RBI ने बनाए नए नियम, डिजिटल पेमेंट में फ्रॉड के शिकार को मिलेगी बड़ी राहत

अगर किसी व्यक्ति के साथ 50,000 रुपये तक का डिजिटल पेमेंट फ्रॉड होता है तो उसके नुकसान के बड़े हिस्से की भरपाई हो सकेगी। आरबीआई ने नए नियम 24 जून को नोटिफाय कर दिए हैं। नए नियम 1 जनवरी, 2027 से लागू हो जाएंगे

अपडेटेड Jun 26, 2026 पर 4:18 PM
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वित्त वर्ष 2025-26 में 48,000 करोड़ रुपये से ज्यादा डिजिटल फ्रॉड के मामले सामने आए।

डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामले को देखते हुए आरबीआई ने नए नियम बनाए हैं। अगर किसी व्यक्ति के साथ 50,000 रुपये तक का डिजिटल पेमेंट फ्रॉड होता है तो उसके नुकसान के बड़े हिस्से की भरपाई हो सकेगी। आरबीआई ने नए नियम 24 जून को नोटिफाय कर दिए हैं। नए नियम 1 जनवरी, 2027 से लागू हो जाएंगे। इसे डिजिटल फ्रॉड के शिकार लोगों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

FY26 में 48000 करोड़ रुपये से ज्यादा डिजिटल फ्रॉड के मामले

वित्त वर्ष 2025-26 में 48,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के डिजिटल फ्रॉड के मामले सामने आए। इनमें कई ऐसे लोग हैं, जिनका संबंध कम आय वर्ग से है। ऐसे लोगों को ध्यान में रख आरबीआई ने डिजिटल पेमेंट में फ्रॉड के मामलों में कंपनसेशन के नियमों में बदलाव किए हैं। नए नियमों का मकसद फ्रॉड के शिकार लोगों को राहत देना है।


आरबीआई के नए नियम में लॉस के 85 फीसदी की हो सकेगी भरपाई

आरबीआई के नए नियमों में कहा गया है कि डिजिटल फ्रॉड का शिकार व्यक्ति अपने नुकसान के 85 फीसदी हिस्से की भरपाई का हकदार होगा। यह अमाउंट 25,000 रुपये तक होगा। शर्त यह है कि फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को इसकी शिकायत दर्ज करानी पड़ेगी। अगर व्यक्ति किसी ऐसे फ्रॉड से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शन (EBT) की शिकायत दर्ज कराता है, जिसमें ग्रॉस लॉस का अमाउंट 50,000 रुपये तक है तो उसे नेट लॉस के 85 फीसदी या 25,000 रुपये में से जो भी कम होगा, उसकी भरपाई की जाएगी।

पांच दिन के अंदर डिजिटल पेमेंट में फ्रॉड की शिकायत करनी होगी

केंद्रीय बैंक के नए नियम में यह साफ किया गया है कि लॉस की भरपाई के लिए फ्रॉड के शिकार व्यक्ति को पांच दिन के अंदर शिकायत दर्ज करानी होगी। आरबीआई के मुताबिक, फ्रॉड के शिकार व्यक्ति के बैंक को लॉस की भरपाई करनी होगी। अगर फ्रॉड बैंक की लापरवाही की वजह से हुआ है तो बैंक को लॉस की भरपाई करनी होगी। केंद्रीय बैंक के नियम के मुताबिक, बैंक को 500 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन के लिए ग्राहक को अलर्ट भेजना अनिवार्य है।

बैंंक को शिकायत मिलने के 45 दिन के अंदर करना होगा मामले का निपटारा

बैंक में ग्राहकों की शिकायतों के रजिस्ट्रेशन के लिए 24 घंटे का चैनल होना चाहिए। अगर कोई ग्राहक बैंक को इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजेक्शन में फ्रॉड के बारे में बताता है तो बैंक को 45 दिनो के अंदर शिकायत का निपटारा करना होगा। अगर फ्रॉड विदेश से जुड़ा है तो बैंक को 60 दिनों के अंदर शिकायत का निपटारा करना होगा। अगर फ्रॉड का अमाउंट 29,412 रुपये से कम है और ग्राहक को 85 फीसदी लॉस का भुगतान किया जाना है तो 65 फीसदी कॉस्ट आरबीआई वहन करेगा। 10 फीसदी कॉस्ट ग्राहक के बैंक को वहन करना होगा। 10 फीसदी उस बैंक को वहन करना होगा, जहां फ्रॉड का पैसा जाता है।

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कई लोग डिजिटल पेमेंट में फ्रॉड में शिकायत नहीं करते हैं

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आरबीआई के नए नियमों से उन ग्राहकों को काफी फायदा होगा, जिनकी गाढ़ी कमाई फ्रॉड करने वालों के जेब में चली जाती है। हालांकि, आरबीआई के नए नियमों के बारे में जागरूकता जरूरी है। कई ग्राहक फ्रॉड होने के बाद इसकी शिकायत नहीं करते हैं। इससे फ्रॉड करने वालों का हौसला बढ़ता है। जनसंचार के माध्यमों का इस्तेमाल इस बारे में जागरूकता फैलाने के लिए होना चाहिए।

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