एक बार गेंदे का पौधा तैयार तो 3-4 महीने तक होती है फूलों की तुड़ाई... जानिए किसान रवि कैसे 7-8 हजार लगा कमा रहे सवा लाख!

मध्य प्रदेश के सीधी जिले के किसान रवि सिंह ने पारंपरिक खेती छोड़ गेंदे के फूलों की खेती अपनाई है, जिसमें मात्र ₹7-8 हजार की लागत लगाकर वे एक बीघे से ₹1 लाख से अधिक का मुनाफा कमा रहे हैं।

अपडेटेड May 12, 2026 पर 1:36 PM

पारंपरिक खेती में अच्छी कमाई नहीं होने से परेशान किसानों के लिए मध्य प्रदेश के एक युवा किसान ने नई राह दिखाई है। सीधी जिले के किसान रवि सिंह ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही फसल का चुनाव किया जाए तो सिर्फ एक बीघे जमीन से भी लाखों रुपये की कमाई की जा सकती है। हमारे सहयोगी लोकल 18 की रिपोर्ट के मुताबिक रवि सिंह गेंदे के फूलों की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने इस बारे में विस्तार से बात भी की है।

रवि मध्य प्रदेश के सीधी जिले के सेमरिया क्षेत्र के हस्तिनापुर गांव के रहने वाले हैं. युवा किसान रवि सिंह ने सब्जियों की खेती के साथ-साथ गेंदे के फूलों की पैदावार भी शुरू की है। उनकी यह पहल आज एक सफल बिजनेस मॉडल में बदल चुकी है।

लागत कम, मुनाफा सात गुना से ज्यादा


रवि सिंह ने लोकल 18 को बताया कि गेंदे की खेती का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी कम लागत और बंपर रिटर्न है। एक बीघा खेत में गेंदे की फसल लगाने पर बीज, खाद और रोपाई मिलाकर सिर्फ 7 से 8 हजार रुपये का खर्च आता है। इस मामूली निवेश के बदले रवि 1 लाख से सवा लाख रुपये तक की इनकम कर ले रहे हैं।

रवि पिछले तीन सालों से पूरी तरह फूलों की खेती पर फोकस हैं और उनकी सफलता देखकर अब क्षेत्र के दूसरे किसान भी इस प्रयोग को अपना रहे हैं।

व्यापारी खुद पहुंचते हैं गांव, नकद होती है कमाई

गेंदे के फूलों की मांग बाजार में कभी कम नहीं होती। रवि के मुताबिक शादी-ब्याह, त्योहार, पूजा-पाठ और चुनावी सीजन में फूलों की डिमांड आसमान छूने लगती है। किसानों को फूल बेचने के लिए मंडियों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। सीधी, रीवा, सतना और शहडोल जैसे शहरों के बड़े व्यापारी खुद उनके खेत और गांव तक पहुंचकर फूल खरीदते हैं। इससे किसानों को रोजाना नकद आमदनी होती है।

3-4 महीने तक होती है फूलों की तुड़ाई

रवि सिंह ने गेंदे की खेती की तकनीक साझा करते हुए बताया कि यह काफी सरल है। सबसे पहले गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाया जाता है और गोबर की खाद डाली जाती है। मेड़ तैयार कर पौधों की रोपाई की जाती है और तुरंत सिंचाई जरूरी होती है। रोपाई के मात्र दो महीने बाद ही पौधों में फूल आने शुरू हो जाते हैं। एक बार पौधा पूरी तरह तैयार हो जाए, तो किसान लगातार 3 से 4 महीने तक फूलों की तुड़ाई कर सकते हैं।

कम पानी और कम जोखिम का सौदा

गेंदे की फसल की एक और खासियत यह है कि इसमें पानी की खपत बहुत कम होती है और कीटों का डर भी अन्य फसलों की तुलना में कम रहता है। रवि का मानना है कि जो किसान पारंपरिक फसलों से कम आय के कारण कर्ज या परेशानी में हैं, उन्हें फूलों की खेती एक बार जरूर आज़मानी चाहिए। कम रिस्क और सुनिश्चित बाजार इसे किसानों के लिए नकद फसल (Cash Crop) का सबसे बेहतर विकल्प बनाता है।

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