Monday Remedies: आज दिन सोमवार है। शिव भक्त भगवान भोलेनाथ का जलाअभिषेक करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान विष्णु की तरह शिवजी को शंख से जल नहीं अर्पित नहीं होता है। सभी देवी-देवताओं को शंख से जल दिया जाता है। वहीं भगवान विष्णु और लक्ष्मी को शंख अत्यंत प्रिय है, तो फिर शिवजी की पूजा में इसे क्यों शामिल नहीं किया जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की कथा....
शिवपुराण की कथा के मुताबिक शंखचूड नाम का एक महापराक्रमी राक्षस था। शंखचूड दैत्यराम दंभ का बेटा था। दैत्यराज दंभ संतान नहीं थी। संतान पाने के लिए उसने भगवान विष्णु की कठिन तपस्या की थी। तप से खुश होकर विष्णु ने उसे दर्शन दिए। उन्होंने दंभ से वर मांगने को कहा। तब दंभ ने तीनों लोकों के लिए अजेय महापराक्रमी पुत्र का वरदाना मांगा। श्रीहरि ने वर दिया। इसके बाद दंभ के यहां शंखचूड़ का जन्म हुआ। शंखचुड ने पुष्कर में ब्रह्माजी को प्रसन्न करने के लिए खूब तपस्या की। तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मदेव ने उसे एक वर मांगने को कहा। तब शंखचूड ने वर मांगते हुए कहा कि वह देवताओं से कभी न हारे। ब्रह्माजी ने तथास्तु बोला और उसे श्रीकृष्णकवच प्रदान कर दिया।
शंखचूड़ की तपस्या से प्रसन्न होकर वर देने के बाद ब्रह्मा ने शंखचूड को धर्मध्वज की कन्या तुलसी विवाह करने की आज्ञा भी दे दी थी। ब्रह्मा की आज्ञा से तुलसी और शंखचूड की शादी हो गई। वरदान के अहंकार में चूर शंखचूड ने तीनों लोकों पर अपना स्वामित्व कब्जा कर लिया।
देवताओं ने त्रस्त होकर भगवान विष्णु से मदद मांगी। लेकिन उन्होंने खुद ही दंभ को ऐसे पुत्र का वरदान दिया था, इसलिए उन्होंने भोलेनाथ से इस समस्या का हल ढूंढने को कहा। तब शिव ने देवताओं के दुख दूर करने के लिए चल दिए। परेशानी तब आई जब श्रीकृष्ण कवच और तुलसी के पतिव्रत धर्म की वजह से शिवजी भी वध करने में सफल नहीं हो रहे थे।
तब विष्णु ने ब्राह्मण रूप धारण करके दैत्यराज से उसका श्रीकृष्णकवच दान में वापस मांग लिया था। इसके बाद शंखचूड़ का रूप धारण कर तुलसी के शील का हरण कर उसका दूसरा कवच भी तोड़ डाला। इसके बाद शिव ने शंखचूड़ को अपने त्रिशुल से भस्म कर उसका अंत कर दिया।
कहा जाता है उसकी हड्डियों से शंख बना था। शंखचूड़ विष्णु भक्त था, इसलिए माता लक्ष्मी और श्रीहरि को शंख का जल बेहद पसंद है और सभी देवताओं को शंख से जल चढ़ाया जा सकता है। लेकिन शिव ने उसका वध किया था तो शंख का जल शिव पूजा में शामिल नहीं किया जाता है।