बिहार के अररिया जिले में खेती का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब किसान सिर्फ पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रहकर नई सोच के साथ नकदी और सब्जियों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। इस बदलाव की एक शानदार मिसाल युवा किसान सुनील कुमार हैं, जिन्होंने पुराने ढर्रे से हटकर अपनी खेती में विविधता लाई है। धान, गेहूं और मक्का जैसी पारंपरिक फसलों के साथ उन्होंने सब्जियों की खेती को अपनाया, जिससे उनकी आय में पहले के मुकाबले काफी बढ़ोतरी हुई है।
कम जमीन में ज्यादा मुनाफा कमाने की उनकी यह रणनीति अब दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। बदलते समय के साथ खेती के इस नए मॉडल ने यह साबित कर दिया है कि सही योजना और मेहनत से किसान अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
15 कट्ठा में बैंगन से कमाल
सुनील कुमार फिलहाल अपनी 15 कट्ठा जमीन पर बैंगन की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि बैंगन की फसल किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है और इसे अलग-अलग तरीके से उगाया जा सकता है।
जल्दी फल, लंबे समय तक कमाई
बैंगन की कुछ किस्में 60-70 दिन में ही फल देने लगती हैं। वहीं कुछ किस्में 4-6 महीने तक लगातार उत्पादन देती हैं। सुनील हर दो दिन पर 200-300 किलो बैंगन तोड़कर बाजार में बेच रहे हैं।
कीमत कम फिर भी मुनाफा जारी
सीजन की शुरुआत में बैंगन का भाव 40-50 रुपये किलो तक मिला। अभी कीमत करीब 30 रुपये किलो है, फिर भी उन्हें अच्छा फायदा हो रहा है।
सिर्फ 15 कट्ठा जमीन से ही सुनील बैंगन की खेती से 2-3 लाख रुपये कमा लेते हैं।
दूसरी सब्जियों से और बढ़ी आमदनी
सुनील सिर्फ बैंगन तक सीमित नहीं हैं। वे मौसम के हिसाब से लौकी, कद्दू, खीरा, झींगा, टमाटर और फूलगोभी भी उगाते हैं। इन सभी फसलों से मिलाकर वे एक सीजन में करीब 5 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं।
बने दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा
अररिया के नगराही गांव के सुनील आज इलाके के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनका मानना है कि अगर किसान सही तकनीक और फसल का चुनाव करें, तो खेती से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।