Budget 2026 Expectations: इस बार के बजट में मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोग नई कर व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री करने और होम लोन व स्वास्थ्य बीमा पर कटौती की सीमा बढ़ाने जैसी बड़ी घोषणाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं। साथ ही निवेशक 'लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स' (LTCG) पर राहत की मांग कर रहे हैं
Budget 2026 Expectations: 1 फरवरी को निर्मला सीतारमण अपना लगातार 9वां बजट पेश कर इतिहास रचेंगी। वह एक ही प्रधानमंत्री के कार्यकाल में सबसे अधिक बजट पेश करने वाली पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी और मोरारजी देसाई के 10 बजट के रिकॉर्ड के करीब पहुंच जाएंगी। इस बार बजट रविवार को पेश होना एक दुर्लभ संयोग है। इस बार के बजट में मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोग नई कर व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक की आ
Budget 2026 Expectations: 1 फरवरी को निर्मला सीतारमण अपना लगातार 9वां बजट पेश कर इतिहास रचेंगी। वह एक ही प्रधानमंत्री के कार्यकाल में सबसे अधिक बजट पेश करने वाली पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी और मोरारजी देसाई के 10 बजट के रिकॉर्ड के करीब पहुंच जाएंगी। इस बार बजट रविवार को पेश होना एक दुर्लभ संयोग है। इस बार के बजट में मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोग नई कर व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री करने और होम लोन व स्वास्थ्य बीमा पर कटौती की सीमा बढ़ाने जैसी बड़ी घोषणाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं। साथ ही निवेशक 'लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स' (LTCG) पर राहत की मांग कर रहे हैं।
रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) के अनुसार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3% रख सकती हैं। यह चालू वित्त वर्ष के 4.4% के अनुमान से थोड़ा कम होगा, जो सरकार की मध्यम अवधि के ऋण कंसोलिडेशन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एजेंसी को उम्मीद है कि बुनियादी ढांचे को गति देने के लिए पूंजीगत व्यय में 14% की वृद्धि की जा सकती है, जिससे यह ₹13.1 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। यह निवेश 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने से पहले अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वैश्विक तनाव और निर्यात की चुनौतियां
बजट 2026 एक ऐसे समय में आ रहा है जब भारत को गंभीर वैश्विक अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यातकों पर 50% तक के भारी टैरिफ और रूस से तेल खरीद पर जुर्माने जैसी व्यापारिक बाधाओं ने भारतीय बाजार में हलचल पैदा की है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ₹90.4 के नए निचले स्तर को छू चुका है, जिससे आयात महंगा हो रहा है। इन चुनौतियों को देखते हुए, उद्योग जगत निर्यात विविधीकरण के लिए नीतिगत समर्थन और विशेष प्रोत्साहन योजनाओं की उम्मीद कर रहा है ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रहे।