दिसंबर और जनवरी का मौसम किसानों के लिए कई मायनों में फायदेमंद होता है। न सिर्फ ठंड के कारण खेतों की मिट्टी में नमी रहती है, बल्कि ये समय पत्तेदार सब्जियों की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 में शहरी और ग्रामीण बाजारों में हरी सब्जियों की मांग और उनकी कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। पत्तेदार सब्जियां कम समय में तैयार हो जाती हैं और रोजाना बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध रहती हैं, जिससे किसानों की आय में सुधार होता है।
पालक, मेथी, धनिया और शलजम जैसी फसलें कम लागत में तैयार हो जाती हैं और जल्दी बिकती हैं, इसलिए छोटे और सीमांत किसान भी इनसे अच्छी आमदनी कमा सकते हैं। बेहतर पैदावार, जल्दी कटाई और लगातार बिक्री की सुविधा इस समय की पत्तेदार फसलों को किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बनाती है।
पत्तेदार सब्जियों की खेती क्यों फायदेमंद है
किसान अंशुमान सिंह के अनुसार, पालक, मेथी, धनिया और शलजम जैसी पत्तेदार सब्जियां कम निवेश में जल्दी तैयार हो जाती हैं और बाजार में तेजी से बिकती हैं। डेढ़ से दो महीने में उत्पादन शुरू होने से छोटे और सीमांत किसान भी अच्छी आमदनी कमा सकते हैं।
इन सब्जियों के लिए बलुई दोमट या रेतीली मिट्टी सबसे उपयुक्त है, जिसमें पानी रुके नहीं। मिट्टी में 50–60% साधारण मिट्टी और 30–40% गोबर या वर्मीकम्पोस्ट मिलाना चाहिए। हल्की मात्रा में रेत डालने से जल निकासी बेहतर होती है। बुवाई से पहले खेत की अच्छी जुताई और खरपतवार हटाना जरूरी है। बीजों को रातभर पानी में भिगोकर ट्राइकोडर्मा से उपचार करने पर अंकुरण जल्दी और स्वस्थ होता है।
पत्तेदार फसल को सुबह 4–5 घंटे की धूप चाहिए, दोपहर में हल्की छाया फायदेमंद रहती है। दिसंबर-जनवरी में पाले का खतरा रहता है, इसलिए पौधों को ढककर या हल्की सिंचाई कर बचाना चाहिए। मेथी 25–30 दिन, पालक 35–40 दिन, धनिया 30–40 दिन और शलजम 30–40 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं।
कीट नियंत्रण और ऑर्गेनिक उपाय
पत्तेदार सब्जियों में कीट जल्दी असर डालते हैं। पत्ती खाने वाले कीटों के लिए नीम तेल और हल्दी का स्प्रे प्रभावी है, जबकि रस चूसने वाले कीटों पर नीम तेल और नींबू पत्तों का काढ़ा कारगर है। 100–150 रुपये के कीट ट्रैप भी हल्के निवेश में लगाए जा सकते हैं। अधिक संक्रमित पौधों को तुरंत हटाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान सही तकनीक, समय पर बुवाई और ऑर्गेनिक तरीके अपनाएं, तो दिसंबर-जनवरी की हरियाली 2026 की गर्मी से पहले ही किसानों की आय को नई ऊंचाई दे सकती है।