अप्रैल में घटा औद्योगिक उत्पादन, 8 महीने के निचले स्तर पर आया; बिजली और खनन ने दिया झटका

Industrial Production: अप्रैल 2025 में भारत का औद्योगिक उत्पादन घटकर आठ महीने के निचले स्तर 2.7% पर आ गया। बिजली और खनन क्षेत्र की कमजोरी मुख्य कारण रहे, जबकि पूंजीगत और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं में सुधार दिखा। मई में भी ग्रोथ कमजोर रहने की आशंका है।

अपडेटेड May 28, 2025 पर 7:19 PM
अप्रैल में खनन क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में 0.2 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि मासिक आधार पर यह 17 प्रतिशत कम रहा।

Industrial Production: भारत का औद्योगिक उत्पादन अप्रैल 2025 में घटकर 2.7 प्रतिशत पर आ गया। यह पिछले आठ महीनों का सबसे निचला स्तर है। 28 मई को जारी सरकार आंकड़ों के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से बिजली और खनन क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन के कारण हुई है। मार्च 2025 में संशोधित औद्योगिक उत्पादन वृद्धि 3.9 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

कोर सेक्टर, जो औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान करता है, अप्रैल में केवल 0.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर सका। यह भी पिछले आठ महीनों में सबसे कमजोर प्रदर्शन रहा। मार्च में यह वृद्धि 4.6 प्रतिशत थी। विश्लेषकों का मानना है कि उच्च आधार प्रभाव और वैश्विक अनिश्चितताओं ने इस गिरावट को और तेज किया। खासकर, अमेरिका में ट्रंप टैरिफ से जुड़ी चिंताओं ने।

इक्ररा की प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नायर (Aditi Nayar) ने कहा, "IIP ग्रोथ अनुमान के मुताबिक अप्रैल में घटकर 2.7% पर आ गई। वहीं, कोर सेक्टर में आई तेज गिरावट के बावजूद यह गिरावट अनुमान से कम रही। इससे संकेत मिलता है कि IIP के नॉन-कोर हिस्से ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।"


खनन और बिजली सबसे कमजोर कड़ी

अप्रैल में खनन क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में 0.2 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि मासिक आधार पर यह 17 प्रतिशत कम रहा। यह इस क्षेत्र में पिछले आठ महीनों में पहली गिरावट है। बिजली उत्पादन भी घटकर 1.1 प्रतिशत रह गया, जो मार्च में 7.5 प्रतिशत था।

मैन्युफैक्चरिंग ने दी थोड़ी राहत

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ अप्रैल में 3.4 प्रतिशत रही, जो मार्च के 3.9 प्रतिशत से थोड़ी कम जरूर है, लेकिन अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर मानी जा रही है। केयरएज की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा (Rajani Sinha) के अनुसार, "विनिर्माण क्षेत्र ने कुल IIP को सहारा दिया, जबकि खनन और बिजली क्षेत्र की कमजोरी ने समग्र वृद्धि पर दबाव डाला।"

कुछ क्षेत्रों में सकारात्मक संकेत

कुछ उपयोग-आधारित क्षेत्रों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला। पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन अप्रैल में 20.3 प्रतिशत बढ़ा, जो लगभग दो वर्षों की सबसे तेज वृद्धि है। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की वृद्धि 6.4 प्रतिशत रही, जबकि मार्च में यह 6.9 प्रतिशत थी।

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर पारस जसराय (Paras Jasrai) ने कहा, "इन्फ्रास्ट्रक्चर वस्तुओं की वृद्धि घटकर सात महीनों के निचले स्तर 4.0 प्रतिशत पर आ गई। उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं का उत्पादन लगातार तीसरे महीने कमजोर रहा। अप्रैल में इसमें 1.7 प्रतिशत की गिरावट आई। हालांकि, FY26 में खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट और हालिया मौद्रिक ढील के सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।"

मई के आंकड़ों को लेकर आशंका

एक्सपर्ट के अनुसार, मई में भी औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि कमजोर रह सकती है। समय से पहले शुरू हुआ मानसून बिजली और निर्माण से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। जसराय के मुताबिक, "मई 2024 में 6.3 प्रतिशत की उच्च वृद्धि के आधार प्रभाव के कारण मई 2025 में फैक्ट्री उत्पादन की वार्षिक वृद्धि 2 प्रतिशत से नीचे रह सकती है।"

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