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FY26 में उम्मीद से बेहतर रही GDP ग्रोथ, लेकिन FY27 में पड़ सकती है धीमी; अर्थशास्त्रियों को क्यों सता रहा डर

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू बुनियादों के कारण स्थिर बनी हुई है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के चलते वित्त वर्ष 2026-27 में चुनौतियां बढ़ने की आशंका है। पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न व्यवधानों का असर आने वाले महीनों में आर्थिक आंकड़ों में धीरे-धीरे दिखाई देना शुरू होगा

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Jun 06, 2026 पर 4:19 PM
FY26 में उम्मीद से बेहतर रही GDP ग्रोथ, लेकिन FY27 में पड़ सकती है धीमी; अर्थशास्त्रियों को क्यों सता रहा डर
पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए GDP ग्रोथ रेट 7.7 प्रतिशत रही, जो दूसरे एडवांस एस्टिमेट 7.6 प्रतिशत से अधिक है।

भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। लेकिन अर्थशास्त्रियों को डर है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, ऊर्जा की ऊंची कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण चालू वित्त वर्ष 2026-27 में वृद्धि दर धीमी पड़ सकती है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की तरफ से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) ग्रोथ रेट 7.8 प्रतिशत रही। अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में यह 8 प्रतिशत थी।

हालांकि पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए GDP ग्रोथ रेट 7.7 प्रतिशत रही, जो दूसरे एडवांस एस्टिमेट 7.6 प्रतिशत से अधिक है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मजबूत घरेलू मांग, अच्छी निजी खपत और निवेश गतिविधियों में तेजी के कारण घरेलू अर्थव्यवस्था पश्चिम एशिया संघर्ष के शुरुआती असर को झेलने में सक्षम रही।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी का कहना है कि प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद मार्च तिमाही की वृद्धि पिछली 10 तिमाहियों के औसत से काफी ऊपर रही।वहीं, डेलॉइट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार का कहना है कि वृद्धि में मांग और उत्पादन दोनों का योगदान रहा। ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) ग्रोथ 7.9 प्रतिशत रही। यह संकेत देता है कि सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में मजबूती बनी रही।

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