RBI ने कहा-भारत प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले बाहरी झटकों का बेहतर सामना कर सकता है

RBI ने जून की फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट (एफएसआर) 30 जून को रिलीज कर दी। इसमें कहा गया है कि पश्चिम एशिया में शांति को लेकर समझौते से रिस्क कम हुआ है। इसके अलावा सरकार और आरबीआई ने हाल में पॉलिसी के लेवल पर कदम उठाए हैं। इसका मकसद देश में कैपिटल फ्लो बढ़ाना है

अपडेटेड Jun 30, 2026 पर 6:58 PM
आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के शिड्यूल्ड कमर्शियल बैंक्स (SCBs) के पास पर्याप्त कैपिटल है।

आरबीआई ने 30 जून को इस महीने की फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट (एफएसआर) रिलीज की। इसमें कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति इसके प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले मजबूत है। इससे भारत किसी बाहरी झटके या फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के रिस्क का सामना करने की बेहतर स्थिति में है।

अमेरिका-ईरान में डील से घटा है रिस्क

आरबीआई ने कहा है कि पश्चिम एशिया में शांति को लेकर समझौते से रिस्क कम हुआ है। इसके अलावा सरकार और आरबीआई ने हाल में पॉलिसी के लेवल पर कदम उठाए हैं। इसका मकसद देश में कैपिटल फ्लो बढ़ाना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडिया का फाइनेंशियल सिस्टम मजबूत है। इससे बैंकों और नॉन-बैंक लेंडर्स (कर्ज देने वाली कंपनियों) की मजबूत बैलेंसशीट का सपोर्ट हासिल है।


बैंकों के पास कैपिटल की कमी नहीं

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के शिड्यूल्ड कमर्शियल बैंक्स (SCBs) के पास पर्याप्त कैपिटल है। इन्हें स्ट्रॉन्ग लिक्विडिटी बफर का सपोर्ट है। बैंकों की एसेट क्वालिटी बेहतर हो रही है और मुनाफा कमाने की ताकत बढ़ रही है। मैक्रो स्ट्रेस टेस्ट के नतीजे यह दिखाते हैं कि देश का बैंकिंग सिस्टम बड़े झटकों को बर्दाश्त करने में समक्ष है। एग्रीगेट कैपिटल रेशियो रेगुलेटर के तय मानकों से ज्यादा रहने का अनुमान है।

एनबीएफसी और इंश्योरेंस सेक्टर की स्थिति भी मजबूत

एनबीएफसी के बारे में इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इनकी वित्तीय स्थिति मजबूत है। इन्हें पर्याप्त पूंजी, एसेट क्वालिटी और लगातार मुनाफे का सपोर्ट हासिल है। जहां तक इंश्योरेंस सेक्टर की बात है तो उसकी बैलेंसशीट मजबूत है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का इनसॉल्वेंसी रेशियो तय न्यूनतम मानक से ऊपर है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट भी बार-बार के झटकों के बावजूद मजबूत बना हुआ है। इन झटकों में पश्चिम एशिया में हालिया तनाव शामिल है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि सप्लाई चेन में बाधा आने से वित्तीय स्थिति पर दबाव बन सकता है। इससे महंगाई बढ़ने का भी रिस्क है।

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क्रूड की कीमतें हाई लेवल से काफी नीचे 

अमेरिका-ईरान में लड़ाई की वजह से क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थी। इससे भारत में भी पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा था। इसके बावजूद देश में इन तीनों की बड़ी किल्लत नहीं हुई। सरकारी ऑयल कंपनियों ने ईंथन की कीमतें बढ़ाई। लेकिन, यह वृद्धि कई दूसरे देशों के मुकाबले काफी कम थी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आवागमन शुरू होने से ईंधन की सप्लाई की बाधा कम हुई है। इससे क्रूड में बड़ी गिरावट आई है।

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