Income Tax Slab | Budget 2026 Expectations: बजट 2025 में स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 किया गया था, लेकिन इस बार विशेषज्ञ इसे ₹1,00,000 तक ले जाने की उम्मीद जता रहे हैं। इसके साथ ही, नई टैक्स रिजीम के तहत धारा 87A की छूट सीमा को वर्तमान के ₹12.75 लाख से बढ़ाकर ₹14 लाख से ₹15 लाख करने की चर्चा जोरों पर है
Income Tax Slab | Budget 2026 Expectations: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपना 9वां लगातार बजट पेश करने जा रही हैं। पिछले साल के बजट में ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री करने और स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर ₹75,000 करने के ऐतिहासिक फैसलों के बाद, इस साल भी टैक्सपेयर्स की उम्मीदें आसमान पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सरकार का फोकस 'बड़ी घोषणाओं' के बजाय 'नियमों के
Income Tax Slab | Budget 2026 Expectations: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपना 9वां लगातार बजट पेश करने जा रही हैं। पिछले साल के बजट में ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री करने और स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर ₹75,000 करने के ऐतिहासिक फैसलों के बाद, इस साल भी टैक्सपेयर्स की उम्मीदें आसमान पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सरकार का फोकस 'बड़ी घोषणाओं' के बजाय 'नियमों के सरलीकरण' और 'नई टैक्स व्यवस्था को और आकर्षक बनाने पर होगा।
वेतनभोगियों और बचतकर्ताओं की 'विशलिस्ट'
मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों के लिए बजट 2026 में ये 3 बड़े बदलाव गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं:
स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी: उम्मीद की जा रही है कि ₹75,000 की वर्तमान सीमा को बढ़ाकर ₹1 लाख किया जा सकता है, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच हाथ में अधिक पैसा बच सके।
नई व्यवस्था में सेक्शन 80D की एंट्री: वर्तमान में नई टैक्स व्यवस्था में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर कोई छूट नहीं मिलती। मेडिकल महंगाई (11-14%) को देखते हुए विशेषज्ञ मांग कर रहे हैं कि 80D के तहत मिलने वाली छूट को नई व्यवस्था में भी शामिल किया जाए।
होम लोन ब्याज पर राहत: घर खरीदारों के लिए सेक्शन 24(b) के तहत ब्याज पर ₹2 लाख की छूट की सीमा पिछले एक दशक से नहीं बदली है। इसे बढ़ाकर ₹3 लाख करने की मांग जोर पकड़ रही है।
क्या पुरानी टैक्स व्यवस्था खत्म होगी?
बजट 2026 में सबसे बड़ा सवाल 'पुरानी टैक्स व्यवस्था' के भविष्य को लेकर है। लगभग 72% करदाता पहले ही नई व्यवस्था अपना चुके हैं। सरकार इसे ही डिफॉल्ट और स्थायी व्यवस्था बनाना चाहती है। हालांकि इसके तुरंत खत्म होने की संभावना कम है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार पुरानी व्यवस्था में कोई नया लाभ न देकर लोगों को धीरे-धीरे नई व्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए मजबूर कर रही है। ₹12 लाख से ₹20 लाख के स्लैब में टैक्स दरों को और तर्कसंगत बनाया जा सकता है ताकि मध्यम-उच्च आय वर्ग को भी नई व्यवस्था पसंद आए।