Thali Price Hike: अगस्त में फिर महंगी हुई आपकी थाली! प्याज के दाम 43% उछले, जानिए वेज और नॉन-वेज थाली की पूरी रिपोर्ट

August 2026 Thali Cost Crisil Report: क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में शाकाहारी और मांसाहारी महंगी हुई है। थाली के महंगे होने की सबसे बड़ी वजह प्याज की कीमतों में आया 43% का उछाल रहा। वैसे सरकार ने कीमतें नियंत्रित करने के लिए 'कांदा एक्सप्रेस' के जरिए ₹35 प्रति किलो पर बफर प्याज बेचना शुरू कर दिया है। जानिए पूरी रिपोर्ट

अपडेटेड Sep 08, 2026 पर 4:15 PM
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महंगाई के इस दौर में कुछ चीजों ने आम जनता को राहत भी दी है

Crisil Roti Rice Rate Report August 2026: महंगाई के मोर्चे पर आम जनता की रसोई और जेब पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया है। अगस्त महीने में घर में बनने वाली शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह की थालियों की लागत में पिछले साल के मुकाबले बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की मंथली 'रोटी राइस रेट' (RRR) रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में शाकाहारी थाली की कीमत में 1% और मांसाहारी थाली की कीमत में 5% का इजाफा हुआ है।

थालियों के महंगे होने की सबसे बड़ी वजह प्याज की कीमतों में आया 43% का तगड़ा उछाल है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि रसोई का बजट क्यों बिगड़ा, किस चीज के दाम घटे और सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठा रही है।


क्यों महंगी हुई थाली?

क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर पुषण शर्मा के मुताबिक, टमाटर और आलू के सस्ते होने के बावजूद प्याज, खाने का तेल, चावल और एलपीजी सिलिंडर के दाम बढ़ने से थाली की लागत ऊंची बनी रही:

प्याज हुआ 43% महंगा: अगस्त 2025 में जो प्याज औसतन ₹28 प्रति किलो था, वह अगस्त 2026 में बढ़कर ₹40 प्रति किलो पर पहुंच गया। महाराष्ट्र में देर से आई फसल के नुकसान और रबी उत्पादन में 5-6% की कमी के कारण सप्लाई काफी टाइट रही।

खाने का तेल और LPG: मिडिल ईस्ट में तनाव और ऊर्जा संकट के कारण खाद्य तेल के दाम 11% और एलपीजी सिलिंडर 10% महंगे हुए।

चिकन की महंगाई: नॉन-वेज थाली की लागत में करीब 50% हिस्सेदारी रखने वाले बॉयलर चिकन के दाम में 10% की तेजी आई, जिसकी मुख्य वजह पोल्ट्री फीड (दाने) की बढ़ी हुई कीमतें रहीं।

कहां मिली राहत?

महंगाई के इस दौर में कुछ चीजों ने आम जनता को राहत भी दी है:

टमाटर (28% सस्ता): गर्मी में बुआई में देरी की वजह से जुलाई-अगस्त के दौरान मंडियों में टमाटर की आवक 20% तक बढ़ गई, जिससे इसके दाम पिछले साल से काफी कम रहे।

आलू (12% सस्ता): रबी सीजन में आलू के उत्पादन और रकबे में 2-3% की बढ़ोतरी के चलते आलू की कीमतें भी नियंत्रित रहीं।

महीने-दर-महीने का हाल

जुलाई की तुलना में अगस्त में वेज थाली 1% महंगी हुई, क्योंकि प्याज के दाम केवल एक महीने में 17% चढ़ गए। हालांकि, टमाटर के दामों में 7% की गिरावट ने इस झटके को थोड़ा कम किया। सावन का महीना होने के कारण मीट-चिकन की मांग घटी, जिससे बॉयलर चिकन के दाम 4% गिरे और नॉन-वेज थाली महीने-दर-महीने आधार पर 1% सस्ती हुई।

आने वाले दिनों में कैसा रहेगा खाने-पीने की चीजों का मिजाज?

आगे आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजों के दाम मिले-जुले रहने के आसार हैं, जहां प्याज की कम सप्लाई और खरीफ की फसल में देरी के कारण अगले 2-3 महीनों तक इसकी कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, वहीं कोल्ड स्टोरेज में पर्याप्त स्टॉक होने से आलू के दाम स्थिर रहने की उम्मीद है।

दूसरी ओर, दक्षिण भारत से आवक जारी रहने से टमाटर में फिलहाल राहत रहेगी, लेकिन आगामी फेस्टिव सीजन में मांग बढ़ने से इसके दामों में उछाल आ सकता है। दालों के बाजार में जहां सीमित आयात के चलते अरहर दाल में तेजी का रुख देखने को मिल सकता है, वहीं उड़द की नई फसल आने से इसके दामों में राहत मिलेगी। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल महंगा होने से फ्रेट और पैकेजिंग कॉस्ट बढ़ने के कारण खाद्य तेल की कीमतें भी तेज बनी रहने की संभावना है।

'कांदा एक्सप्रेस' से ₹35/किलो प्याज की बिक्री

उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के अनुसार, प्याज की बढ़ती कीमतों पर ब्रेक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने अपने बफर स्टॉक से सस्ता प्याज बेचना शुरू कर दिया है। NCCF और नेफेड के जरिए सरकार के पास 1.21 लाख टन प्याज का इमरजेंसी स्टॉक मौजूद है। उत्पादक राज्यों से मुख्य उपभोक्ता शहरों तक प्याज जल्दी पहुंचाने के लिए स्पेशल ट्रेन 'कांदा एक्सप्रेस' और ट्रकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार अब तक 17 शहरों में 4,000 टन से ज्यादा प्याज ₹35 प्रति किलो की रियायती दर पर बेच चुकी है।

 

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