रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं अब पककर तैयार है और मार्च के अंत से कटाई का दौर शुरू हो जाता है। लेकिन इसी समय बढ़ता तापमान खेतों के लिए बड़ा खतरा बन जाता है। हर साल हजारों एकड़ गेहूं आग की चपेट में आकर कुछ ही सेकंड में राख में बदल जाता है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा, गलत समय पर कटाई करने से भी पैदावार कम हो सकती है। बहुत जल्दी कटाई करने से दाने सिकुड़ जाते हैं, जबकि देर करने पर दाने खेत में गिरने लगते हैं।
ऐसे में सही समय पर और सही तरीके से कटाई करना बहुत जरूरी हो जाता है। यदि किसान सुरक्षा उपायों को अपनाएं और समय पर कटाई करें, तो ना सिर्फ आग के खतरे से बच सकते हैं, बल्कि उपज भी बेहतर कर सकते हैं।
गेहूं की फसल को आग से बचाने के कारगर उपाय
खेतों में कूड़ा-कचरा न जलाएं – गेहूं की कटाई के दौरान खेतों के आसपास कूड़ा-कचरा जमा न होने दें। कई बार किसान कूड़े को जलाते हैं, जिससे हवा के झोंके से चिंगारी गेहूं के खेत तक पहुंच सकती है और पूरी फसल जलकर राख हो सकती है।
बिजली के जर्जर तारों की जांच करें – खेतों से गुजरने वाली बिजली की तारें अगर जर्जर या ढीली हैं, तो उन्हें तुरंत ठीक करवाएं। गर्मी के मौसम में ढीले तार आपस में टकराकर चिंगारी उत्पन्न कर सकते हैं, जिससे आग लगने की संभावना बढ़ जाती है।
खेतों में धूम्रपान से बचें – कई बार लापरवाही में किसान या खेतों के आसपास मौजूद लोग बीड़ी, सिगरेट पीते हैं और जलती हुई राख खेत में फेंक देते हैं, जिससे फसल में आग लग सकती है। खेतों में धूम्रपान न करने की आदत डालें।
ट्यूबवेल को चालू हालत में रखें – खेतों में आग लगने की स्थिति में दमकल की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच पातीं, इसलिए अपने ट्यूबवेल को पहले से ठीक कर लें ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत पानी का इस्तेमाल कर आग पर काबू पाया जा सके।
कटाई का सही समय और तरीका क्यों है जरूरी?
कई किसान जल्दबाजी में फसल की कटाई कर देते हैं, जिससे अनाज सिकुड़कर कम हो जाता है। दूसरी ओर, अगर कटाई में बहुत अधिक देरी हो जाए, तो दाने खेत में झड़ने लगते हैं और उपज घट जाती है। कटाई का सही समय तभी होता है जब—
गेहूं की पत्तियां सूख चुकी हों और बालियां सुनहरी हो जाएं।
दानों में नमी 25-30% के बीच हो।
अंगूठे से दबाने पर दानों से दूध न निकले।
अगर कटाई में 2 से 7% तक की देरी होती है, तो भी उपज का नुकसान हो सकता है। इसलिए सही समय पर कटाई करके अनाज की गुणवत्ता और उपज को बढ़ाया जा सकता है।