RBI MPC Meeting: आज से शुरू हुई RBI MPC की बैठक, आपकी EMI और FD को लगेगा महंगाई का झटका या मिलेगी राहत? जानें

RBI MPC meeting June 2026: इस बैठक में रुपये की स्थिति पर सबसे गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है। साल 2026 में भारतीय करेंसी में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है, जो पिछले एक दशक में इसका सबसे खराब प्रदर्शन है। ऐसे में निवेशक यह देखना चाहते हैं कि आरबीआई एक्सचेंज रेट में आ रहे इस उतार-चढ़ाव को थामने के लिए क्या ठोस रोडमैप पेश करता है

अपडेटेड Jun 03, 2026 पर 12:16 PM
इस बार की बैठक पर लोन लेने वाले आम लोगों से लेकर FD करने वाले निवेशकों और शेयर बाजार की पैनी नजर है

RBI MPC Meeting 2026: भारतीय रिजर्व बैंक की सबसे महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज यानी बुधवार से शुरू हो गई है। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार, 5 जून को इस बैठक में लिए गए नीतिगत फैसलों का ऐलान करेंगे।

इस बार की बैठक पर लोन लेने वाले आम लोगों से लेकर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करने वाले निवेशकों और शेयर बाजार की पैनी नजर है। वैसे ज्यादातर जानकारों का मानना है कि इस बार भी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच महंगाई, जीडीपी ग्रोथ और लगातार कमजोर होते रुपये पर आरबीआई का रुख क्या रहता है, यह देखना सबसे अहम होगा।

क्यों अहम है जून की यह क्रेडिट पॉलिसी बैठक?


जून 2026 की यह समीक्षा बैठक बेहद चुनौतीपूर्ण समय में हो रही है। मौजूदा वक्त में कई वैश्विक और घरेलू मोर्चे पर चिंताएं बढ़ी हैं:

मिडिल ईस्ट में तनाव: पश्चिमी एशिया में लंबे समय से जारी युद्ध और तनाव ने वैश्विक बाजारों को हिला रखा है।

कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतें: वैश्विक संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल और गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

सप्लाई-चेन और रुपया: दुनिया भर में सप्लाई-चेन बाधित हुई है और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसल गया है। इन सभी कारणों से देश में महंगाई बढ़ने और आर्थिक विकास दर प्रभावित होने का डर है।

'दरें वही रहेंगी, पर तेवर होंगे सख्त'

'मनीकंट्रोल' के 16 अर्थशास्त्रियों, फिक्स्ड-इनकम हेड और ट्रेजरी प्रमुखों के बीच किए गए एक पोल में आम सहमति यही बनी है कि बढ़ती महंगाई के जोखिम और रुपये की कमजोरी के बावजूद आरबीआई इस बार बेंचमार्क ब्याज दर यानी रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है।

हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि आरबीआई अपना रुख 'न्यूट्रल' रखते हुए भी अपने बयानों में कड़ा और आक्रामक रुख अपना सकता है, ताकि करेंसी में आ रहे उतार-चढ़ाव और बढ़ती एनर्जी कॉस्ट को संभाला जा सके।

दिग्गज एक्सपर्ट्स का क्या है अनुमान?

कोटक महिंद्रा एएमसी के फिक्स्ड इनकम हेड अभिषेक बिसेन का मानना है कि भले ही अभी CPI महंगाई 3.48% पर नियंत्रण में दिख रही हो, लेकिन थोक महंगाई (WPI) और ईंधन की बढ़ती लागत नए खतरे का संकेत दे रही है। उनके मुताबिक, आरबीआई फिलहाल रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखेगा, लेकिन वह महंगाई के अनुमान को बढ़ा सकता है और जीडीपी ग्रोथ के अनुमान में थोड़ी कटौती कर सकता है। साथ ही, रुपये को संभालने के लिए विदेशी मुद्रा साधनों का सहारा ले सकता है।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि हमें नीतिगत दरों में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है। लेकिन आरबीआई का लहजा काफी सतर्क और सख्त होगा। केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने महंगाई के अनुमान को बढ़ाकर 5% के करीब कर सकता है और जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.9% से घटाकर करीब 6.5% कर सकता है।

10 साल के सबसे खराब दौर में रुपया

इस बैठक में रुपये की स्थिति पर सबसे गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है। साल 2026 में भारतीय करेंसी में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है, जो पिछले एक दशक में इसका सबसे खराब प्रदर्शन है। ऐसे में निवेशक यह देखना चाहते हैं कि आरबीआई एक्सचेंज रेट में आ रहे इस उतार-चढ़ाव को थामने के लिए क्या ठोस रोडमैप पेश करता है।

SBI के आर्थिक अनुसंधान विभाग ने भी वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने महंगाई अनुमान को संशोधित कर 5 से 5.1 प्रतिशत कर दिया है और जीडीपी ग्रोथ को 6.6 प्रतिशत पर आंका है। साफ है कि दरों में बदलाव न होने के बावजूद, भविष्य की मौद्रिक नीति को समझने के लिए गवर्नर का बयान बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है।

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