Tesla in India : टेस्ला के भारत आने के क्या हैं मायने, किसको होगा फायदा, कौन हो सकता है परेशान!

टेस्ला के भारत में आने से टाटा मोटर्स, JSW MG, M&M और Hyundai के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है। भारत में EV मार्केट शेयर पर नजर डालें तो टाटा मोटर्स के पास 38 फीसदी, JSW MG मोटर्स के पास 31 फीसदी, M&M के पास 23 फीसदी और Hyundai के पास 3 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है

अपडेटेड Jul 15, 2025 पर 3:37 PM
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टेस्ला के भारत आने से ऑटो एंसिलरी कंपनियों को फायदा होगा। संवर्धन मदरसन इस ग्लोबल OEM को रियर व्यू मिरर सप्लाई करती है

मशहूर इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला की भारत में औपचारिक एंट्री हो गई है। आज मुंबई के BKC में टेस्ला के पहले शोरूम की लॉन्चिंग हुई। BKC के मेकर मैक्सिटी मॉल में खुले पहले एक्सपीरिएंस सेंटर का उद्घाटन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया। इस मौके पर देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि टेस्ला के आने से भारत की इंटरनेशनल छवि बेहतर हुई है। टेस्ला ने पहला इलेक्ट्रिक SUV मॉडल Y को भारत में लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि ये कार एक बार फुल चार्ज में 622 किलोमीटर तक चल सकती है। कार में सेफ्टी के लिए 8 एयरबैग के साथ लेवल-2 एडास जैसे फीचर्स दिए गए हैं। मॉडल Y के 2 मॉडल लॉन्च किए गए हैं जिसकी एक्स-शोरूम कीमत 60 लाख और 68 लाख रुपए है।

टेस्ला का भारत में सफर मुंबई के BKC में पहले एक्सपीरियंस सेंटर से शुरू हुआ है। दिल्ली में जल्द दूसरा शो रूम खुलेगा। कंपनी ने भारत में कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक SUV मॉडल Y लॉन्च किया है। इसके AWD और RWD दो वर्जन हैं। इनमें 60 kWh और 75 kWh बैटरी पैक दिया गया है जो 15 मिनट में फुल चार्ज हो जाता है। एक बार फुल चार्ज होने पर ये गाड़ी 622 किमी चलेगी।

टेस्ला मॉडल Y की कीमत की बात करें तो RWD वर्जन की कीमत 60 लाख रुपए और लॉन्ग रेंज RWD की कीमत 68 लाख रुपए रखी गई है। मुंबई, दिल्ली और गुरुग्राम में इनकी बुकिंग हो सकती है। मॉडल Y RWD की किस देश में कितनी कीमत है, इस पर नजर डालें तो भारत में इसकी कीमत 60 लाख रुपए है। वहीं, जर्मनी में ये 46 लाख और अमेरिका में 38 लाख रुपए में मिल सकती है। जबकि चीन में इसकी कीमत 31 लाख रुपए है।

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टेस्ला: भारत जरूरी या मजबूरी?

टेस्ला के भारत आने के मायने पर नजर डालें तो कंपनी का भारत आना उसके लिए जरूरी था। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो मार्केट है।

भारत का EV मार्केट तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। टेस्ला की ग्लोबल बिक्री घट रही है। चीनी कारों से टेस्ला को कड़ी चुनौती मिल रही है। ऐसे में भारत आना उसके लिए जरूरी हो गया था। भारत के तेज रफ्तार EV मार्केट को नजअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत के EV मार्केट में 2030 तक सालाना 22-25 फीसदी ग्रोथ की उम्मीद है। इस अवधि में ये बाजार बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपए का हो सकता है।

टेस्ला से किसको टेंशन

टेस्ला के भारत में आने से टाटा मोटर्स, JSW MG, M&M और Hyundai के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है। भारत में EV मार्केट शेयर पर नजर डालें तो

टाटा मोटर्स के पास 38 फीसदी, JSW MG मोटर्स के पास 31 फीसदी, M&M के पास 23 फीसदी और Hyundai के पास 3 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है। फिलहाल टेस्ला भारत में मैन्युफैक्चरिंग नहीं करेगी।

टेस्ला से किसको होगा फायदा

टेस्ला के भारत आने से ऑटो एंसिलरी कंपनियों को फायदा होगा। संवर्धन मदरसन इस ग्लोबल OEM को रियर व्यू मिरर सप्लाई करती है। SONA BLW टेस्ला को गियर्स और असेंबली की सप्लाई करती है। वहीं, BOSCH इसको चार्जर, ब्रेकिंग पार्ट्स औरसेंसर्स की सप्लाई करती है। जबकि SKF इंडिया की स्वीडिश पैरेंट कंपनी टेस्ला को बेअरिंग सप्लाई कर रही है। सुप्राजित इंजीनियरिंग भी टेस्ला सहित तमाम ग्लोबल EV कंपनियों को केबल्स सप्लाई ककरती है। इन सभी ऑटो एंसिलरी कंपनियों को टेस्ला के भारत आने से फायदा होगा।

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