नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि हाई इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए भारत को अमेरिका के साथ निश्चित रूप से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) करना चाहिए। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी में गहरी पैठ बनाए बगैर तेज रफ्तार से बढ़ना नामुमकिन है।
अमेरिका के साथ समझौता भारत के लिए बहुत जरूरी
कांत ने भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित समझौते को देश के लिए बहुत अहम और जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि यह डील संतुलित होने के साथ ही ऐसा होना चाहिए जिससे दोनों देशों को फायदा हो। उन्होंने कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देश अमेरिका के साथ आर्थिक रिश्ते बढ़ाकर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
यह डील दोनों देशों के लिए फायदेमंद होनी चाहिए
उन्होंने कहा कि जब तक हम अमेरिकी इकोनॉमी में अपनी पैठ नहीं बनाते हमारे लिए बहुत तेज रफ्तार वाली गोथ हासिल करना नामुमकिन होगा। अमेरिका के साथ डील से भारतीय निर्यातकों के लिए एक समान मौके सुनिश्चित होने चाहिए। उन्होंने कहा, "अमेरिका के साथ हमारा एफटीए बहुत अहम है। लेकिन, यह दोनों देशों के लिए पारस्परिक फायदेमंद होना चाहिए।"
भारत को मजबूती से रखना चाहिए अपना पक्ष
अमेरिका के साथ डील के लिए कॉमर्स मिनिस्ट्री की बातचीत की तारीख करते हुए उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि कॉमर्स मिनिस्ट्री एफटीए को लेकर अच्छा काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत को बातचीत में अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए। कुछ मसलों के मामले में धैर्य जरूरी है। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि हमें बातचीत में मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए।"
व्यापक ट्रेड एग्रीमेंट के लिए भी चल रही है बातचीत
नीति आयोग के पूर्व सीईओ ने अमिताभ कांत ने राजेश अग्रवाल के 13 जुलाई के उस बयान के बाद ये बातें कही हैं, जिसमें अग्रवाल ने कहा था कि भारत-अमेरिका के बीच समझौते का फ्रेमवर्क हस्ताक्षर के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा था कि दोनों पक्षों को इसके समय और स्ट्रक्चर के लिए तैयार होना है। उन्होंने यह भी कहा था कि व्यापक ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी बातचीत भी आगे बढ़ रही है।
फरवरी में अंतरिम समझौते पर बनी थी सहमति
भारत और अमेरिका कई महीनों की बातचीत के बाद इस साल फरवरी में अंतरिम समझौते के लिए तैयार हुए थे। इस समझौते के तहत अमेरिका भारत से होने वाले एक्सपोर्ट्स पर टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने को तैयार हो चुका है। कांत ने कहा कि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी है।
30 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी की ग्रोथ दुनिया के लिए अहम
उन्होंने कहा, "अमेरिका 30 ट्रिलयन (लाख करोड़) डॉलर की इकोनॉमी है। यह 3.5 फीसदी की दर से भी बढ़ती है तो दुनिया के लिए बड़ी डिमांड बनेगी। इसलिए हमारे लिए इस इकोनॉमी में जगह बनाए बगैर तेजी से बढ़ना नामुमकिन होगा। "