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Abhishek Gupta JANUARY 26, 2026 / 4:02 PM IST

Income Tax Slab | Budget 2026 Expectations: क्या मध्यम वर्ग को मिलेगी टैक्स में राहत? जानिए किन सेक्टर्स पर हो सकता है फोकस

Income Tax Slab | Budget 2026 Expectations: बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ होगी, जबकि मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन 29 जनवरी को 'आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27' पेश करेंगे, जो देश की अर्थव्यवस्था की वर्तमान सेहत और भविष्य की चुनौतियों का खाका पेश करेगा

Income Tax Slab | Budget 2026 Expectations: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, रविवार को अपना 9वां लगातार केंद्रीय बजट पेश कर इतिहास रचने जा रही हैं। इस बजट के साथ सीतारमण मोरारजी देसाई के 10 बजटों के रिकॉर्ड के करीब पहुंच जाएंगी, हालांकि लगातार 9 बजट पेश करने वाली वह देश की पहली वित्त मंत्री होंगी। बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ होगी

बजट 2026 से आम आदमी और सैलरीड क्लास को सबसे बड़ी उम्मीद इनकम टैक्स में राहत को लेकर है
बजट 2026 से आम आदमी और सैलरीड क्लास को सबसे बड़ी उम्मीद इनकम टैक्स में राहत को लेकर है
JANUARY 26, 2026 / 4:02 PM IST

Budget 2026 Expectations Live: रियल एस्टेट सेक्टर की बजट 2026 से बड़ी उम्मीदें

भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र आगामी केंद्रीय बजट से बड़े नीतिगत बदलावों की उम्मीद कर रहा है, ताकि बाजार में बनी सकारात्मक गति को और तेज किया जा सके। आरजी ग्रुप के निदेशक हिमांशु गर्ग के अनुसार, रेपो रेट में हालिया कटौती ने बाजार में निवेशकों और खरीदारों का भरोसा बढ़ाया है, लेकिन अब गेंद सरकार के पाले में है। उद्योग जगत की मांग है कि बजट 2026 में किफायती आवास को विशेष प्राथमिकता दी जाए, होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स कटौती की सीमा (धारा 24b) को बढ़ाया जाए और बुनियादी ढांचे में निवेश को तेज किया जाए। अगर ये कदम उठाए जाते हैं, तो इससे न केवल मध्यम वर्ग के लिए घर खरीदना आसान होगा, बल्कि निर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    JANUARY 26, 2026 / 3:45 PM IST

    Budget 2026 Expectations Live: बजट 2026 का पूरा कैलेंडर

    भारत के आगामी वित्तीय वर्ष की दिशा तय करने वाला संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को दोनों सदनों में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संयुक्त संबोधन के साथ शुरू होगा, जिसके बाद 31 जनवरी को मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन 'इकोनॉमिक सर्वे 2026' पेश कर देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति का खाका रखेंगे। सत्र का मुख्य आकर्षण 1 फरवरी को होगा जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट 2026 पेश करेंगी, जिसमें टैक्स सुधारों और विकास योजनाओं पर पूरे देश की नजर रहेगी, और अंततः यह महत्वपूर्ण विधायी सत्र 2 अप्रैल 2026 को संपन्न होगा।

      JANUARY 26, 2026 / 3:25 PM IST

      Budget 2026 Expectations Live: इकोनॉमिक सर्वे क्या होता है?

      आर्थिक सर्वेक्षण वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले आर्थिक कार्य विभाग के आर्थिक प्रभाग द्वारा तैयार किया गया एक वार्षिक दस्तावेज है। इसे मुख्य आर्थिक सलाहकार के नेतृत्व में बनाया जाता है। यह दस्तावेज भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें पिछले वित्त वर्ष के दौरान विकास दर, मुद्रास्फीति, रोजगार, व्यापार और राजकोषीय स्वास्थ्य जैसे प्रमुख संकेतकों की समीक्षा की जाती है। ऐतिहासिक रूप से, पहला आर्थिक सर्वेक्षण 1950-51 में बजट के साथ ही पेश किया गया था, लेकिन 1964 से इसे बजट से अलग कर एक दिन पहले पेश करने की परंपरा शुरू हुई ताकि आर्थिक प्रदर्शन का निष्पक्ष और गहराई से मूल्यांकन किया जा सके।

        JANUARY 26, 2026 / 3:10 PM IST

        Budget 2026 Expectations Live: 31 जनवरी को ही क्यों पेश होता है इकोनॉमिक सर्वे?

        भारत में आर्थिक सर्वेक्षण को बजट से एक दिन पहले, यानी 31 जनवरी को पेश करने की परंपरा के पीछे एक ठोस तार्किक और ऐतिहासिक कारण है। 1964 तक यह सर्वेक्षण बजट का ही एक हिस्सा हुआ करता था और बजट भाषण के साथ ही प्रस्तुत किया जाता था। हालांकि, संसदीय चर्चाओं को अधिक सार्थक और डेटा-आधारित बनाने के लिए इसे बजट से अलग कर दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य सांसदों और आम जनता को देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति, चुनौतियों और विकास के आंकड़ों से पहले ही अवगत कराना है, ताकि जब अगले दिन बजट पेश हो, तो वे सरकार के नीतिगत फैसलों और आवंटनों को सही संदर्भ में समझ सकें।

          JANUARY 26, 2026 / 2:49 PM IST

          Budget 2026 Expectations Live: बजट से पहले पेश होगा देश की आर्थिक सेहत का 'एक्स-रे'

          बजट पेश होने से ठीक एक दिन पहले संसद में पेश होने वाले आर्थिक सर्वेक्षण पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा तैयार किया गया यह दस्तावेज भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे प्रामाणिक 'रिपोर्ट कार्ड' माना जाता है, जो पिछले वित्त वर्ष की उपलब्धियों और भविष्य की चुनौतियों का खाका खींचता है। यह सर्वेक्षण न केवल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाता है, बल्कि सरकार को नीतिगत सुझाव भी देता है। आमतौर पर यह दो मुख्य भागों में विभाजित होता है, जो अर्थव्यवस्था के सूक्ष्म और व्यापक दोनों पहलुओं का गहराई से विश्लेषण करते हैं।

            JANUARY 26, 2026 / 2:14 PM IST

            Budget 2026 Expectations Live: कब पेश हुआ था भारत का पहला बजट?

            स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर, 1947 को तत्कालीन वित्त मंत्री आर.के. शनमुखम चेट्टी द्वारा पेश किया गया था। यह एक अंतरिम बजट था, जो मात्र साढ़े सात महीनों (15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक) के लिए था। विभाजन की त्रासदी और शरणार्थी संकट के बीच पेश किए गए इस बजट का कुल राजस्व अनुमान ₹171.15 करोड़ था, जबकि खर्च ₹197.29 करोड़ रखा गया था। चेट्टी ने अपने भाषण में आत्मनिर्भरता और खाद्य सुरक्षा पर जोर दिया था, जिसमें बजट का लगभग 46% हिस्सा (₹92.74 करोड़) केवल रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटित किया गया था, ताकि नव-स्वतंत्र राष्ट्र की सीमाओं को सुरक्षित किया जा सके।

              JANUARY 26, 2026 / 1:47 PM IST

              Budget 2026 Expectations Live: 'विकसित भारत' के लिए एडटेक और शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधारों की मांग

              भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ, शिक्षा और एडटेक क्षेत्र के दिग्गजों ने आगामी बजट में सरकार से नीतिगत प्रोत्साहन और निवेश बढ़ाने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक कुशल वर्कफोर्स तैयार करने के लिए डिजिटल लर्निंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर सार्वजनिक खर्च बढ़ाना अनिवार्य है। उद्योग जगत की प्रमुख मांगों में शिक्षा सेवाओं पर

                JANUARY 26, 2026 / 1:27 PM IST

                Budget 2026 Expectations Live: क्या नई टैक्स व्यवस्था में मिलेगी धारा 80D की संजीवनी?

                बजट 2026 की उल्टी गिनती शुरू होते ही स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र ने सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखी है। निवा बूपा के एमडी और सीईओ कृष्णन रामचंद्रन सहित उद्योग के कई दिग्गजों का मानना है कि 'नई टैक्स व्यवस्था' को और अधिक व्यवहारिक बनाने के लिए इसमें धारा 80D के तहत मिलने वाली छूट को शामिल किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का तर्क है कि बढ़ती मेडिकल महंगाई (जो भारत में 14% तक पहुंच गई है) और लंबी जीवन प्रत्याशा को देखते हुए, वर्तमान में केवल पुरानी व्यवस्था तक सीमित इस छूट को नई व्यवस्था में भी जगह मिलनी चाहिए। साथ ही, मांग यह भी है कि ₹1 लाख की वर्तमान अधिकतम सीमा को बढ़ाकर कम से कम ₹1.5 लाख किया जाए।

                  JANUARY 26, 2026 / 1:03 PM IST

                  Budget 2026 Expectations Live: क्या नई टैक्स व्यवस्था में मिलेगी होम लोन और हेल्थ इंश्योरेंस की छूट?

                  आगामी बजट 2026 को लेकर वेतनभोगी वर्ग के बीच एक नई उम्मीद जगी है। सूत्रों और विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार 'नई टैक्स व्यवस्था' को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए इसमें दो बड़े बदलावों पर विचार कर रही है। पहला प्रस्ताव ₹2 लाख तक के होम लोन ब्याज पर कटौती देने का है, जो वर्तमान में केवल पुरानी व्यवस्था तक सीमित है। दूसरा महत्वपूर्ण विचार ₹50,000 तक के हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर छूट देने का है। अगर 1 फरवरी को वित्त मंत्री ये घोषणाएं करती हैं, तो नई व्यवस्था उन मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए 'गेम चेंजर' साबित होगी जो आवास और स्वास्थ्य देखभाल की बढ़ती लागतों से जूझ रहे हैं और वर्तमान में केवल इन दो छूटों के कारण पुरानी व्यवस्था से चिपके हुए हैं।

                    JANUARY 26, 2026 / 12:26 PM IST

                    Budget 2026 Expectations Live: क्या पुरानी टैक्स व्यवस्था को मिलेगा 'बूस्टर डोज'? निवेश करने वालों को राहत की आस

                    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आगामी 9वें बजट से उन करदाताओं को काफी उम्मीदें हैं जो आज भी 'पुरानी टैक्स व्यवस्था' के साथ बने हुए हैं। वर्तमान में पुरानी व्यवस्था उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो होम लोन, बीमा और 80C के तहत भारी निवेश करते हैं, लेकिन इसके टैक्स स्लैब (₹10 लाख के ऊपर सीधा 30%) काफी पुराने और बोझिल हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार 80C की सीमा को ₹1.5 लाख से बढ़ाकर ₹3 लाख करती है या ₹5 लाख से ₹10 लाख के बीच के 20% टैक्स रेट को कम करती है, तभी यह व्यवस्था नई व्यवस्था (जहां ₹12 लाख तक टैक्स शून्य है) के सामने टिक पाएगी।

                      JANUARY 26, 2026 / 12:05 PM IST

                      Budget 2026 Expectations Live: बजट 2025 में कैसे ₹12 लाख तक की आय पर जीरो हो गया टैक्स? समझिए रिबेट का गणित

                      बजट 2025 में किए गए बड़े बदलावों के बाद, 'नई टैक्स व्यवस्था' अब मध्यम वर्ग के लिए एक जबरदस्त बचत उपाय बन गई है। वर्तमान नियमों के तहत, हालांकि बेसिक छूट की सीमा ₹4 लाख है, लेकिन धारा 87A के तहत मिलने वाले ₹60,000 के बंपर रिबेट ने ₹12 लाख तक की आय को पूरी तरह टैक्स-फ्री बना दिया है। इसके अतिरिक्त, वेतनभोगी वर्ग के लिए ₹75,000 की मानक कटौती इस सीमा को प्रभावी रूप से ₹12.75 लाख तक ले जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ढांचा उन लोगों के लिए वरदान है जिनके पास निवेश के साधन कम हैं, क्योंकि यह बिना किसी 80C या 80D के झंझट के सीधे तौर पर ₹40,000 से ₹80,000 तक की कर बचत सुनिश्चित करता है।

                        JANUARY 26, 2026 / 11:38 AM IST

                        Budget 2026 Expectations Live: ₹20 लाख की आय पर 'नई टैक्स व्यवस्था' में कितनी होगी बचत?

                        बजट 2025 में टैक्स स्लैब के पुनर्गठन के बाद ₹20 लाख की वार्षिक आय वाले उच्च-मध्यम वर्ग के करदाताओं के लिए 'नई टैक्स व्यवस्था' एक फायदे का सौदा साबित हो रही है। जहां पहले इस आय स्तर पर लगभग ₹2.9 लाख का टैक्स बनता था, वहीं अब संशोधित स्लैब और ₹75,000 के मानक कटौती के साथ यह घटकर मात्र ₹1.92 लाख (सेस सहित) रह गया है। इसका मतलब है कि करदाता की जेब में सीधे ₹90,000 की अतिरिक्त बचत हो रही है। हालांकि धारा 87A की 'शून्य टैक्स' रिबेट केवल ₹12 लाख तक की आय पर ही सीमित है, लेकिन स्लैब दरों में की गई कटौती ने ₹16 लाख, ₹24 लाख और ₹50 लाख तक की आय वाले व्यक्तियों को भी महत्वपूर्ण राहत दी है।

                          JANUARY 26, 2026 / 11:09 AM IST

                          Budget 2026 Expectations Live: क्यों करदाता छोड़ रहे हैं पुरानी टैक्स व्यवस्था, क्या इस बार बदलेगी बाजी?

                          भारत में आयकर का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, लगभग 75% से 80% करदाता अब 'नई टैक्स व्यवस्था' को अपना चुके हैं। इसका मुख्य कारण बजट 2025 में मिली भारी राहत है, जिसमें ₹12.75 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री कर दिया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था की आसान शर्ते, कम टैक्स स्लैब और कागजी कार्रवाई से मुक्ति ने मध्यम वर्ग को अपनी ओर आकर्षित किया है। हालांकि, आगामी बजट 2026 में 'पुरानी व्यवस्था' के पुनरुद्धार की चर्चा भी तेज है, क्योंकि जिन लोगों ने होम लोन ले रखा है या जो बीमा और PPF में भारी निवेश करते हैं, उनके लिए पुरानी व्यवस्था अभी भी एक मजबूरी या जरूरत बनी हुई है।

                            JANUARY 26, 2026 / 10:39 AM IST

                            Budget 2026 Expectations Live: क्या मध्यम वर्ग को मिलेगी और बड़ी राहत? ₹15 लाख तक 'नो टैक्स' की बढ़ती उम्मीद!

                            बजट 2025 में ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री करने के ऐतिहासिक कदम के बाद, अब आगामी बजट 2026 से मध्यम वर्ग की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत (Cost of Living) को देखते हुए टैक्स विशेषज्ञ सरकार को सुझाव दे रहे हैं कि धारा 87A के तहत मिलने वाले रिबेट के दायरे को और बढ़ाकर ₹15 लाख तक किया जाए। इसके अलावा, वेतनभोगी वर्ग के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) को ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख या ₹1.25 लाख करने की पुरजोर मांग है, ताकि नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) उन लोगों के लिए भी आकर्षक बन सके जो वर्तमान में होम लोन या इंश्योरेंस के लाभ के कारण पुरानी व्यवस्था में टिके हुए हैं।

                              JANUARY 26, 2026 / 10:21 AM IST

                              Budget 2026 Expectations Live: क्या सभी सेक्टर्स में टलेगा ESOP पर टैक्स? कर्मचारियों को 'कैश स्ट्रेस' से राहत की उम्मीद

                              आगामी बजट 2026 के लिए बॉम्बे चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (BCCI) ने सरकार से कर्मचारी स्टॉक ऑप्शन प्लान (ESOP) पर लगने वाले टैक्स नियमों में बड़े बदलाव की मांग की है। वर्तमान में, जब कोई कर्मचारी अपने ESOP को शेयरों में बदलता है, तो उसे उस समय शेयर की मार्केट वैल्यू और एक्सरसाइज प्राइस के अंतर पर 'परक्विजिट टैक्स' देना पड़ता है। बड़ी समस्या यह है कि कर्मचारी को शेयर तो मिल जाते हैं, लेकिन उसके हाथ में कोई 'कैश' नहीं आता, फिर भी उसे अपनी जेब से भारी टैक्स चुकाना पड़ता है। इसे 'कैश-फ्लो स्ट्रेस' कहा जाता है, जो कई बार कर्मचारियों को अपने ऑप्शन छोड़ने पर मजबूर कर देता है।

                                JANUARY 26, 2026 / 9:47 AM IST

                                Budget 2026 Expectations Live: होम लोन ब्याज छूट बढ़कर ₹5 लाख होगी?

                                आगामी बजट 2026-27 के लिए रियल एस्टेट उद्योग की संस्था CREDAI और NAREDCO ने सरकार के सामने घर खरीदारों को राहत देने के लिए एक व्यापक मांग पत्र रखा है। वर्तमान में घरों की बढ़ती कीमतों और बढ़ती EMI के बोझ को देखते हुए, सबसे प्रमुख मांग आयकर की धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को वर्तमान ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख करने की है। विशेषज्ञों का मानना है कि ₹2 लाख की यह सीमा एक दशक पहले (2014) तय की गई थी, जो अब मेट्रो शहरों में घर की औसत कीमतों और बड़े लोन साइज के मुकाबले बेहद कम पड़ती है।

                                  JANUARY 26, 2026 / 9:30 AM IST

                                  Budget 2026 Expectations Live: नई कर व्यवस्था में मिलेगा स्वास्थ्य बीमा पर टैक्स लाभ!

                                  आगामी बजट 2026 के लिए वेतनभोगी वर्ग और वरिष्ठ नागरिकों की सबसे प्रमुख मांगों में से एक नई कर व्यवस्था के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर कटौती की अनुमति देना है। वर्तमान में, आयकर की धारा 80D के तहत मिलने वाला यह लाभ केवल पुरानी कर व्यवस्था तक ही सीमित है। चिकित्सा मुद्रास्फीति के 11% से 14% की दर से बढ़ने और बीमा प्रीमियम के महंगे होने के कारण, कर विशेषज्ञ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आग्रह कर रहे हैं कि वे नई व्यवस्था को अधिक संतुलित और आकर्षक बनाने के लिए इसमें हेल्थ इंश्योरेंस के खर्चों को शामिल करें।

                                    JANUARY 26, 2026 / 9:23 AM IST

                                    Budget 2026 Expectations Live: टैक्सपेयर्स और मध्यम वर्ग की क्या है उम्मीदें?

                                    बजट 2026 से आम आदमी और वेतनभोगी वर्ग को सबसे बड़ी उम्मीद इनकम टैक्स में राहत को लेकर है। महंगाई और जीवन यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि 'नई टैक्स व्यवस्था' के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख किया जा सकता है। इसके अलावा, करदाता 'जॉइंट टैक्सेशन' और होम लोन के ब्याज पर ₹5 लाख तक की छूट की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार खपत को बढ़ावा देने के लिए मध्यम वर्ग के हाथों में अधिक पैसा छोड़ने की कोशिश करेगी, ताकि ऑटोमोबाइल और हाउसिंग जैसे प्रमुख सेक्टर्स में मांग बढ़ सके।

                                      JANUARY 26, 2026 / 8:51 AM IST

                                      Budget 2026 Expectations Live: कृषि और प्रमुख सेक्टर्स पर हो सकता है फोकस!

                                      कृषि क्षेत्र, जिसे पिछले बजट में अर्थव्यवस्था का 'पहला इंजन' बताया गया था, इस बार भी केंद्र में रहने की संभावना है। हालांकि, पिछले बजट की कुछ घोषणाओं के अभी तक पूरी तरह लागू न होने के कारण सरकार पर दबाव है कि वह खेती और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के लिए ठोस आवंटन करे। साथ ही, 'मेक इन इंडिया' को गति देने के लिए कस्टम ड्यूटी के स्लैब को 8 से घटाकर 4 करने और AI व रोबोटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए विशेष टैक्स प्रोत्साहन देने की उम्मीद है। बजट सत्र दो चरणों में (28 जनवरी से 13 फरवरी और 9 मार्च से 2 अप्रैल) चलेगा, जिसमें वित्त मंत्री राजकोषीय घाटे को कम करने और 'विकसित भारत' के विजन को मजबूती देने के बीच संतुलन साधने की कोशिश करेंगी।

                                        JANUARY 26, 2026 / 8:38 AM IST

                                        Budget 2026 Expectations Live: क्या इक्विटी निवेश पर भी मिलेगा 87A रिबेट? छोटे निवेशकों की बड़ी उम्मीद

                                        आगामी बजट 2026-27 के लिए टैक्स विशेषज्ञों और 'एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया' (AMFI) ने सरकार से धारा 87A (Section 87A) के रिबेट में एक बड़ी विसंगति को दूर करने की मांग की है। पिछले बजट 2025 में सरकार ने नई टैक्स व्यवस्था के तहत रिबेट की सीमा बढ़ाकर ₹60,000 कर दी थी, जिससे ₹12 लाख तक की आय टैक्स-फ्री हो गई। हालांकि, यह राहत उन निवेशकों को नहीं मिलती जिनकी आय में शेयरों या इक्विटी म्यूचुअल फंड से होने वाला 'कैपिटल गेन्स' शामिल है। विशेषज्ञों का तर्क है कि इससे छोटे निवेशकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, भले ही उनकी कुल वार्षिक आय ₹12 लाख से कम हो।

                                          JANUARY 26, 2026 / 8:22 AM IST

                                          Budget 2026 Expectations Live: बढ़ती महंगाई और बीमारी के खर्च पर मिले टैक्स मरहम, सीनियर सिटीजंस की वित्त मंत्री से गुहार

                                          भारत की तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के लिए आगामी बजट 2026-27 बेहद उम्मीदों भरा है। रिटायरमेंट के बाद फिक्स्ड पेंशन और जमा पूंजी के ब्याज पर निर्भर वरिष्ठ नागरिकों के लिए बढ़ती 'मेडिकल महंगाई' सबसे बड़ी चिंता बन गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, बजट 2026 में सीनियर सिटीजंस के लिए बुनियादी छूट सीमा को बढ़ाने और नई टैक्स व्यवस्था में भी उम्र के आधार पर अतिरिक्त लाभ देने की पुरजोर वकालत की जा रही है। वर्तमान में नई व्यवस्था में सभी आयु वर्गों के लिए समान नियम हैं, जिसे विशेषज्ञ 'अन्यायपूर्ण' मान रहे हैं क्योंकि बुजुर्गों के स्वास्थ्य संबंधी खर्चे युवाओं की तुलना में कहीं अधिक होते हैं।

                                            JANUARY 26, 2026 / 8:16 AM IST

                                            Budget 2026 Expectations Live: क्या सरकार रिफंड और टैक्स देनदारी के ब्याज को करेगी बराबर?

                                            आगामी बजट 2026-27 के लिए टैक्स विशेषज्ञों ने सरकार के सामने 'ब्याज दरों के युक्तिकरण' का एक अहम प्रस्ताव रखा है। वर्तमान में आयकर कानूनों के तहत एक बड़ी विसंगति है। अगर किसी करदाता से टैक्स भुगतान में देरी होती है, तो उसे धारा 234A, 234B और 234C के तहत 1% प्रति माह (12% वार्षिक) की दर से भारी ब्याज देना पड़ता है। इसके विपरीत अगर आयकर विभाग करदाता का रिफंड देने में देरी करता है, तो धारा 244A के तहत उसे केवल 0.5% प्रति माह (6% वार्षिक) की दर से ब्याज मिलता है। विशेषज्ञों का तर्क है कि 'ट्रस्ट-आधारित' टैक्स सिस्टम के लिए दोनों पक्षों के लिए ब्याज दरें समान होनी चाहिए।

                                              JANUARY 26, 2026 / 8:05 AM IST

                                              Budget 2026 Expectations Live: टैक्सपेयर्स की उम्मीदें- महंगाई से जुड़े टैक्स स्लैब और पूंजीगत लाभ कर में मिले राहत

                                              'स्टेलर इनोवेशंस' के टैक्स एक्सपर्ट कार्तिक नारायण के अनुसार, आगामी बजट 2026 भारत की दोहरी टैक्स व्यवस्था में सरलता और स्पष्टता लाने का एक बेहतरीन अवसर है। चूंकि अब अधिकांश करदाता 'नई टैक्स व्यवस्था' को अपना रहे हैं, इसलिए सरकार को अगला तार्किक कदम उठाते हुए टैक्स स्लैब्स को महंगाई के साथ जोड़ने पर विचार करना चाहिए, ताकि आय बढ़ने पर टैक्स का बोझ न बढ़े। इसके अलावा, धारा 87A के तहत मिलने वाली रिबेट की सीमा को तर्कसंगत बनाने और छोटी गलतियों पर करदाताओं को होने वाली परेशानी दूर करने की जरूरत है। साथ ही पुराने टैक्स ढांचे को अचानक खत्म करने के बजाय धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से हटाना चाहिए, क्योंकि धारा 80C जैसे बचत-उन्मुख उत्पाद भारतीयों के दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों का आधार हैं। निवेशकों के लिए कैपिटल गेन्स और डिविडेंड टैक्स के नियमों को एकीकृत करना और इंडेक्सेशन के लाभों को बेहतर बनाना वित्तीय बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।