सावधान! आलू की खेती पर हो गया झुलसा रोग का अटैक, तेजी से फैल रही इस बीमारी से बचने के लिए CPRI ने दी ये सलाह

संस्थान के इंडो-ब्लाइटकास्ट पूर्वानुमान मॉडल के मुताबिक वर्तमान मौसम की परिस्थितियां इस बीमारी के फैलने के लिए पूरी तरह अनुकूल हैं और आने वाले दिनों में इसका प्रकोप और अधिक बढ़ने की आशंका है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सीपीआरआई के प्लांट प्रोटेक्शन डिवीजन के हेड संजीव शर्मा ने किसानों से तुरंत सुरक्षात्मक और बचाव के उपाय अपनाने को कहा है

अपडेटेड Jul 14, 2026 पर 11:42 AM
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आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए एक बेहद जरूरी और सतर्क करने वाली खबर है।

Potato Late Blight Disease: हिमाचल प्रदेश में आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए एक बेहद जरूरी और सतर्क करने वाली खबर है। शिमला स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) ने राज्य के आलू उत्पादकों को झुलसा रोग (Late Blight Disease) के संभावित खतरे को लेकर पूरी तरह सतर्क रहने की सलाह दी है। संस्थान के इंडो-ब्लाइटकास्ट पूर्वानुमान मॉडल के मुताबिक वर्तमान मौसम की परिस्थितियां इस बीमारी के फैलने के लिए पूरी तरह अनुकूल हैं और आने वाले दिनों में इसका प्रकोप और अधिक बढ़ने की आशंका है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सीपीआरआई के प्लांट प्रोटेक्शन डिवीजन के हेड संजीव शर्मा ने किसानों से तुरंत सुरक्षात्मक और बचाव के उपाय अपनाने को कहा है।

लक्षण दिखने से पहले करें यह उपाय (बचाव के तरीके)

संजीव शर्मा ने सलाह दी है कि जिन खेतों में अभी तक झुलसा रोग के लक्षण दिखाई नहीं दिए हैं और जहां अब तक फंगसनाशक का छिड़काव नहीं किया गया है, वहां इस बीमारी के प्रति संवेदनशील फसल की किस्मों पर तुरंत फंगीसाइड का छिड़काव करें। इसके लिए उन्होंने नीचे दी गई दवाओं का रिकमंडेशन किया है।


Mancozeb (मैनकोजेब) या Chlorothalonil (क्लोरोथैलोनिल): इन फंगसनाशकों का छिड़काव किया जाना चाहिए। प्रति हेक्टेयर 0.2-0.25 प्रतिशत की दर से छिड़काव करें। इसका मतलब है कि 2.0-2.5 किलोग्राम रसायन को 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से इस्तेमाल करना होगा।

झुलसा रोग के लक्षण दिखने पर क्या करें? (दवाओं की लिस्ट)

अगर खेत में झुलसा रोग के लक्षण पहले से ही दिखाई देने लगे हैं तो विशेषज्ञों ने किसानों को प्रति लीटर पानी में मिलाकर नीचे दिए गए हिसाब से फंगसनाशकों का छिड़काव करने की सलाह दी है-

  • Dimethomorph: 1.0 ग्राम प्रति लीटर पानी।
  • Ametoctradin + Dimethomorph: 2.0 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी।
  • Dimethomorph + Mancozeb: 1.0 ग्राम डाइमेथोमॉर्फ और 2.0 ग्राम मैनकोजेब, यानी कुल 3 ग्राम प्रति लीटर पानी।
  • Fluopicolide + Propamocarb: 3.0 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी।
  • Azoxystrobin + Tebuconazole: 1.0 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी।

विशेषज्ञों की अहम सलाह: सामान्य तौर पर इस फंगसनाशक के छिड़काव को 10 दिनों के अंतराल पर दोहराया जा सकता है। हालांकि बीमारी की गंभीरता और प्रकोप को देखते हुए इस समयांतराल को एडजस्ट या बदला भी जा सकता है।

खेत प्रबंधन और जल निकासी पर दें ध्यान

दवाओं के छिड़काव के साथ-साथ विशेषज्ञों ने किसानों को कुछ बेहद जरूरी कृषि प्रबंधन के उपाय भी बताए हैं ताकि इस बीमारी को फैलने से रोका जा सके। किसानों को अपने खेतों में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए खेतों में खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हिमाचल प्रदेश के शिमला, सिरमौर, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में करीब 14000 से 15000 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती की जाती है। ऐसे में किसानों के लिए यह अलर्ट बेहद जरूरी है।इसे

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