RBI Monetary Policy: आरबीआई ने मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट नहीं बढ़ाया है। इसका मतलब है कि रेपो रेट 5.25 फीसदी बना रहेगा। इसकी उम्मीद पहले से थी। ज्यादातर इकोनॉमिस्ट्स का मानना था कि केंद्रीय बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी जून की मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 जून यानी शुक्रवार को सुबह 10 बजे मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान किया।
होम लोन, कार लोन सहित दूसरे लोन की EMI नहीं बढ़ेगी
RBI के इंटरेस्ट रेट में बदलाव नहीं करने का मतलब है कि फिलहाल होम लोन, कार लोन सहित दूसरे लोन के इंटरेस्ट रेट में बदलाव नहीं होगा। जिन लोगों ने लोन ले रखा है, उनकी EMI न तो फिलहाल बढ़ेगी और न ही घटेगी। केंद्रीय बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 3 जून को शुरू हुई थी। यह बैठक ऐसे वक्त हुई जब इकोनॉमी के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। मध्यपूर्व में टेंशन की वजह से क्रूड की कीमतें आसमान में हैं। इससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने गैस, पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई हैं। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा दिख रहा है।
2026 में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में नहीं किया है बदलाव
अंतिम बार आरबीआई ने दिसंबर 2025 में रेपो रेट में कमी की थी। इसके बाद इस साल आई दो पॉलिसी में रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया था। इस बार भी रेपो रेट में किसी तरह की बदलाव की उम्मीद नहीं थी। इसकी वजह यह है कि क्रूड की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने का खतरा है। ऐसे में केंद्रीय बैंक का फोकस महंगाई को काबू में करने पर होगा।
आरबीआई ने अपना रुख न्यूट्रल बनाए रखा है
जून की पॉलिसी पर करीबी नजरें लगी थीं। खासकर इकोनॉमिस्ट्स यह जानना चाहते थे कि आरबीआई अपने रुख में बदलाव करता है या नहीं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई का रुख न्यूट्रल बना रहेगा। लेकिन, एनालिस्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में केंद्रीय बैंक का रुख सख्त हो सकता है। हालांकि, संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक स्थितियां चिंतापूर्ण होने के बावजूद भारती की इकोनॉमी मजबूत स्थिति में है।
शेयर बाजारों में मॉनेटरी पॉलिसी के बाद गिरावट
शेयर बाजारों पर आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी के बाद दबाव बढ़ गया। कुछ ही देर बाद बाजार के प्रमुख सूचकांक लाल निशान में आ गए। 5 जून की सुबह शेयर बाजार मजबूत खुले थे। लेकिन, पॉलिसी के बाद बाजार में गिरावट आई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसकी वजह मुनाफावसूली हो सकती है।
एमपीसी के सभी सदस्य रेपो रेट अपरिवर्तित रखने के पक्ष में
एमपीसी के सभी 6 सदस्यों ने रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करने के प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिए। केंद्रीय बैंक का रुख न्यूट्रल बनाए रखने को लेकर भी सभी सदस्यों में सहमति देखने को मिली। इसका मतलब है कि एमपीसी का मानना है कि फिलहाल रेपो रेट को अपरिवर्तित बनाए रखना इकोनॉमी के हित में है।
आरबीआई ने जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाया
केंद्रीय बैंक ने इस वित्त वर्ष में इकोनॉमी की ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है। इसे 6.9 फीसदी से घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया गया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि एनर्जी की ऊंची कीमतों, सप्लाई में बाधा और बढ़ती इनपुट कॉस्ट का असर इकोनॉमिक एक्टिविटी पर पड़ रहा है। इसका असर जीडीपी की ग्रोथ पर पड़ेगा।
केंद्रीय बैंक ने इनफ्लेशन का अनुमान बढ़ाया
आरबीआई ने इस वित्त वर्ष के लिए इनफ्लेशन के अनुमान को बढ़ा दिया है। इसकी वजह ग्लोबल स्थितियां हैं। इसकी उम्मीद पहले से की जा रही थी। इसकी वजह यह है कि क्रूड की कीमतों में उछाल के बाद देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ी हैं। इससे महंगाई बढ़ेगी। आरबीआई ने रिटेल इनफ्लेशन के अनुमान को आधा फीसदी बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया है।