अमेरिका-ईरान में डील का पॉजिटिव असर इंडियन इकोनॉमी पर पड़ेगा। गोल्डमैन सैक्स ने भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ के अनुमान को बढ़ा दिया है। इनफ्लेशन को लेकर भी उसकी राय बदली है, क्योंकि क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट के बाद महंगाई बढ़ने का खतरा कम हुआ है। साथ ही सरकार के इंपोर्ट बिल में कमी आई है।
क्रूड में नरमी से भारत के लिए अच्छी संभावनाएं
गोल्डमैन सैक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मध्यपूर्व में तनाव घटने और क्रूड ऑयल में नरमी से भारतीय इकोनॉमी के लिए संभावनाएं बेहतर हुई हैं। उसने कहा है, "इस साल की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ हमारे पहले के अनुमान से ज्यादा रह सकता है। इससे हमें ग्रोथ के अपने अनुमान को बढ़ाना पड़ा है।" अमेरिकी इनवेस्टमेंट बैंक ने इस साल यानी 2026 में भारत के ग्रोथ के अनुमान को 0.3 फीसदी बढ़ाकर 6.8 फीसदी कर दिया है।
सप्लाई बढ़ने से क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट
अमेरिका-ईरान में डील के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल टैंकर्स और दूसरे जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई है। इससे क्रूड ऑयल की सप्लाई बढ़ी है। भारत क्रूड की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है। भारत आने वाला काफी क्रूड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है। हालांकि, इस साल की दूसरी छमाही में गोल्डमैन सैक्स क्रूड की औसत कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान जताया है, जो इसकी मौजूदा कीमत से ज्यादा है।
गोल्डमैन सैक्स ने इनफ्लेशन के अनुमान को घटाया
गोल्डमैन सैक्स ने भारत में इनफ्लेशन के अपने अनुमान को भी घटाया है। उसने इसे 5.1 फीसदी से घटाकर 4.9 फीसदी कर दिया गया है। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ग्लोबल यूरिया प्राइस में बड़ा करेक्शन आया है। इससे फर्टिलाइजर सब्सिडी में कमी आएगी। साथ ही क्रूड सस्ता होने से भी सरकार पर वित्तीय दबाव घटेगा।
मानसून में कम बारिश का अनुमान एक बड़ी चुनौती
गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, पहले के मुकाबले स्थितियां पॉजिटिव होने के बावजूद भारत के लिए कुछ चुनौतियां नजर आ रही हैं। मौसम विभाग ने इस साल मानसून की बारिश कम होने का अनुमान जताया है। इस साल अल नीनो के असर का भी अनुमान जताया गया है। ऐसा होने पर ग्रामीण इलाकों में डिमांड पर असर पड़ सकता है।
आरबीआई रेपो रेट 0.50 फीसदी बढ़ा सकता है
उसने कहा है कि आरबीआईआ इस साल रेपो रेट में 0.50 फीसदी का इजाफा कर सकता है। हालांकि, पेट्रोकेमिकल्स की कीमतों में लगातार गिरावट से इनफ्लेशन पर दबाव घटेगा, जिससे आरबीआई अपनी पॉलिसी सख्त करने में देर कर सकता है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थी। इससे भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर हुई। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया।