Deloitte, PwC, EY जैसी विदेशी कंसल्टिंग फर्मों पर निर्भरता घटाने के लिए बड़ा प्लान, पीएमओ में होने वाली है अहम बैठक

डेलॉयट, पीडब्ल्यूसी, ईवाय और केपीएमजी दुनिया की चार बड़ी कंसल्टिंग कंपनियां हैं। इन्हें Big 4 कहा जाता है। इन कंपनियों की इंडियन यूनिट्स की ग्रोथ काफी अच्छी रही है। सरकार के साथ ही इन्हें बड़ी और मध्यम कंपनियों से काफी काम मिलता है

अपडेटेड Jun 05, 2025 पर 4:26 PM
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FY24 में बिग 4 की भारतीय इकाइयों का रेवेन्यू 38,800 करोड़ रुपये था।

सरकार ने दुनिया की बड़ी चार कंसल्टेंसी फर्मों पर निर्भरता घटाने के लिए बड़ा प्लान बनाया है। अभी दुनिया की चार बड़ी कंसल्टिंग फर्मों में डेलॉयट, पीडब्ल्यूसी, ईवाय और केपीएमजी शामिल हैं। इन्हे बिग 4 कहा जाता है। ये सभी विदेशी कंपनियां है। इसलिए सरकार इन पर निर्भरता घटाने के लिए देश में ही इनके टक्कर की कंसल्टिंग कंपनियां बनाना चाहती है। इस मसले पर विचार के लिए आज यानी 5 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में एक अहम बैठक होने वाली है। सरकार से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

मीटिंग की अध्यक्षता शक्तिकांत दास करेंगे

PMO में होने वाली बैठक की अध्यक्षता शक्तिकांत दास करेंगे, जो प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी हैं। प्रधानमंत्री की इकोनॉमिक एडवायजरी काउंसिल (PMEAC) के सदस्य संजीव सन्याल मीटिंग में एक प्रजेंटेशन देंगे। इसमें इंडिया में विश्व-स्तरीय कंसल्टिंग फर्म बनाने का रोडमैप शामिल होगा। शक्तिकांत दास रिजर्व बैंक के गवर्नर रह चुके हैं। उनके रिटायर होने के बाद संजय मल्होत्रा को RBI का गवर्नर नियुक्त किया गया है।


मीटिंग में ये अधिकारी शामिल होंगे

इस मसले से जुड़े एक सूत्र ने कहा, "पीएमओ में होने वाली बैठक में इकोनॉमिक अफेयर्स के सेक्रेटरी अजय सेठ, कॉर्पोरेट अफेयर्स की सेक्रेटरी दीप्ति मुखर्जी, रेवेन्यू सेक्रेटरी अरविंद श्रीवास्तव और फाइनेंशियल सर्विसेज के सेक्रेटरी एम नागराजू के शामिल होने की संभावना है।" इस बैठक में इंडियन कंसल्टिंग फर्मों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने और उनकी क्वालिटी इम्प्रूव करने के उपायों पर भी चर्चा होगी।

बिग 4 की इंडियन यूनिट्स की शानदार ग्रोथ

Big 4 ( Deloitte, PwC, EY और KPMG) कंपनियों की इंडियन यूनिट्स की ग्रोथ काफी अच्छी रही है। सरकार के साथ ही इन्हें बड़ी और मध्यम कंपनियों से काफी काम मिलता है। FY24 में बिग 4 की भारतीय इकाइयों का रेवेन्यू 38,800 करोड़ रुपये था। इसके FY25 में 45,000 करोड़ के पार हो जाने की उम्मीद है। इनमें से कुछ यूनिट्स का प्रदर्शन तो उनकी पेरेंट कंपनी से भी बेहतर रहा है। बिग 4 की भारतीय इकाइयां सरकार को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और फाइनेंशियल एडवाइस जैसी सेवाएं देती हैं। इसके अलावा ये PSU में सरकारी की हिस्सेदारी की बिक्री में भी सरकार को सलाह देती हैं।

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विदेशी कंसल्टिंग फर्मों पर घटेगी निर्भरता

सूत्र ने कहा, "इन कंपनियों का सरकार और सरकारी कंपनियों के कामकाज से करीब रिश्ता बन गया है। ऐसे में अगला अच्छा कदम देश में ही ऐसी कंपनियां बनाने की कोशिश होगी।" देश में Big 4 के टक्कर की कंसल्टिंग फर्म बनाने के पीछे सरकार का मकसद फॉरेन फर्मों पर निर्भरता घटाना है। आगे जैसे-जैसे इंडियन इकोनॉमी का आकार बढ़ेगी, बड़ी कंसल्टिंग फर्मों की सेवाओं की मांग बढ़ेगी।

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