WPI Inflation: थोक महंगाई बढ़कर 9.68% पर पहुंची; फ्यूल, फूड और मैन्युफैक्चर्ड आइटम्स के बढ़े दाम

WPI Inflation: थोक महंगाई लगातार आठवें महीने बढ़ी है और अब 9.68% पर पहुंच गई है। ईंधन, खाद्य पदार्थ और मैन्युफैक्चर्ड सामानों की कीमतों में तेज उछाल इसके पीछे बड़ी वजह है। सवाल यह है कि क्या अब यह दबाव आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंचने वाला है?

अपडेटेड Jun 15, 2026 पर 3:51 PM
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प्राइमरी आर्टिकल्स में महंगाई अप्रैल के 3.78% से बढ़कर मई में 4.99% हो गई।

WPI Inflation: थोक महंगाई (WPI Inflation) मई में बढ़कर 9.68% पर पहुंच गई। अप्रैल में यह 8.26% थी। ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ने से महंगाई में यह उछाल आया है।

15 जून को जारी आंकड़ों में सरकार ने पहली बार 2022-23 को बेस ईयर मानकर तैयार की गई नई WPI सीरीज का इस्तेमाल किया है। यह लगातार आठवां महीना है, जब थोक महंगाई बढ़ी है। इससे संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

ईंधन की कीमतों ने बढ़ाई चिंता


मई में थोक महंगाई बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान फ्यूल एंड पावर सेक्टर का रहा। इस श्रेणी में महंगाई बढ़कर 30.33% हो गई। अप्रैल में यह 24.89% थी। मिनरल ऑयल्स में महंगाई 40.74% से बढ़कर 49.82% पर पहुंच गई। वहीं क्रूड पेट्रोलियम और नेचुरल गैस में महंगाई 56.31% से बढ़कर 61.51% हो गई।

रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इससे आयातित महंगाई का खतरा बढ़ गया है और इसका असर देश की सप्लाई चेन तक पहुंच सकता है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी बढ़ा दबाव

WPI में सबसे ज्यादा वजन मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का होता है। इसका हिस्सा 63.1% है। इस कैटेगरी में महंगाई अप्रैल के 6.68% से बढ़कर मई में 7.48% हो गई। इसका मतलब है कि सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि दूसरे उद्योगों की लागत भी बढ़ रही है।

केमिकल्स एंड केमिकल प्रोडक्ट्स में महंगाई 13.40% रही। बेसिक मेटल्स में यह 12.30% रही। इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट में 11.32% और टेक्सटाइल्स में 10.22% महंगाई दर्ज की गई। रबर और प्लास्टिक प्रोडक्ट्स में महंगाई बढ़कर 9.59% पर पहुंच गई।

खाने-पीने की चीजें भी हुईं महंगी

थोक स्तर पर खाद्य महंगाई भी लगातार बढ़ रही है। WPI फूड इंडेक्स अप्रैल के 3.11% से बढ़कर मई में 4.49% हो गया। फूड आर्टिकल्स में महंगाई 2.43% से बढ़कर 3.60% हो गई। वहीं मैन्युफैक्चर्ड फूड प्रोडक्ट्स में महंगाई 4.53% से बढ़कर 6.14% पर पहुंच गई। इससे संकेत मिलता है कि कच्चे खाद्य पदार्थों की बढ़ी हुई कीमतें अब प्रोसेस्ड फूड तक पहुंचने लगी हैं।

प्राइमरी आर्टिकल्स में भी तेजी

प्राइमरी आर्टिकल्स में महंगाई अप्रैल के 3.78% से बढ़कर मई में 4.99% हो गई। नॉन-फूड आर्टिकल्स में महंगाई 7.60% से बढ़कर 9.49% पर पहुंच गई। हालांकि मिनरल्स में महंगाई कुछ कम हुई है। यह 6.36% से घटकर 4.91% रह गई।

पहली बार जारी हुआ PPI डेटा

सरकार ने पहली बार प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) के आंकड़े भी जारी किए हैं। मई में मैन्युफैक्चर्ड गुड्स के लिए PPI महंगाई स्थिर रही। फिलहाल सरकार इनपुट और आउटपुट PPI डेटा को ट्रायल आधार पर जारी करेगी। यह पहली बार है जब WPI के साथ PPI के आंकड़े भी सार्वजनिक किए गए हैं।

सर्विसेज सेक्टर में राहत

रिपोर्ट के मुताबिक महंगाई का दबाव अभी मुख्य रूप से कमोडिटीज और वस्तुओं तक सीमित है। सर्विसेज सेक्टर में स्थिति फिलहाल काफी हद तक नियंत्रित बनी हुई है।

सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन सर्विस प्राइस इंडेक्स में तिमाही आधार पर 2.8% की बढ़ोतरी हुई। रेलवे पैसेंजर सर्विसेज की कीमतें 2.2% बढ़ीं। वहीं बैंकिंग सर्विसेज की कीमतों में 1.3% की गिरावट आई। पेंशन फंड मैनेजमेंट सर्विसेज 2.4% सस्ती हुईं। एयर पैसेंजर सर्विसेज की कीमतें 0.4% घटीं। टेलीकॉम और रेलवे फ्रेट सर्विसेज की कीमतों में लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ।

आगे क्या हो सकता है?

रिपोर्ट का कहना है कि मौजूदा महंगाई मुख्य रूप से सप्लाई साइड दबाव का नतीजा है। खासकर ऊर्जा और कच्चे माल की बढ़ी हुई कीमतें इसकी बड़ी वजह हैं।

फिलहाल मांग की वजह से महंगाई बढ़ने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। लेकिन अगर कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर डालना जारी रखती हैं, तो आने वाले महीनों में इसका असर रिटेल महंगाई पर भी दिखाई दे सकता है। यानी थोक स्तर पर बढ़ रही महंगाई आगे चलकर आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी असर डाल सकती है।

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