आरबीआई ने विदेशी मुद्रा भंडार से सोना नहीं बेचा है। सीएनबीसी-टीवी18 की खबर के मुताबिक, सरकार से जुड़े सूत्रों ने उन खबरों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया है कि आरबीआई ने देश के फॉरेन एक्सचेंज एसेट्स को बचाए रखने के लिए गोल्ड रिजर्व बेचा है।
आरबीआई ने विदेशी मुद्रा भंडार से सोना नहीं बेचा है। सीएनबीसी-टीवी18 की खबर के मुताबिक, सरकार से जुड़े सूत्रों ने उन खबरों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया है कि आरबीआई ने देश के फॉरेन एक्सचेंज एसेट्स को बचाए रखने के लिए गोल्ड रिजर्व बेचा है।
2 जून को आरबीआई के सोना बेचने की खबर आई थी
यह स्पष्टीकरण ब्लूमबर्ग की उस खबर के एक दिन बाद आया है, जिसमें आरबीआई के अपने गोल्ड रिजर्व का एक हिस्सा बेच देने का अनुमान जताया गया था। खबर में कहा गया था कि माना जाता है कि केंद्रीय बैंक ने मिडिलईस्ट में चल रहे टकराव के बीच अपने विदेशी करेंसी रिजर्व को गिरने से बचाने के लिए सोना बेचा है।
RBI के 12 अरब डॉलर का सोना बेचने का अनुमान जताया गया था
ब्लूमबर्ग की खबर में बताया गया था कि मई में दो हफ्तों में आरबीआई के 12 अरब डॉलर मूल्य के सोना बेचने का अनुमान है। इस दौरान आरबीआई ने करीब 7.5 अरब डॉलर के फॉरेन करेंसी एसेट्स खरीदे हैं। यह एसेसमेंट अभिषेक गुप्ता ने किया था, जो ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स में सीनियर इडिया इकोनॉमिस्ट हैं।
इस आधार पर आरबीआई के सोना बेचने का अनुमान लगाया गया
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बावजूद आरबीआई के बुलियन रिजर्व की वैल्यू में कमी आई, जबकि केंद्रीय बैंक के गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी। खबर में गुप्ता को यह कहते हुए उद्धृत किया गया कि वैल्यू में इस फर्क से ऐसा लगता है कि आरबीआई ने इस पीरियड में सोना बेचा होगा।
सोना बेचने की खबर आने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
इस खबर के आने के बाद कांग्रेस ने गोल्ड रिजर्व बेचने के लिए सरकार पर निशाना साधा। विपक्षी पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें कहा गया, "यह अमृत काल है। मोदी सरकार ने देश का सोना बेच दिया है।"
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विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन और रुपये की स्टैबिलिटी RBI की जिम्मेदारी
अमेरिका-ईरान में लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतों में उछाल आया है। इससे सरकार का इंपोर्ट बिल बढ़ा है। इसका असर रुपये पर दिखा है। डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी गिरावट आई है। आरबीआई स्थिति से निपटने की कोशिश कर रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार के प्रबंधन की जिम्मेदारी आरबीआई की है। वह स्थिति के हिसाब से जरूरी कदम उठाता है।
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