Kharif fertilizer stock: पश्चिम एशिया में ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के भारी तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से आयातित वस्तुओं पर निर्भरता कम करने का आग्रह किया है। विशेष रूप से किसानों से अपील की गई है कि वे रासायनिक खाद का उपयोग 50% तक कम करें और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें।
पीएम की इस अपील का असर बाजार पर भी दिखा है और फर्टिलाइजर कंपनियों के शेयर 3% तक लुढ़क गए हैं। ऐसे में खाद को लेकर भी अटकलों के बाजार गर्म हैं। इसी बीच खरीफ बुवाई के सीजन से पहले देश के किसानों के लिए खाद की उपलब्धता को लेकर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। अब सरकार ने खाद के स्टॉक का आधिकारिक डेटा जारी किया है।
सरकार का कहना है कि आगामी खरीफ सीजन के लिए खाद का पर्याप्त भंडार मौजूद है, इसलिए किसानों को घबराने या पैनिक बाइंग (जरूरत से ज्यादा खरीदारी) करने की जरूरत नहीं है। उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में देश के खाद भंडार का पूरा ब्योरा पेश किया है।
जरूरत से ज्यादा स्टॉक मौजूद: 51% कोटा तैयार
सरकार के मुताबिक खरीफ फसल चक्र 2026 के लिए खाद की सुरक्षा पूरी तरह मजबूत है। कृषि विभाग ने खरीफ 2026 के लिए 390.54 लाख टन खाद की आवश्यकता का अनुमान लगाया है। सामान्य तौर पर इस समय तक मांग का 33% स्टॉक रहता है, लेकिन फिलहाल 51% से अधिक स्टॉक पहले से ही उपलब्ध है। हालिया वैश्विक संकट के बाद देश की उपलब्धता में 97 लाख मीट्रिक टन खाद और जोड़ा गया है।
विदेशी बाजार से सुरक्षित किया गया भंडार
घरेलू उत्पादन के साथ-साथ सरकार ने बड़े पैमाने पर आयात के सौदे भी पक्के कर लिए हैं, ताकि 15-20 दिनों में शुरू होने वाले पीक सीजन में कोई दिक्कत न आए।
क्या हैं खाद की ताजा कीमतें?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रमुख उर्वरकों की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) में कोई बदलाव नहीं किया गया है:
अन्य कॉम्प्लेक्स: इनकी कीमतें बाजार के अनुसार तय होती हैं, लेकिन सरकार कीमतों को स्थिर रखने के लिए सब्सिडी का प्रबंधन कर रही है।
कालाबाजारी और जमाखोरी पर कड़ा पहरा
अतिरिक्त सचिव ने बताया कि राज्यों को जमाखोरी और खाद के व्यावसायिक उपयोग को रोकने के निर्देश दिए गए हैं। सचिवों का एक अधिकार प्राप्त समूह हर हफ्ते स्थिति की समीक्षा कर रहा है। शुरुआती दौर में कुछ इलाकों में पैनिक बाइंग देखी गई थी, जिसे रोकने के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि उत्पादन सामान्य शेड्यूल पर है और यूरिया प्लांट पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं।
सब्सिडी का बोझ और पीएम मोदी की रणनीति
बजट 2026-27 में केंद्र ने 170805 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी का अनुमान लगाया है। हालांकि, वैश्विक बाजार में यूरिया जैसी खादों की कीमतें दोगुनी होने के कारण यह बिल बढ़ सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की अपील का मुख्य उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना है। अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते आयात बिल काफी बढ़ गया है, ऐसे में खाद का संतुलित और कम उपयोग देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।