GST Collection लगातार तीसरे महीने ₹2 लाख करोड़ के पार, रिफंड में आई गिरावट

GST Collections in Sept: सितंबर में सरकार को लगातार तीसरे महीने ₹2 लाख करोड़ से अधिक जीएसटी मिली। खास बात ये है कि आयात से जीएसटी कलेक्शन की रफ्तार अधिक तेज रही तो रिफंड में गिरावट आई है। चेक करें आंकड़े और जानिए एक्सपर्ट का क्या कहना है

अपडेटेड Oct 01, 2026 पर 1:10 PM
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सितंबर में नेट जीएसटी कलेक्शन की रफ्तार ग्रास रेवेन्यू से अधिक रही और यह सालाना 18.1% की रफ्तार से बढ़कर ₹1.76 लाख करोड़ पर पहुंच गया।

GST Collection in Sept 2026: देश में जीएसटी कलेक्शन का आंकड़ा सितंबर महीने में लगातार तीसरे महीने ₹2 लाख करोड़ से अधिक रहा। इसके प्रोविजनल आंकड़े सरकार ने आज गुरुवार 1 अक्टूबर को जारी किे हैं। इसके मुताबिक पिछले महीने सितंबर में जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 14.7% की रफ्तार से बढ़कर ₹2.04 लाख करोड़ हो गया। इससे पहले पिछले महीने अगस्त में जीएसटी कलेक्शन सालाना 14.3% और जुलाई महीने में 15.4% की रफ्तार से बढ़ा। पिछले महीने जो जीएसटी कलेक्ट हुई, उसमें घरेलू गतिविधियों की हिस्सेदारी अधिक रही लेकिन रफ्तार आया से कलेक्शन की अधिक तेज रही।

घरेलू लेन-देन से सितंबर में ग्रास जीएसटी रेवेन्यू सालाना आधार पर 10.1% बढ़कर लगभग ₹1.38 लाख करोड़ तो आयात से जीएसटी कलेक्शन 25.9% बढ़कर ₹65,525 करोड़ हो गया। वित्त वर्ष 2027 के पहले छह महीनों में कुल ग्रास जीएसटी कलेक्शन 11.6% बढ़कर ₹12.46 लाख करोड़ पर पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2026 की समान अवधि में यह आंकड़ा ₹11.17 लाख करोड़ था। इस दौरान नेट जीएसटी रेवेन्यू भी 10.4% बढ़कर ₹10.66 लाख करोड़ हो गया।

रिफंड में आई गिरावट


सितंबर में नेट जीएसटी कलेक्शन की रफ्तार ग्रास रेवेन्यू से अधिक रही और यह सालाना 18.1% की रफ्तार से बढ़कर ₹1.76 लाख करोड़ पर पहुंच गया। इसे रिफंड में कमी से सपोर्ट मिला। सितंबर में जीएसटी रिफंड सालाना 3% घटकर ₹27,001 करोड़ रह गया। घरेलू रिफंड में भी 13.5% की गिरावट आई।

राज्यवार दिखा फर्क

सितंबर में जीएसटी कलेक्शन में तेजी दिखी लेकिन राज्यवार इसमें काफी फर्क दिखा। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और तेलंगाना में जीएसटी कलेक्शन लगभग 15-18% की रफ्तार से बढ़ा। वहीं दूसरी तरफ तमिलनाडु में सितंबर के दौरान जीएसटी कलेक्शन में गिरावट आई।

क्या कहना है एक्सपर्ट का

ग्रांट थॉर्नटन भारत (Grant Thornton Bharat) के पार्टनर और टैक्स कंट्रोवर्सी मैनेजमेंट लीडर मनोज मिश्रा का कहना है कि ऐसे समय में जब एनर्जी प्राइसेज बढ़ी हुई है, जियो-पॉलिटिकल टेंशन बना हुआ है और सामानों के आवाजाही की लागत बढ़ी हुई है; आयात से जुड़े जीएसटी कलेक्शन की मजबूती अहम है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आयात से जुड़े जीएसटी कलेक्शन में उछाल को अपने आप में घरेलू खपत में मजबूती का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

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