सुधर रही देश की वित्तीय सेहत, FY26 के 11 महीने में कम हुआ घाटा, पहुंचा अनुमान के 80% पर

देश की वित्तीय सेहत में सुधार हो रहा है और इसकी तस्वीर सरकारी आंकड़ों से सामने आई है। इस वित्त वर्ष 2026 के 11 महीने में वित्तीय घाटा सालाना आधार पर कम हुआ है और पूरे साल के अनुमान का 80.4% रहा। हालांकि दिलचस्प बात ये है कि फरवरी महीने में घाटा सालाना आधार पर बढ़ा है। चेक करें पूरे आंकड़े और जानिए कि फरवरी में घाटा बढ़ा क्यों

अपडेटेड Mar 31, 2026 पर 9:08 AM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
फरवरी के आखिरी तक सालाना घाटे के लक्ष्य का 80% से अधिक पहले ही इस्तेमाल हो चुका है। ऐसे में वित्त वर्ष 2026 के आखिरी महीने में सरकार के खर्च और रेवेन्यू की स्थिति पर बाजार और रेटिंग एजेंसियां ​​बारीकी से नजर रखेंगी।

देश का राजकोषीय घाटा अप्रैल से फरवरी (Apr–Feb) में ₹12.52 लाख करोड़ रहा, जो FY26 के पूरे साल के अनुमान का 80.4% है। सरकार ने इससे जुड़े आंकड़े सोमवार 30 मार्च को पेश किए। पिछले साल की समान अवधि में राजकोषीय घाटा ₹13.47 लाख करोड़ था यानी कि सालाना आधार पर इसमें गिरावट आई है जो दिखाता है कि कुल मिलाकर वित्तीय स्थिति में सुधार यानी फिस्कल कंसालिडेशन हो रहा है। हालांकि एक और अहम बात ये है कि इस वित्त वर्ष 2026 की फरवरी में फिस्कल डेफेसिट यानी वित्तीय घाटा सालाना आधार पर ₹1.77 लाख करोड़ से बढ़कर ₹2.71 लाख करोड़ पर पहुंच गया।

वित्तीय घाटे का यह आंकड़ा पिछले रुझानों को और मजबूत कर रहा है जो पूरे साल सुधार का संकेत दे रहा है। अप्रैल-जनवरी तक फिस्कल डेफिसिट ₹9.81 लाख करोड़ था जोकि ₹15.58 लाख करोड़ के रिवाइज्ड एनुअल टारगेट का 63% है, और पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान ₹11.70 लाख करोड़ से कम है। फरवरी के आखिरी तक सालाना घाटे के लक्ष्य का 80% से अधिक पहले ही इस्तेमाल हो चुका है। ऐसे में वित्त वर्ष 2026 के आखिरी महीने में सरकार के खर्च और रेवेन्यू की स्थिति पर बाजार और रेटिंग एजेंसियां ​​बारीकी से नजर रखेंगी।

फरवरी में क्यों बढ़ा फिस्कल डेफेसिट?


कैपिटल एक्सपेंडिचर में तेज उछाल के चलते यह भी बढ़ गया। पिछले महीने फरवरी में कैपिटल स्पेंडिंग सालाना आधार पर ₹54,500 करोड़ से बढ़कर ₹87,000 करोड़ पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2026 के 11 महीने यानी अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 में बात करें तो कैपिटल एक्सपेंडिचर ₹9.3 ट्रिलियन यानी ₹9.3 लाख करोड़ का रहा जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा ₹8.1 ट्रिलियन था। इससे संकेत मिल रहा कि सरकार का जोर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर है।

सरकार को मिला अधिक रेवेन्यू

रेवेन्यू के मोर्चे पर बात करें तो इस वित्त वर्ष 2026 के शुरुआती 11 महीने में नेट टैक्स कलेक्शन सालाना आधार पर ₹20.2 ट्रिलियन से उछलकर ₹21.5 ट्रिलियन पहुंच गया। वहीं टैक्स के अलावा अन्य स्रोत से रेवेन्यू भी ₹4.9 ट्रिलियन से ₹5.8 ट्रिलियन पर पहुंच गया। इस दौरान सरकार का खर्च भी बढ़ा और यह ₹38.9 ट्रिलियन से उछलकर ₹40.4 ट्रिलियन पर पहुंच गया।

Wholesale Inflation: थोक महंगाई में उछाल, फरवरी में बढ़कर दो महीने के उच्चतम स्तर 2.38% पर पहुंची

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।