समस्तीपुर, बिहार के कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित यह खास किस्म का पपीता इन दिनों किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका आकार और वजन सामान्य पपीते की तुलना में काफी बड़ा होता है, जिससे बाजार में इसकी अलग पहचान बनती है। बड़े साइज और बेहतर गुणवत्ता के कारण इसकी मांग भी ज्यादा रहती है और कीमत भी आम पपीते से अधिक मिलती है। यही वजह है कि किसान इसे अपनी आय बढ़ाने के बेहतर विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
ये नई किस्म न सिर्फ उत्पादन के लिहाज से फायदेमंद है, बल्कि कम समय में ज्यादा मुनाफा देने की क्षमता भी रखती है। अगर सही तरीके से इसकी खेती की जाए, तो यह किसानों के लिए कम लागत में बेहतर कमाई का जरिया बन सकती है
यह पपीता सामान्य पपीते के मुकाबले लगभग दोगुना भारी होता है। एक फल का वजन करीब 2.5 से 3 किलो तक होता है। जहां आम पपीता 30–50 रुपये में बिकता है, वहीं इसका एक फल करीब 100 रुपये तक बिक सकता है।
इस पपीते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक पेड़ पर 80 से 100 तक फल लग सकते हैं। यही वजह है कि कम पौधों में भी किसान ज्यादा उत्पादन हासिल कर सकते हैं और उनकी आय में बढ़ोतरी होती है।
इसकी खेती फरवरी-मार्च और सितंबर-अक्टूबर में की जा सकती है। एक हेक्टेयर में 1000 से 1200 पौधे लगाए जा सकते हैं। इसकी उम्र करीब 2 से 2.5 साल तक होती है, जिससे लंबे समय तक उत्पादन मिलता है।
इस पपीते की मांग पूरे साल बनी रहती है, जिससे किसानों को बाजार पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना पड़ता। इसकी ऊंची कीमत और लगातार डिमांड किसानों की आमदनी को बढ़ाने में मदद करती है।
यह पपीता पोषण के मामले में भी खास है। इसमें कैल्शियम, फाइबर, मैग्नीशियम, प्रोटीन और कई जरूरी विटामिन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो इसे एक हेल्दी विकल्प बनाते हैं।
खेती करते समय रखें ये सावधानियां
हालांकि यह पपीता हर तरह की जलवायु में उग सकता है, लेकिन पानी भराव वाली जगहों से बचना चाहिए। ज्यादा पानी और भारी मिट्टी में फंगस और वायरस का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए सही जमीन का चयन बेहद जरूरी है।
कुल मिलाकर यह खास किस्म का पपीता किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला विकल्प बन सकता है। सही तरीके से खेती कर किसान अपनी आमदनी को नई ऊंचाई दे सकते हैं।