Income Tax Slab | Budget 2026 Expectations: इस बार के बजट में 'नए इनकम टैक्स बिल' के जरिए 60 साल पुराने कानून को बदलने की तैयारी है। सबसे बड़ा बदलाव 'टैक्स ईयर' का कॉन्सेप्ट है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हो सकता है। अब 'फाइनेंशियल ईयर' और 'असेसमेंट ईयर' के बीच का भ्रम खत्म हो जाएगा और जिस साल आप कमाएंगे, उसी साल के नाम से टैक्स भरा जाएगा
Income Tax Slab | Budget 2026 Expectations: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपना लगातार नौवां बजट पेश करेंगी। मोदी 3.0 सरकार के इस तीसरे पूर्ण बजट से नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग को ऐतिहासिक उम्मीदें हैं। इस बार फोकस केवल टैक्स बचाने पर नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा बचाने पर है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि नई टैक्स व्यवस्था को और आकर्षक बनाने के
Income Tax Slab | Budget 2026 Expectations: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपना लगातार नौवां बजट पेश करेंगी। मोदी 3.0 सरकार के इस तीसरे पूर्ण बजट से नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग को ऐतिहासिक उम्मीदें हैं। इस बार फोकस केवल टैक्स बचाने पर नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा बचाने पर है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि नई टैक्स व्यवस्था को और आकर्षक बनाने के लिए सरकार इस बार 'बोल्ड' कदम उठा सकती है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन और 87A का नया गणित
सैलरीड क्लास की सबसे बड़ी मांग स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख करने की है। साथ ही सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली टैक्स रिबेट की सीमा को ₹12 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख करने की चर्चा है। इसका मतलब है कि ₹15 लाख तक की आय वाले करोड़ों लोग टैक्स के दायरे से पूरी तरह बाहर हो सकते हैं। विशेषज्ञ एक 'ग्रेजुअल टैपरिंग' मैकेनिज्म की भी मांग कर रहे हैं, ताकि ₹12.01 लाख कमाने वाले व्यक्ति पर अचानक भारी टैक्स का बोझ न पड़े।
होम लोन और सीनियर सिटीजन्स के लिए 'स्पेशल बूस्ट'
रियल एस्टेट सेक्टर और घर खरीदार होम लोन ब्याज पर छूट की सीमा को ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख करने की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं, वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक ब्याज पर मिलने वाली छूट (80TTB) को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख किया जा सकता है। पेंशनभोगियों के लिए अलग से हायर स्टैंडर्ड डिडक्शन (करीब ₹1.25 लाख) की भी मांग उठ रही है, ताकि वे मेडिकल महंगाई का सामना कर सकें।
इस बजट में 'इनकम टैक्स बिल 2025' के जरिए 60 साल पुराने कानून को बदलने की तैयारी है। सबसे बड़ा बदलाव 'टैक्स ईयर' का कॉन्सेप्ट है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हो सकता है। अब 'फाइनेंशियल ईयर' और 'असेसमेंट ईयर' के बीच का भ्रम खत्म हो जाएगा और जिस साल आप कमाएंगे, उसी साल के नाम से टैक्स भरा जाएगा। इसका उद्देश्य टैक्स फाइलिंग को इतना सरल बनाना है कि आम आदमी बिना किसी मदद के अपना रिटर्न भर सके।
कैपिटल गेन्स और रिफंड की 'स्मूथ' प्रक्रिया
निवेशक चाहते हैं कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स(LTCG) के नियमों को सरल बनाया जाए और होल्डिंग पीरियड की विसंगतियों को दूर किया जाए। इसके अलावा, AIS में होने वाली गलतियों और रिफंड में होने वाली देरी को कम करने के लिए 'डिजिटल-फर्स्ट' अप्रोच अपनाने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य एक ऐसी प्रणाली विकसित करना है जहां 'फेसलेस असेसमेंट' में मानवीय हस्तक्षेप कम हो और ईमानदार करदाताओं को नोटिसों के चक्कर न काटने पड़ें।