Bajaj Auto: बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज ने सरकार के उस प्रस्ताव का स्वागत किया है, जिसमें 350 सीसी तक के टू-व्हीलर्स पर GST 28% से घटाकर 18% करने की बात कही गई है। उन्होंने इसे “शानदार और बेहतरीन” कदम बताया। हालांकि, उन्होंने सरकार से अपील की कि दरों को और सरल बनाया जाए और यह फायदा पूरे टू-व्हीलर इंडस्ट्री में सभी मॉडलों पर लागू होना चाहिए।
सीएनबीसी-18 से बातचीत में राजीव बजाज ने कहा कि टू-व्हीलर इंडस्ट्री अब तक कोविड से पहले के स्तर पर नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा, पिछले 5 सालों में महंगाई आमदनी से ज्यादा तेज बढ़ी है। आम आदमी महंगाई से बुरी तरह प्रभावित हुआ है, वहीं नौकरी और वेतन की स्थिति भी काफी कठिन रही है। बजाज ने कहा कि हमें इस बात को गहराई से समझना होगा।
बता दें कि यह सुधार सरकार की “जीएसटी 2.0” पहल का हिस्सा हैं, जिसका मकसद है टैक्स सिस्टम को आसान बनाना, विवाद कम करना और खपत को बढ़ावा देना। लेकिन राजस्व संतुलन, उलटे ड्यूटी स्ट्रक्चर और छूट जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।
राजीव बजाज ने यह भी कहा कि भारत में प्रस्तावित 18% टैक्स रेट अब भी दुनिया के मुकाबले काफी ज्यादा है। “ब्राजील, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और वियतनाम जैसे देशों में टू-व्हीलर्स पर टैक्स 8% से 14% तक है और ग्लोबल एवरेज करीब 12% है। उन्होंने बताया कि भारत में कटौती के बाद भी ग्राहक लगभग 50% ज्यादा टैक्स देंगे।
राजीव बजाज ने सरकार के फैसले पर उठाया सवाल
बजाज ने सरकार के सिर्फ 350 सीसी तक की बाइक्स पर छूट देने के फैसले पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, भारत में बिकने वाली 97–98% बाइक्स 350 सीसी से कम की हैं। तो क्यों न इसे आसान बनाया जाए और सभी बाइक्स पर 18% लागू किया जाए? सिर्फ 1–2% प्रीमियम बाइक्स को बाहर रखना बाजार में असमानता पैदा करेगा।
उन्होंने कहा कि इस तरह के नियम कंपनियों को बेवजह अपने प्रोडक्ट और इंजन डिजाइन बदलने के लिए मजबूर करते हैं, जिससे नुकसान होता है। बजाज ने चेतावनी दी कि ऐसे टैक्स सिस्टम से भारतीय मोटरसाइकिल मार्केट “कमजोर” हो सकता है। अगर ग्राहक बड़ी सीसी की बाइक खरीदना चाहता है तो उसे सस्ती मिलनी चाहिए। इससे ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलेगी, घरेलू सप्लाई चेन बेहतर होगी और ग्लोबल स्तर पर भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
अंत में जीएसटी दरों में कटौती के असर पर बोलते हुए उन्होंने कहा, मांग में थोड़ी सुस्ती आई है, लेकिन यह सिर्फ टल गई है, रुक नहीं गई। अगर नई पॉलिसी 1 अक्टूबर से लागू होती है तो त्योहारों के सीजन में बिक्री जोरदार तरीके से बढ़ेगी। ग्राहक खरीदारी रद्द नहीं कर रहे, बस सस्ती कीमतों का इंतजार कर रहे हैं।