RBI MPC meet June 2026 : RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज जून मॉनीटरी पॉलिसी का एलान कर दिया है। इस मौके पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल मजबूत हैं। हालांकि ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतों का असर पड़ा है। RBI ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा गया है। MPC का रुख भी'NEUTRAL'पर बरकरार रखा गया है। SDF रेट 5% पर और MSF रेट भी 5.50% पर बरकरार है।
उन्होंने आगे कहा कि महंगाई दर अब भी लक्ष्य के नीचे बरकरार है। घरेलू मांग में मजबूती बनी हुई है। मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में मजबूती कायम है। सर्विस सेक्टर में मजबूती बनी हुई है। एनर्जी की ऊंची कीमतों का असर दिख सकता है। महंगाई पर सप्लाई चेन में दिक्कतों का असर दिख सकता है। इसको ध्यान में रखते हुए सप्लाई साइड प्रेशर पर नजर बनी हुई है।
आज की पॉलिसी में वित्त वर्ष 2027 के लिए रियल GDP ग्रोथ अनुमान घटाकर 6.60% किया गया है। FY27 के रियल GDP अनुमान के 6.90% से घटाकर 6.60% किया गया है। वित्त वर्ष 2027 के पहली तिमाही के रियल GDP अनुमान के 6.80% से घटाकर 6.60% कर दिया गया है। वहीं,वित्त वर्ष 2027 के दूसरी तिमाही के रियल GDP अनुमान के 6.70% से घटाकर 6.30% कर दिया गया है। जबकि वित्त वर्ष 2027 के तीसरी तिमाही के रियल GDP अनुमान को 7% से घटाकर 6.50% कर दिया गया है। इसी तरह वित्त वर्ष 2027 के चौथी तिमाही के रियल GDP अनुमान को 7.2% से घटाकर 6.80% कर दिया गया है।
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष,कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और मौसम से जुड़े जोखिम अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहे हैं। गौरतलब है कि 2026 में यह इस तरह का दूसरा बदलाव है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर से पता चलता है कि दोनों सेक्टर मज़बूत बने हुए हैं और बिज़नेस की उम्मीदें भी पॉज़िटिव हैं। मल्होत्रा ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के असर को लेकर चिंताएं होने के बावजूद सर्विस सेक्टर भी अच्छी स्थिति में बना हुआ है।
खास बात यह है कि गवर्नर ने कहा कि एनर्जी की महंगी कीमतों का असर रिटेल प्रोडक्ट्स पर भी साफ दिख रहा है और लागत बढ़ने और अनिश्चितता से निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का असर खेती और ग्रामीण मांग पर पड़ेगा। सर्विस सेक्टर में लगातार तेजी,GST का असर और स्थिर रोजगार शहरी खपत को सहारा देते रहेंगे। हालांकि,कमजोर ग्लोबल मांग और लॉजिस्टिक्स की ऊंची लागत का माल के निर्यात पर बुरा असर पड़ सकता है।