ग्रामीण भारत के युवाओं को रोजगार से जोड़ने और किसानों को आधुनिक खेती से अवगत कराने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई और महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की है। सरकार ने प्रगति योजना (PRAGATI Scheme) को लॉन्च किया है। इस स्कीम में देश के आठ राज्यों के करीब 20000 ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी के रूप में मुफ्त ट्रेनिंग दी जाएगी। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गांव के स्तर पर ही प्रशिक्षित पेशेवरों का एक नेटवर्क तैयार करना है। ऐसा इसलिए ताकि किसानों को तकनीकी सहायता दी जा सके, सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच में सुधार लाया जा सके और किसानों और बाजारों के बीच के संबंध को मजबूत किया जा सके। इस पहल से कृषि क्षेत्र को ज्यादा फायदेमंद और टेक्नोलॉडी ड्रिवेन बनाने में मदद मिलेगी।
क्या है प्रगति (PRAGATI) स्कीम?
प्रगति योजना को कृषि क्षेत्र में ग्रामीण युवाओं के बीच स्व-रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेश किया गया है। इस योजना के तहत युवाओं को काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। प्रशिक्षित प्रतिभागी अपने ही गांवों में कृषि-उद्यमी के रूप में काम करेंगे। ये युवा किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों, वित्तीय सहायता और विभिन्न कृषि सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद करेंगे। यह कार्यक्रम किसानों और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के बीच की दूरी को पाटने के साथ-साथ टिकाऊ और कुशल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देगा।
पहले चरण में 20000 ग्रामीण युवाओं को मिलेगी ट्रेनिंग
प्रगति योजना के पहले चरण में देश के आठ राज्यों के गांवों से करीब 20000 युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इन आठ राज्यों में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं। सरकार की योजना आने वाले चरणों में इस कार्यक्रम का विस्तार अन्य राज्यों में भी करने की है। अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ये कृषि-उद्यमी किसानों के साथ मिलकर काम करेंगे, उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन देंगे और आवश्यक कृषि संसाधनों तक उनकी पहुंच को आसान बनाएंगे।
गांवों में क्या भूमिका निभाएंगे ये कृषि-उद्यमी?
ट्रेनिंग प्राप्त युवा गांवों में रहकर किसानों को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं और सहायता प्रदान करेंगे-
इस पूरी कवायद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को इन सभी सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े बल्कि ये सारी सुविधाएं उन्हें उनके अपने गांव के भीतर ही मिल जाएं।
इस स्कीम से किसानों को कैसे होगा फायदा?
सरकार का मानना है कि इस योजना के लागू होने से जमीनी स्तर पर कृषि सहायता सेवाएं आसानी से मिल जाएंगी। किसानों को समय पर तकनीकी सलाह, मृदा परीक्षण में सहायता और आधुनिक खेती के तरीकों की सटीक जानकारी मिलेगी। मशीनरी, वित्तीय सहायता और बाजारों तक बेहतर पहुंच होने से खेती की उत्पादन लागत में कमी आएगी। बेहतर तौर-तरीकों से फसलों की पैदावार बढ़ेगी और किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर दाम सुरक्षित करने में मदद मिलेगी।
ग्रामीण भारत में रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
खेती के तरीकों में सुधार करने के साथ-साथ प्रगति योजना को विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा करने के लिए तैयार किया गया है। युवाओं को कृषि सेवा प्रदाताओं के रूप में प्रशिक्षित करके यह कार्यक्रम ग्रामीण स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। यह पहल पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर भारतीय कृषि को अधिक इनोवेटिव, टिकाऊ और बाजार-उन्मुख बनाने के हिसाब से डिजाइन है।
सरकार का विजन: केंद्रीय कृषि मंत्री ने क्या कहा?
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक प्रगति योजना महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है। उन्होंने इसे कृषि का कायाकल्प करने के एक बड़े मिशन के रूप में बताया है। कृषि मंत्री के मुताबिक यह योजना ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर सेवाओं और मजबूत बाजार संपर्कों का लाभ उठाने में मदद करेगी। अगर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो यह योजना ग्रामीण भारत के हजारों युवाओं के लिए करियर के नए रास्ते खोलने के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर कृषि सहायता प्रणालियों को बेहद मजबूत कर सकती है।