पीएम मोदी की अपील पर अमल हुआ, तो $45 अरब बचा सकता है भारत; समझिए कैसे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर अगर लोग पेट्रोल-डीजल, सोना और विदेश यात्रा पर खर्च कम करें, तो भारत हर साल 45 अरब डॉलर से ज्यादा विदेशी मुद्रा बचा सकता है। जानिए किस खर्च में कटौती से कितनी बचत हो सकती है और कैसे।
अगर भारत कच्चे तेल के आयात में सिर्फ 10 प्रतिशत की कमी कर दे, तो करीब 13.5 बिलियन डॉलर बचाए जा सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेशी मुद्रा बचाने की हालिया अपील का असर सिर्फ आम लोगों की आदतों तक सीमित नहीं है। अगर लोग आयात होने वाली चीजों का इस्तेमाल थोड़ा कम करें और कुछ समय के लिए विदेश यात्रा टाल दें, तो भारत हर साल 45 अरब डॉलर से ज्यादा विदेशी मुद्रा बचा सकता है।
मनीकंट्रोल के एनालिसिस के मुताबिक, यह बचत बहुत बड़े बदलावों से नहीं, बल्कि कुछ सीमित और व्यवहारिक कदमों से ही मुमकिन है। इसमें कच्चे तेल, सोना और खाने के तेल की खपत में 10 प्रतिशत कमी, उर्वरक आयात में 50 प्रतिशत कटौती और विदेश यात्रा पर होने वाले गैर जरूरी खर्च को पूरी तरह रोकना शामिल है।
पेट्रोल-डीजल पर क्या बोले मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने 11 मई को हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था, 'आज जरूरत इस बात की भी है कि पेट्रोल, गैस, डीजल जैसी चीजों का बहुत संयम से इस्तेमाल किया जाए। इससे न सिर्फ विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि युद्ध के नकारात्मक असर भी कम होंगे।'
सरकार की चिंता यह है कि भारत अपनी जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और दूसरी चीजें विदेशों से खरीदता है। ऐसे में वैश्विक संकट या युद्ध के दौरान आयात बिल तेजी से बढ़ जाता है और इसका असर रुपये पर भी पड़ता है।
तेल से $13 बिलियन की बचत
FY26 के ट्रेड डेटा के मुताबिक अगर भारत कच्चे तेल के आयात में सिर्फ 10 प्रतिशत की कमी कर दे, तो करीब 13.5 बिलियन डॉलर बचाए जा सकते हैं।
वहीं 2025-26 में भारत का गोल्ड इम्पोर्ट रिकॉर्ड 72 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था। अगर सोने की खरीद में 10 प्रतिशत कमी आती है, तो करीब 7.2 बिलियन डॉलर की बचत हो सकती है। इसी तरह खाने के तेल के आयात में 10 प्रतिशत कटौती करने पर लगभग 1.95 बिलियन डॉलर बच सकते हैं।
फर्टिलाइजर से भी बड़ा फायदा
प्रधानमंत्री मोदी किसानों से रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल में 50 प्रतिशत कमी की अपील भी कर चुके हैं। अगर भारत उर्वरक आयात आधा कर दे, तो FY26 के 14.5 बिलियन डॉलर के आयात के आधार पर करीब 7.3 बिलियन डॉलर की बचत हो सकती है।
इन चार कदमों से अकेले भारत का कुल आयात बिल करीब 30 बिलियन डॉलर तक कम हो सकता है।
विदेश यात्रा रोकने से भी बड़ी बचत
एनालिसिस के मुताबिक, विदेश यात्रा पर होने वाले खर्च में कटौती से भी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बच सकती है। LRS यानी Liberalised Remittance Scheme के तहत FY26 में विदेश भेजी गई रकम का अनुमान 28.8 बिलियन डॉलर है। अगर इसमें से 55 प्रतिशत हिस्सा विदेश यात्रा, छुट्टियों और संबंधित खर्च पर गया माना जाए, तो सिर्फ एक साल के लिए ऐसे खर्च रोकने से करीब 15.8 बिलियन डॉलर देश में ही बच सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, 'विदेश में शादी करने, घूमने और छुट्टियां मनाने का चलन मध्यम वर्ग में तेजी से बढ़ रहा है। हमें तय करना होगा कि इस संकट के समय कम से कम एक साल तक विदेश यात्रा टाल दें।'
कुल बचत $45 बिलियन से ज्यादा
कमोडिटी आयात में कमी और विदेश यात्रा पर नियंत्रण मिलाकर भारत 45 बिलियन डॉलर से ज्यादा विदेशी मुद्रा बचा सकता है। यह FY26 के कुल मर्चेंडाइज इम्पोर्ट बिल का करीब 5.8 प्रतिशत होगा।
कच्चा तेल, सोना, खाने का तेल और उर्वरक मिलाकर FY26 में भारत के कुल आयात का 31.1 प्रतिशत हिस्सा थे। इन चार कैटेगरी का कुल आयात 240.7 बिलियन डॉलर रहा। अगर सोने की खरीद पूरी तरह बंद हो जाए, तो यह बचत लगभग दोगुनी होकर 130 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।
विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव क्यों
1 मई को खत्म हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 690.7 बिलियन डॉलर था, जो पिछले सप्ताह के मुकाबले 7.8 बिलियन डॉलर कम रहा। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 95.17 तक पहुंच गया। 10 मई को अमेरिका ने युद्ध खत्म करने को लेकर ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था और यह संघर्ष करीब 10 हफ्तों से जारी है।
इस बीच कच्चे तेल की कीमतें लगातार तीसरे महीने 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। मई में भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल रही। फरवरी में यह 69.01 डॉलर प्रति बैरल थी।