भारत की जीडीपी ग्रोथ के डेटा आ गए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.7 फीसदी रही। यह अनुमान से ज्यादा है। दूसरे एडवान्स एस्टिमेट में ग्रोथ 7.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। स्टैटिस्टिक्स मिनिस्ट्री ने 5 जून की शाम जीडीपी ग्रोथ के डेटा जारी किए। वित्त वर्ष 2024-25 में रियल जीडीपी ग्रोथ 7.1 फीसदी था।
तीसरी तिमाही से कम रही चौथी तिमाही में ग्रोथ
वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी रही। तीसरी तिमाही में यह 8 फीसदी थी। तिमाही दर तिमाही आधार पर जीडीपी ग्रोथ में कमी की वजह मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ में गिरावट है। यह तीसरी तिमाही में 12.8 फीसदी थी, जबकि चौथी तिमाही में घटकर 7.3 फीसदी रह गई।
इस वित्त वर्ष में 1.1 फीसदी कम रह सकती है जीडीपी ग्रोथ
इस वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ 110 बेसिस प्वाइंट्स कम यानी 6.6 फीसदी रह सकती है। आरबीआई ने यह अनुमान जताया है। केंद्रीय बैंक ने 5 जून को मॉनेटरी पॉलिसी में भारत की ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया। केंद्रीय बैंक का कहना है कि प्रतिकूल वैश्विक माहौल का असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। इससे जीडीपी ग्रोथ में कमी आ सकती है।
खराब वैश्विक माहौल के बावजूद इकोनॉमी का अच्छा प्रदर्शन
सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में चौथी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था। इस तरह चौथी तिमाही की जीडीपी ग्रोथ भी अनुमान से ज्यादा है। अनुमान से ज्यादा ग्रोथ से इंडियन इकोनॉमी की ताकत का पता चलता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने और फरवरी में अमेरिका-ईरान में लड़ाई से क्रूड की कीमतों में उछाल के बावजूद इंडियन इकोनॉमी का प्रदर्शन बेहतर रहा है।
FY26 में ग्रॉस वैल्यू एडेड 7.9 फीसदी पर पहुंचा
FY26 में ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) बढ़कर 7.9 फीसदी पर पहुंच गया। जीवीए से इकोनॉमी में आर्थिक गतिविधियों का पता चलता है। एक साल पहले जीवीए 7.3 फीसदी था। मार्च तिमाही में जीवीए 7.9 फीसदी रहा, जो एक साल पहले की समान अवदि में 7.1 फीसदी था। हालांकि, नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ FY26 में घटकर 8.9 फीसदी पर आ गया। एक साल पहले यह 9.7 फीसदी था। मार्च तिमाही में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 9.1 फीसदी रही, जो एक साल पहले की समान अवदि में 9.5 फीसदी थी।
जीडीपी ग्रोथ में सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का बड़ा हाथ
FY26 में इकोनॉमी के अच्छे प्रदर्शन में सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का बड़ा हाथ रहा। इस दौरान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 10.7 फीसदी रही, जबकि एक साल पहले यह 9.3 फीसदी थी। ट्रेड, होटल्स, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशंस सर्विसेज की ग्रोथ 11 फीसदी रही। यह एक साल पहले के 6.6 फीसदी के मुकाबले काफी ज्यादा है।