Barbari Goat: ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन स्वरोजगार का एक बेहतरीन जरिया बनता जा रहा है। अगर आप भी कम निवेश में बड़ा मुनाफा कमाने की सोच रहे हैं, तो बकरी पालन आपके लिए एक बेहतरीन तरीका साबित हो सकता है। पशु विशेषज्ञों के मुताबिक बकरियों की एक खास नस्ल ऐसी है जिसे मुनाफे की मशीन कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। हम बात कर रहे हैं बरबरी (Barbari) नस्ल की। इसकी खासियतें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
हमारे सहयोगी लोकल 18 की एक खास रिपोर्ट में सीतामढ़ी के रहने वाले और जोगबनी स्थित पशु चिकित्सालय के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. उमेश पांडे ने इस नस्ल की खूबियों से रुबरू कराया है। आइए आपको विस्तार से इसकी जानकारी देते हैं।
बकरी पालन को अक्सर एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह से नस्ल के चुनाव पर निर्भर करती है। वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. उमेश पांडे के मुताबिक बरबरी नस्ल अपनी शारीरिक क्षमताओं और व्यावसायिक लाभ के कारण वर्तमान में पशुपालकों की पहली पसंद बनी हुई है। यहां जानिए बरबरी नस्ल की वो 4 बड़ी खासियतें जो इसे आम बकरियों से अलग और बेहतर बनाती हैं-
वजन बढ़ने की रफ्तार है सुपरफास्ट
आम नस्ल की बकरियों और बरबरी में सबसे बड़ा अंतर उनकी विकास दर में होता है। एक्सपर्ट डॉक्टर के मुताबिक आम नस्ल की स्थानीय बकरियों का वजन हर महीने सिर्फ 1 से 1.5 किलो ही बढ़ता है। वहीं बरबरी नस्ल हर महीने 2 से 2.5 किलो तक वजन प्राप्त करती है। इसका मतलब है कि बरबरी बकरी बहुत कम समय में तैयार हो जाती है। इससे चारे का खर्च कम होता है और पशुपालक को जल्दी मुनाफा मिलता है।
पशुपालन में सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान तब होता है जब पशु समय पर प्रजनन नहीं करता। बरबरी नस्ल के साथ यह समस्या नहीं है। डॉ. उमेश पांडे बताते हैं कि बरबरी का प्रजनन चक्र बेहद सटीक होता है। ये बकरियां समय पर बच्चे देती हैं। इससे बहुत कम समय में आपके पास बकरियों का एक बड़ा झुंड तैयार हो जाता है। मांस और डेयरी व्यवसाय के लिए यह नियमितता बहुत फायदेमंद है।
दूध उत्पादन: बच्चों के बाद भी होगी कमाई
अक्सर देखा जाता है कि आम नस्ल की बकरियां केवल उतना ही दूध दे पाती हैं जिससे उनके बच्चों का पेट भर सके। लेकिन बरबरी नस्ल इस मामले में काफी आगे है। इसकी दूध देने की क्षमता अधिक होती है। बच्चों को पर्याप्त दूध पिलाने के बाद भी काफी दूध बच जाता है, जिसे बाजार में बेचकर पशुपालक अपनी इनकम बढ़ा सकते हैं।
बरबरी नस्ल की बकरियों की शारीरिक बनावट और उनकी रोगों से लड़ने की क्षमता उन्हें व्यावसायिक दृष्टि से और फायदेमंद बनाती है। जल्दी वजन बढ़ने और समय पर बच्चे देने के कारण यह पशुपालकों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प है। डॉ. उमेश पांडे का कहना है कि अगर आप बकरी पालन को केवल शौक नहीं बल्कि एक गंभीर बिजनेस के रूप में लेना चाहते हैं, तो बरबरी नस्ल का चुनाव ही आपकी सफलता की कुंजी है।'