इस साल मई महीने में देश का व्यापार घाटा (Trade Deficit) 28.21 अरब डॉलर रहा। अप्रैल महीने में यह 28.38 अरब डॉलर था। हालांकि मई के दौरान निर्यात (Export) और आयात (Import) में बढ़ोतरी रही। व्यापार घाटा निर्यात और आयात के बीच का अंतर होता है। अगर आयात, निर्यात से ज्यादा होता है तो ट्रेड डेफिसिट की स्थिति बनती है। वहीं निर्यात के आयात से ज्यादा होने पर ट्रेड सरप्लस की स्थिति बनती है।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश से सामान का निर्यात मई में सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़कर 45.2 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। अप्रैल 2026 में यह 43.56 अरब डॉलर था।आयात भी मई में एक साल पहले से 20.62 प्रतिशत बढ़कर 73.41 अरब डॉलर हो गया। अप्रैल महीने में आयात 71.94 अरब डॉलर था। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि मई में भारत का सामान का निर्यात अब तक का सबसे ज्यादा मासिक निर्यात रहा।
पेट्रोलियम प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट में 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी
एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी की एक बड़ी वजह पेट्रोलियम सेक्टर रहा। मई में पेट्रोलियम प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट में सालाना आधार पर 54.89 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जेम्स और ज्वेलरी के एक्सपोर्ट में भी 6.66 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत का मई में पश्चिम एशिया को निर्यात मामूली तौर पर घटकर 5.30 अरब डॉलर रहा, जो मई 2025 में 5.38 अरब अमेरिकी डॉलर था।
अप्रैल-मई में निर्यात 16 प्रतिशत बढ़ा
देश का निर्यात अप्रैल-मई के दौरान सालाना आधार पर 16.09 प्रतिशत बढ़कर 88.91 अरब डॉलर रहा। मंत्रालय के अनुसार, सोने का आयात अप्रैल-मई के दौरान 60 प्रतिशत बढ़कर 9.04 अरब डॉलर हो गया। अप्रैल-मई 2026 के दौरान चीन से आयात बढ़कर 24.7 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 20.22 अरब डॉलर था। अग्रवाल के मुताबिक, रुझान को देखते हुए यह वित्त वर्ष निर्यात के लिए अच्छा रहने की उम्मीद है।