की फसल में आम रोग

आलू की फसल में लेट ब्लाइट, अर्ली ब्लाइट, मोज़ेक रोग, काला पपड़ी (ब्लैक स्कर्फ) और सॉफ्ट रॉट प्रमुख हैं। ये रोग पत्तियों के झुलसने, पौधों की वृद्धि रुकने और कंद सड़ने का कारण बनते हैं। दिसंबर माह में कोहरा और नमी के कारण झुलसा रोग तेजी से फैलता है, जिससे किसान चिंतित रहते हैं।

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